अमित शाह ने वंदे मातरम् के दो अंतरे गाने के कांग्रेस के फैसले पर निशाना साधा। उन्होंने तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति का आरोप लगाया है।
News Saga Desk
नई दिल्ली में अमित शाह ने कांग्रेस के ‘वंदे मातरम्’ को लेकर लिए गए फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा ‘वंदे मातरम्’ के पूर्ण गान के बजाय केवल दो अंतरे गाने के निर्णय पर केंद्रीय गृह मंत्री ने सवाल उठाते हुए इसे तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति से जोड़ दिया। अमित शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस एक बार फिर उसी राजनीतिक रास्ते पर लौट रही है, जिसका देश के इतिहास पर गंभीर असर पड़ा है।
गृह मंत्री ने अपने बयान में 1937 के कांग्रेस के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय तुष्टीकरण की राजनीति के कारण ‘वंदे मातरम्’ को दो हिस्सों में बांटने का निर्णय लिया गया था। उन्होंने दावा किया कि इस तरह की राजनीति ने आगे चलकर दो-राष्ट्र सिद्धांत को मजबूती देने में भूमिका निभाई और देश के विभाजन की परिस्थितियां बनीं।
1937 के फैसले का किया जिक्र
अमित शाह ने कांग्रेस के मौजूदा फैसले को इतिहास से जोड़ते हुए 1937 की घटनाओं का उल्लेख किया। उनका आरोप है कि उस समय कांग्रेस ने तुष्टीकरण की राजनीति के तहत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर फैसला किया था।
गृह मंत्री के मुताबिक, उस दौर के राजनीतिक निर्णयों का प्रभाव केवल तत्कालीन परिस्थितियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आगे देश की राजनीति और विभाजन से जुड़ी परिस्थितियों पर भी पड़ा। उन्होंने कांग्रेस पर इतिहास से सबक नहीं लेने का आरोप लगाया।
हालांकि, कांग्रेस के इस फैसले और उसके ऐतिहासिक संदर्भ को लेकर राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग दृष्टिकोण रहे हैं। ऐसे में गृह मंत्री का बयान इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है।
वंदे मातरम् के 150वें वर्ष का भी जिक्र
गृह मंत्री ने ‘वंदे मातरम्’ के 150वें वर्ष के अवसर पर केंद्र सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने ऐतिहासिक गलती को सुधारने की दिशा में काम किया और पूर्ण गान को कानूनी स्वरूप दिया।

अमित शाह ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस अब फिर वोट बैंक की राजनीति के लिए तुष्टीकरण की राह पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कांग्रेस के मौजूदा निर्णय को इसी राजनीतिक सोच से जोड़कर देखा।
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संसद के कानून की अवहेलना का आरोप
अमित शाह ने कांग्रेस के फैसले को संसद द्वारा बनाए गए कानून की खुली अवहेलना बताया। उनके बयान के अनुसार, ‘वंदे मातरम्’ को लेकर संसद के स्तर पर जो व्यवस्था की गई है, उसका सम्मान किया जाना चाहिए।
गृह मंत्री ने कांग्रेस के निर्णय को केवल एक राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि राष्ट्रीय भावना से जुड़े विषय के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के मुद्दों पर राजनीतिक लाभ के लिए निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए।
गृह मंत्री के बयान के बाद ‘वंदे मातरम्’ को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। एक तरफ भाजपा इस मुद्दे को राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय सम्मान से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस के फैसले को लेकर पार्टी की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया पर भी नजर रहेगी।
इस विवाद का केंद्र फिलहाल यही है कि कांग्रेस कार्यसमिति ने पूर्ण गान के बजाय केवल दो अंतरे गाने का निर्णय क्यों लिया और इस फैसले के पीछे पार्टी की आधिकारिक दलील क्या है। आने वाले समय में दोनों पक्षों के बयान इस राजनीतिक बहस को और स्पष्ट कर सकते हैं।
अमित शाह ने देशवासियों से कांग्रेस की कथित तुष्टीकरण की राजनीति के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ से जुड़े पहले के फैसले के परिणाम देश भुगत चुका है और ऐसी गलती दोबारा नहीं होनी चाहिए।
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