सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) फैसले के तहत फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को न तो मंजूरी दी गई थी और न खारिज। पढ़ें जस्टिस जॉयमाल्या बागची के बयान की पूरी रिपोर्ट।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के कामकाज और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। शीर्ष अदालत ने साफ किया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण को संवैधानिक रूप से वैध ठहराने वाले अपने पिछले फैसले में उसने मतदाता फॉर्म-6 में किए गए कथित बदलावों को न तो कोई आधिकारिक मंजूरी दी थी और न ही उन्हें खारिज किया था।

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने मौखिक रूप से इस बात को दोहराया। उन्होंने बताया कि भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) पहले ही एक अलग सुनवाई के दौरान फॉर्म-6 के मुद्दे पर अदालत का रुख पूरी तरह से स्पष्ट कर चुके हैं। वह संदर्भ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को चुनाव आयोग (ECI) के कामकाज में कथित अनियमितताओं के आरोपों के आधार पर पद से हटाने की मांग वाली याचिका से जुड़ा था।
जस्टिस बागची ने याचिकाकर्ता प्रिया मिश्रा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील नरेंद्र मिश्रा को संबोधित करते हुए कहा, “सीजेआई ने पहले ही कहा था कि हमने अपने फैसले में फॉर्म-6 में किए गए किसी भी कथित बदलाव को न तो मंजूरी दी थी और न ही उसे खारिज किया था।”
यह पूरा मामला चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा लिए गए कथित एकतरफा फैसलों को चुनौती देने से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता नरेंद्र मिश्रा ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग द्वारा फॉर्म-6 में किए गए बदलाव और प्रक्रियात्मक निर्णय नियमों के अनुकूल नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद अब फॉर्म-6 में कथित बदलावों से जुड़े कानूनी पहलुओं और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर नए सिरे से बहस छिड़ गई है।
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