राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन से रांची लौटे स्पीकर रबीन्द्र नाथ महतो

रबीन्द्र नाथ महतो 69वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन में शामिल होकर रांची लौटे। उन्होंने दिव्यांग समावेशन और जलवायु अनुकूलन पर भारत का पक्ष रखा।

News Saga Desk

झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष रबीन्द्र नाथ महतो 69वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन में भाग लेने के बाद शुक्रवार को रांची लौट आए। केपटाउन, दक्षिण अफ्रीका में आयोजित सम्मेलन में उन्होंने विभिन्न सत्रों और कार्यशालाओं में भाग लिया तथा दुनिया के अलग-अलग देशों से आए सांसदों एवं विधानमंडलों के सदस्यों के समक्ष भारत और झारखंड से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे। रबीन्द्र नाथ महतो 9 सितंबर 2026 को रांची से सम्मेलन में भाग लेने के लिए रवाना हुए थे और डेलीगेट के रूप में सम्मेलन में शामिल हुए।

दिल्ली होते हुए रांची पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष

माननीय अध्यक्ष रबीन्द्र नाथ महतो शुक्रवार को दोपहर करीब 2:15 बजे दिल्ली होते हुए रांची पहुंचे। उनके साथ झारखंड विधानसभा के सदस्य मथुरा प्रसाद महतो और दशरथ गागराई भी सम्मेलन में शामिल होने के लिए रवाना हुए थे। दोनों सदस्य ऑब्जर्वर के रूप में प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 20 सितंबर 2026 को रांची लौटेंगे।

राष्ट्रमंडल

अध्यक्ष ने सम्मेलन के दौरान डेलीगेट के रूप में विभिन्न सत्रों में भाग लिया और निर्धारित विषयों पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया।

दिव्यांगजनों की लोकतांत्रिक भागीदारी पर जोर

सम्मेलन की Workshop-B में “Accessible Parliaments: Inclusion for People with Disabilities” विषय पर रबीन्द्र नाथ महतो ने अपना वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन लोकतंत्र में केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि नागरिक, मतदाता, प्रतिनिधि, नेता और निर्णयकर्ता भी हैं।

अपने वक्तव्य में उन्होंने भारत में दिव्यांगजनों की लोकतांत्रिक भागीदारी बढ़ाने के लिए UDID, सुगम्य भारत अभियान और निर्वाचन संबंधी सुविधाओं का उल्लेख किया। उन्होंने सुलभ संसद को समावेशी लोकतंत्र के लिए आवश्यक बताया।

उन्होंने झारखंड में वर्ष 2024 के निर्वाचन के दौरान दिव्यांग मतदाताओं के लिए उपलब्ध कराई गई सुविधाओं का भी उल्लेख किया। इनमें घर से मतदान की सुविधा तथा जरूरतमंद मतदाताओं को मतदान केंद्र तक वाहन से पहुंचाने जैसे प्रयास शामिल रहे।

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जलवायु अनुकूलन पर भारत की ओर से लीड स्पीकर

रबीन्द्र नाथ महतो ने Workshop-C “Parliamentary Leadership in Climate Adaptation and Resilience” में भी व्याख्यान दिया। इस सत्र में उन्हें भारत की ओर से लीड स्पीकर की जिम्मेदारी दी गई थी। उनके सुझावों को रिकॉर्ड में लिया गया और अनुशंसित किए जाने के लिए दर्ज किया गया।

उन्होंने कहा कि जलवायु अनुकूलन को केवल पर्यावरण का विषय मानकर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे विकास, जनसुरक्षा और आजीविका की सुरक्षा से जोड़ना जरूरी है। अनियमित वर्षा, जल संकट और बढ़ती गर्मी जैसी चुनौतियों को देखते हुए उन्होंने जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, पूर्व तैयारी और जलवायु-सहनीय आधारभूत संरचना पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि सहनशीलता यानी Resilience विकास में बाधा नहीं, बल्कि बेहतर और टिकाऊ विकास की आधारशिला है। उनके अनुसार संसदों को केवल बहस के सदन नहीं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयारी करने वाले सदन के रूप में भी काम करना चाहिए।

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