रांची में स्वर्वेद महामंदिर की तर्ज पर बनेगा भव्य पंडाल

रांची जिला स्कूल में स्वर्वेद महामंदिर की तर्ज पर भव्य दुर्गा पूजा पंडाल बनेगा। 100 फीट ऊंचे पंडाल में 14 फीट की मां दुर्गा प्रतिमा स्थापित होगी।

News Saga Desk

रांची में दुर्गा पूजा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर के अलग-अलग पूजा पंडालों में कारीगर दिन-रात काम कर रहे हैं और श्रद्धालुओं के लिए आकर्षक धार्मिक एवं सांस्कृतिक थीम तैयार की जा रही हैं। इसी कड़ी में श्रीरामलला पूजा समिति इस वर्ष रांची जिला स्कूल परिसर में स्वर्वेद महामंदिर की तर्ज पर भव्य पूजा पंडाल तैयार करा रही है। समिति का दावा है कि पंडाल के जरिए श्रद्धालुओं को भक्ति, आध्यात्मिकता और भारतीय संस्कृति का अनूठा अनुभव देने का प्रयास किया जा रहा है।

समिति के अध्यक्ष अशोक चौधरी ने शनिवार को बताया कि हर वर्ष धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े अलग-अलग भव्य प्रारूपों को पंडाल की थीम बनाया जाता है। इसी परंपरा के तहत इस बार वाराणसी स्थित स्वर्वेद महामंदिर को पंडाल का आधार बनाया गया है।

100 फीट ऊंचा होगा भव्य पंडाल

श्रीरामलला पूजा समिति के महासचिव कुणाल अजवानी के अनुसार, स्वर्वेद महामंदिर की तर्ज पर भव्य पूजा पंडाल करीब 150 फीट चौड़ा और 100 फीट ऊंचा बनाया जा रहा है। पंडाल के बीच में करीब 30 फीट ऊंचा गर्भगृह तैयार किया जाएगा।

गर्भगृह में मां दुर्गा की करीब 14 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इससे पंडाल का मुख्य आकर्षण मां दुर्गा की प्रतिमा के साथ उसका विशाल धार्मिक स्थापत्य होगा। समिति के अनुसार चतुर्थी के दिन पंडाल का पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिया जाएगा।

पंडाल के निर्माण में कारीगरों की टीम लगातार काम कर रही है। आकार और डिजाइन को देखते हुए निर्माण कार्य को समय पर पूरा करने के लिए दिन-रात तैयारियां चल रही हैं।

पंडाल निर्माण पर 75 लाख रुपये खर्च

समिति ने इस वर्ष पूजा आयोजन के लिए करीब 1.25 करोड़ रुपये का बजट तय किया है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा पंडाल निर्माण पर खर्च किया जाएगा। पंडाल तैयार करने में करीब 75 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है।

रांची

इसके अलावा बाहरी विद्युत सज्जा पर करीब पांच लाख रुपये और मां दुर्गा की प्रतिमा तथा आंतरिक विद्युत सज्जा पर करीब 10 लाख रुपये खर्च होने की संभावना है। पूजा और अन्य व्यवस्थाओं के लिए लगभग 35 लाख रुपये का बजट रखा गया है।

इस तरह पंडाल, विद्युत सज्जा, प्रतिमा और पूजा व्यवस्था को मिलाकर समिति का कुल अनुमानित बजट करीब 1.25 करोड़ रुपये है।

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भारतीय स्थापत्य और आध्यात्मिकता का संगम

समिति के पदाधिकारियों के मुताबिक इस बार पंडाल को सिर्फ पूजा स्थल के रूप में नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव के केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। स्वर्वेद महामंदिर की स्थापत्य शैली से प्रेरित प्रारूप के माध्यम से भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा को दर्शाने की कोशिश होगी।

पंडाल का विशाल आकार और गर्भगृह की विशेष संरचना इसे आकर्षक स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वहीं, विद्युत सज्जा के जरिए शाम के समय पूरे परिसर को अलग रूप देने की तैयारी है।

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