डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा को भाजपा का राष्ट्रीय मंत्री बनाया गया। झारखंड से राज्यसभा सांसद के रूप में उन्होंने विकास और जनहित के कई मुद्दे संसद में उठाए हैं।
News Saga Desk
रांची: झारखंड से राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा को भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय मंत्री की जिम्मेदारी दी है। संगठन के प्रति लंबे समय से सक्रिय भूमिका, प्रदेश भाजपा में विभिन्न दायित्वों के अनुभव और संसद में झारखंड से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाने की उनकी सक्रियता को इस नियुक्ति की अहम वजह माना जा रहा है। डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा वर्ष 2024 में झारखंड से राज्यसभा के लिए भाजपा के उम्मीदवार बनाए गए थे और उन्होंने सदस्य के रूप में शपथ ली थी।

नई जिम्मेदारी के साथ डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा का संगठनात्मक दायरा अब प्रदेश से बढ़कर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है। भाजपा के लिए यह नियुक्ति झारखंड को राष्ट्रीय संगठन में प्रतिनिधित्व देने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
संगठन में लंबे अनुभव का मिला लाभ
डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने झारखंड भाजपा में प्रदेश महामंत्री समेत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। संगठन पर्व के दौरान प्रदेश चुनाव अधिकारी के तौर पर उन्होंने सदस्यता अभियान से लेकर बूथ, मंडल, जिला और प्रदेश स्तर की संगठनात्मक प्रक्रियाओं में भूमिका निभाई।
जनवरी 2026 में प्रदेश के सांगठनिक जिलों में निर्वाचन प्रक्रिया को पूरा कराने और प्रदेश अध्यक्ष तथा राष्ट्रीय परिषद के निर्वाचन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में भी उनकी जिम्मेदारी रही। संगठनात्मक चुनावों और कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय का यह अनुभव अब राष्ट्रीय संगठन में उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
संसद में झारखंड के मुद्दों को दी प्राथमिकता
राज्यसभा सांसद बनने के बाद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने झारखंड के विकास और जनहित से जुड़े कई मुद्दों को संसद में उठाया है। इनमें स्वास्थ्य, रेल कनेक्टिविटी, खनन, जल संरक्षण, कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आधारभूत संरचना जैसे विषय शामिल हैं।
संसदीय गतिविधियों से जुड़े उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 13 अगस्त 2026 तक उनकी राज्यसभा में उपस्थिति 88 प्रतिशत रही है। इस दौरान उन्होंने 97 चर्चाओं और संसदीय कार्यवाहियों में भाग लिया तथा 158 प्रश्न पूछे। मानसून सत्र 2026 में उनकी उपस्थिति 100 प्रतिशत बताई गई है।
इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि उन्होंने राज्यसभा सदस्य के रूप में नियमित संसदीय भागीदारी को प्राथमिकता दी है।
झारखंड की ऐतिहासिक स्वास्थ्य संस्था सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियाट्री (CIP), रांची को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित करने की मांग भी डॉ. वर्मा ने संसद में उठाई है।
31 जुलाई 2026 को राज्यसभा में उन्होंने CIP रांची की ऐतिहासिक भूमिका, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा, प्रशिक्षण और शोध में संस्थान के योगदान का उल्लेख करते हुए इसे Institution of National Importance का दर्जा देने की दिशा में पहल करने का आग्रह किया।
यह मुद्दा झारखंड के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। CIP रांची की स्थापना वर्ष 1918 में हुई थी और यह देश के पुराने मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों में शामिल है।
कोल्हान क्षेत्र को राजधानी रांची से बेहतर रेल संपर्क देने की मांग भी डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा की संसदीय प्राथमिकताओं में रही है। 8 अगस्त 2024 को उन्होंने राज्यसभा में विशेष उल्लेख के माध्यम से बड़बिल से चाईबासा होते हुए रांची तक रेल सेवा शुरू करने की मांग रखी थी।
उन्होंने गुवा, बड़बिल, नोवामुंडी, डोंगवापोशी और झींकपानी जैसे क्षेत्रों के लोगों को रांची आने-जाने में होने वाली कठिनाइयों का मुद्दा उठाया। बड़बिल-चाईबासा-रांची फास्ट मेमू सेवा शुरू होने से क्षेत्रीय आवागमन के साथ आर्थिक और सामाजिक संपर्क बेहतर होने की संभावना जताई गई थी।
खनन, जल और आधारभूत संरचना पर भी सक्रियता
खनिज संपदा के लिहाज से महत्वपूर्ण झारखंड में खनन से जुड़े मुद्दों पर भी डॉ. वर्मा ने संसद में सवाल उठाए हैं। भूमिगत कोयला खनन को बढ़ावा देने, Critical Minerals, National Critical Mineral Mission और आधुनिक तकनीक से जुड़े विषयों पर उन्होंने सरकार से जानकारी मांगी है।
जल संरक्षण और सुरक्षित पेयजल से जुड़े मुद्दे भी उनकी संसदीय गतिविधियों का हिस्सा रहे हैं। भूजल संरक्षण, रिचार्ज, जल गुणवत्ता और पेयजल निगरानी को लेकर उन्होंने सवाल उठाए हैं।
रांची एयरपोर्ट के विस्तार, यात्री सुविधाओं और राज्य में हेलीपोर्ट के विकास जैसे विषयों पर भी उनकी सक्रियता रही है।
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी डॉ. वर्मा ने संसद में सवाल किए हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, कृषि एवं बीज योजनाओं, ग्रामीण विकास, महिला एवं मातृ कल्याण तथा ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग और डाक सेवाओं से संबंधित विषयों को उन्होंने उठाया है।
उनकी संसदीय प्राथमिकताओं में यह प्रयास भी शामिल रहा है कि केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
नई जिम्मेदारी से बढ़ी अपेक्षाएं
संसदीय जिम्मेदारियों के अलावा डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा AIIMS देवघर की Institute Body के सदस्य और Constitution Club of India की Governing Council में Executive Member के रूप में भी दायित्व निभा रहे हैं। सार्वजनिक और संस्थागत क्षेत्र में उनकी इन भूमिकाओं का अनुभव राष्ट्रीय संगठन के लिए उपयोगी माना जा सकता है।
भाजपा द्वारा राष्ट्रीय मंत्री बनाए जाने के बाद अब उनसे राष्ट्रीय संगठन की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के साथ झारखंड और केंद्रीय नेतृत्व के बीच बेहतर संगठनात्मक समन्वय की उम्मीद की जा रही है।
डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा की प्रदेश संगठन से राष्ट्रीय संगठन तक की यह यात्रा भाजपा में उनके लंबे संगठनात्मक अनुभव और संसदीय सक्रियता के विस्तार के रूप में देखी जा रही है। नई जिम्मेदारी के साथ झारखंड की आवाज को राष्ट्रीय संगठन के स्तर पर और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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