आईटीआई को उद्योगों से जोड़ रोजगार बढ़ाएं: सीएम योगी

सीएम योगी ने आईटीआई को उद्योगों से जोड़ने, अप्रेंटिसशिप बढ़ाने और रोजगार मेलों के आयोजन के निर्देश दिए। तीन शहरों में सीआईआईआईटी केंद्र जल्द शुरू होंगे।

News saga Desk

लखनऊ में गुरुवार को व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग की कार्ययोजना की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आईटीआई को उद्योगों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण तैयार किए जाएं तथा अप्रेंटिसशिप और ऑन-जॉब ट्रेनिंग को बढ़ावा दिया जाए। इसका उद्देश्य प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं को बेहतर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कौशल विकास को केवल स्थानीय रोजगार तक सीमित न रखते हुए वैश्विक अवसरों से भी जोड़ा जाना चाहिए। आईटीआई को उद्योगों से जोड़ने के लिए संस्थानों और कंपनियों के बीच लगातार संवाद की व्यवस्था करने तथा प्रत्येक मंडल मुख्यालय पर नियमित रोजगार मेलों का आयोजन करने के निर्देश भी दिए गए।

तीन शहरों में सीआईआईआईटी केंद्र जल्द शुरू होंगे

मुख्यमंत्री ने सेंटर फॉर इनोवेशन, इन्वेंशन, इन्क्यूबेशन एंड ट्रेनिंग यानी सीआईआईआईटी केंद्रों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने गोरखपुर, मुजफ्फरनगर और बरेली में स्थापित किए जा रहे केंद्रों का संचालन शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि इन केंद्रों को आधुनिक तकनीक, नवाचार और उद्योग आधारित प्रशिक्षण के उत्कृष्ट संस्थान के रूप में विकसित किया जाए। सरकार का फोकस युवाओं को ऐसे कौशल से लैस करने पर है, जिनकी मांग तेजी से बदलते औद्योगिक क्षेत्र में है।

बैठक में बताया गया कि टाटा टेक्नोलॉजीज के सहयोग से 150 राजकीय आईटीआई के उन्नयन का कार्य चल रहा है। इसके अलावा 62 अन्य आईटीआई के उन्नयन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। उद्योगों के सहयोग से 37 राजकीय आईटीआई में एडवांस स्किल लैब स्थापित की जा चुकी हैं।

अनुदेशकों की भर्ती में तेजी के निर्देश

मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षण की गुणवत्ता के लिए पर्याप्त संख्या में अनुदेशकों की उपलब्धता को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने चयन प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि चयनित अनुदेशकों को नियमित नियुक्ति की प्रक्रिया में उनके अनुभव और कार्य के आधार पर वेटेज देने का प्रावधान किया जाए।

सीएम योगी

अधिकारियों ने बैठक में बताया कि 2,406 अनुदेशक पदों पर चयन किया गया है। इनमें से 2,200 से अधिक चयनित अनुदेशक अपना कार्यभार भी ग्रहण कर चुके हैं। इससे आईटीआई में प्रशिक्षण व्यवस्था को और मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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अंग्रेजी और विदेशी भाषाओं पर भी जोर

बैठक में प्रशिक्षणार्थियों के लिए कार्यस्थल पर हिंदी की आधिकारिक शब्दावली और उसके प्रयोग से संबंधित प्रशिक्षण की व्यवस्था की जानकारी दी गई। इसके साथ ही प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है।

जापान और जर्मनी जैसे देशों में कुशल जनशक्ति की मांग को देखते हुए विदेशी भाषाओं का डिजिटल प्रशिक्षण शुरू करने की तैयारी भी की जा रही है। इसके लिए कंपनियों के चयन की प्रक्रिया चल रही है। आईटीआई को उद्योगों से जोड़ने की नीति के साथ भाषा और तकनीकी कौशल पर यह जोर युवाओं को अंतरराष्ट्रीय रोजगार बाजार के लिए तैयार करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने जीरो पॉवर्टी अभियान से जुड़े परिवारों के बच्चों और युवाओं को विशेष रूप से कौशल प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने पर प्राथमिकता के साथ काम किया जाए।

बैठक में बताया गया कि ऐसे परिवारों के 14 से 35 वर्ष आयु वर्ग के 9.52 लाख युवाओं का सत्यापन पूरा हो चुका है। इनमें 1.44 लाख युवाओं को पात्र के रूप में चिन्हित किया गया है, जबकि 8,746 युवाओं का कौशल प्रशिक्षण के लिए पंजीकरण हो चुका है।

अधिकारियों ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के माध्यम से 21.13 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। इनमें से 12.94 लाख युवाओं को सेवायोजन मिला है।

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