अबुल कलाम आजाद की अपील पर सुनवाई फिर टली, जानें वजह

अबुल कलाम आजाद की मौत की सजा के खिलाफ अपील पर बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई फिर टल गई। अदालत ने चार हफ्ते बाद अगली सुनवाई तय की है।

News Saga Desk

बांग्लादेश में 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में दोषी ठहराए गए अबुल कलाम आजाद की मौत की सजा के खिलाफ दायर अपील पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई एक बार फिर टल गई। मंगलवार को अपीलेट डिवीजन की चार सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई को आगे बढ़ा दिया। अदालत को इस चरण में यह तय करना था कि अबुल कलाम आजाद की अपील सुनवाई योग्य है या नहीं।

ढाका में हुई सुनवाई की अध्यक्षता न्यायमूर्ति मोहम्मद रेजौल हक ने की। अदालत में अबुल कलाम आजाद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एहसान ए सिद्दीकी पेश हुए, जबकि अभियोजन पक्ष की तरफ से मुख्य अभियोजक मोहम्मद अमीनुल इस्लाम ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान अपीलेट डिवीजन ने मुख्य अभियोजक को इस स्तर पर लंबित मामले को लेकर सार्वजनिक टिप्पणी करने से भी आगाह किया।

चार हफ्ते बाद होगी अगली सुनवाई

मुख्य अभियोजक मोहम्मद अमीनुल इस्लाम ने अदालत को बताया कि अपीलेट डिवीजन 16 सितंबर से 24 अक्टूबर तक अवकाश के कारण बंद रहेगा। इस जानकारी के बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित कर दी।

अबुल कलाम

इस फैसले के कारण अबुल कलाम आजाद की मौत की सजा के खिलाफ अपील पर तत्काल कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका। अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया निर्धारित तारीख पर जारी रहेगी।

2013 में सुनाई गई थी मौत की सजा

अबुल कलाम आजाद के खिलाफ मामला बांग्लादेश के 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान किए गए कथित मानवता विरोधी अपराधों से जुड़ा है। 21 जनवरी 2013 को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने उन्हें उनकी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई थी।

ट्रिब्यूनल के इस फैसले को उस समय महत्वपूर्ण माना गया था, क्योंकि यह 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों से संबंधित मामलों में उसका पहला फैसला था। उस समय आजाद अदालत में मौजूद नहीं थे और वह लंबे समय तक फरार रहे।

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वर्षों तक फरार रहे आजाद

मौत की सजा सुनाए जाने के बाद अबुल कलाम आजाद कई वर्षों तक फरार रहे। उनके खिलाफ मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया उनकी अनुपस्थिति में चली। बाद में उन्होंने इस साल 21 जनवरी को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल के सामने आत्मसमर्पण किया।

आत्मसमर्पण के बाद उनकी ओर से अपील की प्रक्रिया आगे बढ़ी। इसी क्रम में अब मामला बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट की अपीलेट डिवीजन के सामने पहुंचा है। फिलहाल अदालत को अपील की स्वीकार्यता और आगे की सुनवाई से जुड़े कानूनी पहलुओं पर विचार करना है।

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