झारखंड के ग्रामीण इलाकों में पशुपालन को बढ़ावा देने और लोगों की आय के नए साधन तैयार करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के पशुपालन निदेशालय ने मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत विभिन्न पशु-पक्षी पालन इकाइयों के लिए एजेंसियों, गैर सरकारी संस्थाओं और एफपीओ से आवेदन आमंत्रित किए हैं
NEWS SAGA DESK:
झारखंड के ग्रामीण इलाकों में पशुपालन को बढ़ावा देने और लोगों की आय के नए साधन तैयार करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के पशुपालन निदेशालय ने मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत विभिन्न पशु-पक्षी पालन इकाइयों के लिए एजेंसियों, गैर सरकारी संस्थाओं और एफपीओ से आवेदन आमंत्रित किए हैं। योजना के तहत बकरी, भेड़, मुर्गी और बत्तख पालन को बढ़ावा दिया जाएगा।
बकरी पालन से लेकर बत्तख पालन तक योजना
ब्लैक बंगाल नस्ल की 10 बकरी-बकरियों की एक यूनिट के लिए करीब 42 हजार रुपये की अनुमानित लागत तय की गई है। इस योजना के तहत 12,516 यूनिट का लक्ष्य रखा गया है। वहीं छोटानागपुरी और शाहवादी नस्ल की 10 भेड़-भेड़ों की यूनिट के लिए भी 42 हजार रुपये की लागत निर्धारित है और 2,257 यूनिट का लक्ष्य है।
बैकयार्ड लेयर कुक्कुट योजना में 420 चूजों की यूनिट के लिए 14,700 रुपये, जबकि 525 ब्रायलर चूजों की यूनिट के लिए 15,750 रुपये का प्रावधान है। ब्रायलर योजना के तहत 5,407 यूनिट का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अलावा 15 दिन के 30 लो-इनपुट बत्तख चूजों की यूनिट के लिए 3,060 रुपये की लागत तय की गई है। इस योजना में 21,482 यूनिट का लक्ष्य है।
सरकार ने पशु-पक्षियों की गुणवत्ता को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। सप्लाई से पहले बकरी, भेड़ और सुअर को क्वारंटाइन में रखा जाएगा। जरूरी टीकाकरण और स्वास्थ्य जांच के बाद ही इन्हें लाभुकों तक पहुंचाया जाएगा। सप्लाई के दौरान किसी पशु-पक्षी की मौत होने पर उसे बदलने की जिम्मेदारी संबंधित सप्लायर की होगी। लाभुक के घर पर योजना और लाभुक से जुड़ी जानकारी भी प्रदर्शित करनी होगी।
एक सप्लायर को अधिकतम चार जिले आवंटित किए जाएंगे। खास बात यह है कि किसी भी सप्लायर के लिए बत्तख चूजा वितरण योजना में शामिल होना अनिवार्य रखा गया है।
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