News Saga Desk
राजधानी रांची स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्य के स्वास्थ्य विभाग में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि राज्य की कानून व्यवस्था लगातार बिगड़ रही है और सरकार का ध्यान जनता की समस्याओं के बजाय “पैसे कमाने” पर केंद्रित है। बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि उन्हें प्रतिदिन व्हाट्सएप के माध्यम से भ्रष्टाचार से जुड़े दस्तावेज और तस्वीरें मिलती हैं, जिन्हें वे लगातार सार्वजनिक भी करते रहे हैं।
ट्रेजरी घोटाले पर सरकार को घेरा
नेता प्रतिपक्ष ने ट्रेजरी घोटाले का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार जांच तो करा रही है, लेकिन अब तक किसी बड़े अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जिम्मेदार अधिकारी अपने पदों पर बने रहेंगे तो भ्रष्टाचार पर रोक कैसे लगेगी।
JMHIDPCL में नियमों के उल्लंघन का आरोप
बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि झारखंड मेडिकल एंड हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एंड प्रोक्योरमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (JMHIDPCL) में शैलेंद्र श्रीवास्तव नामक कंसल्टेंट को नियमों के विरुद्ध सेवा विस्तार दिया गया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 के नियमों के अनुसार किसी सेवानिवृत्त व्यक्ति को अधिकतम तीन वर्षों तक ही नियुक्त किया जा सकता है। इसके बाद सेवा विस्तार के लिए मंत्रिमंडल या मुख्यमंत्री की अनुमति आवश्यक होती है। बावजूद इसके, बिना मुख्यमंत्री की स्वीकृति के चौथे और फिर पांचवें वर्ष के लिए सेवा विस्तार दिया गया।
मरांडी ने आरोप लगाया कि इसी पद के माध्यम से टेंडर और खरीद प्रक्रियाओं को प्रभावित किया गया।
एंबुलेंस खरीद में गड़बड़ी का आरोप
उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में 237 नई कस्टमाइज एंबुलेंस की खरीद के लिए लगभग 80 करोड़ रुपये की निविदा जारी की गई, जबकि वर्ष 2022 में खरीदी गई 206 एंबुलेंस, जिनकी लागत करीब 55.8 करोड़ रुपये थी, उनका अब तक उपयोगिता ऑडिट नहीं कराया गया।
उन्होंने दावा किया कि कई एंबुलेंस एक वर्ष से अधिक समय तक बिना उपयोग के खड़ी रहीं।
मरांडी ने कहा कि ऑडिट में यह भी सामने आया कि जिस कंपनी को टेंडर दिया गया, वह निर्धारित वार्षिक टर्नओवर की शर्त पूरी नहीं करती थी। संबंधित कंपनी का औसत टर्नओवर मात्र 8.38 करोड़ रुपये पाया गया और उसके पास एंबुलेंस निर्माण या बस बॉडी बिल्डिंग का पर्याप्त अनुभव भी नहीं था।
दवाइयों के भंडारण पर भी सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने दवाइयों की खरीद और भंडारण में भी भारी गड़बड़ी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऑडिट के दौरान करोड़ों रुपये की जीवन रक्षक दवाइयां एक्सपायर पाई गईं।
उन्होंने बताया कि गोदामों में करीब 24 लाख यूनिट दवाएं खराब हो गईं, जबकि ई-औषधि सॉफ्टवेयर में एक्सपायरी अलर्ट और मॉनिटरिंग जैसी सुविधाएं पहले से उपलब्ध थीं।
मरांडी ने कहा कि यह पूरे सिस्टम में भ्रष्टाचार और लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने मांग की कि JMHIDPCL का दोबारा विस्तृत ऑडिट कराया जाए और पूरे मामले की जांच CBI से कराई जाए ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके।
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