जनगणना-2027 में धर्म संबंधी जानकारी दर्ज किए जाने के मुद्दे पर संघ की समन्वय बैठक में चर्चा हुई। जनसंख्या असंतुलन समेत कई सामाजिक विषयों पर मंथन हुआ।
News Saga Desk
विशाखापत्तनम जिले के गुडीलोवा में चल रही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय समन्वय बैठक के दूसरे दिन जनगणना में धर्म के उल्लेख को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। तीन दिवसीय बैठक में जनसंख्या असंतुलन, बदलती जनसंख्या संरचना और उसके सामाजिक प्रभावों के साथ आगामी जनगणना में धार्मिक आंकड़े जुटाने के मुद्दे पर विचार-विमर्श किया गया। सूत्रों के अनुसार बैठक में जनगणना में धर्म संबंधी जानकारी दर्ज किए जाने का समर्थन किया गया।
बैठक में संघ परिवार से जुड़े विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। चर्चा का प्रमुख विषय जनसंख्या संरचना में हो रहे बदलाव और उसके दीर्घकालीन प्रभाव रहे। साथ ही राष्ट्रीय नीति के स्तर पर संभावित उपायों को लेकर भी विचार किया गया।
जनगणना-2027 में धर्म की जानकारी पर चर्चा
सरकार की ओर से जनगणना-2027 के लिए 40 प्रश्नों की सूची पहले ही जारी की जा चुकी है। इसमें नागरिकों से उनके धर्म से संबंधित जानकारी भी जुटाई जानी है। बैठक में इसी संदर्भ में जनगणना में धर्म की जानकारी दर्ज करने के महत्व पर चर्चा हुई।

सूत्रों के मुताबिक बैठक में यह तर्क रखा गया कि धर्म संबंधी जानकारी आधिकारिक रूप से दर्ज होने से देश में विभिन्न धार्मिक समुदायों की संख्या और कुल आबादी में उनके अनुपात के अधिक स्पष्ट आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे। इससे देश की धार्मिक जनसंख्या की स्थिति को लेकर आधिकारिक आंकड़ों का आधार तैयार होगा।
विश्व हिंदू परिषद समेत संघ परिवार के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने जनसंख्या में बदलाव से जुड़े अनुभव साझा किए। जनसंख्या असंतुलन के कारणों और संभावित सामाजिक प्रभावों पर भी चर्चा हुई।
नाम के आधार पर धर्म की पहचान मुश्किल
बैठक में कुछ प्रतिनिधियों ने धर्म परिवर्तन से जुड़े एक अन्य पहलू का उल्लेख किया। उनका कहना था कि धर्म परिवर्तन के बाद भी कई लोग अपने पारंपरिक भारतीय नाम बरकरार रखते हैं। ऐसे में केवल नाम के आधार पर किसी व्यक्ति के धर्म का अनुमान लगाना संभव नहीं है।
इसी संदर्भ में जनगणना में धर्म का अलग से उल्लेख किए जाने को अधिक स्पष्ट आंकड़े जुटाने का माध्यम बताया गया। सूत्रों के अनुसार विश्व हिंदू परिषद के प्रतिनिधियों ने जनगणना में धर्म संबंधी जानकारी एकत्र किए जाने के निर्णय का स्वागत किया।
यह चर्चा ऐसे समय हुई है, जब जनगणना-2027 को लेकर सरकार की तैयारियां आगे बढ़ रही हैं। जनगणना से मिलने वाले आधिकारिक आंकड़े देश की आबादी, सामाजिक संरचना और विभिन्न जनसांख्यिकीय पहलुओं को समझने के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
जनसंख्या असंतुलन पर भी मंथन
बैठक के दूसरे दिन जनसंख्या असंतुलन का मुद्दा प्रमुखता से उठा। प्रतिनिधियों ने देश के अलग-अलग राज्यों में जनसंख्या की संरचना में हो रहे बदलाव, उनके कारणों और सामाजिक प्रभावों पर अपने विचार रखे।
संघ की बैठक में इस विषय को केवल वर्तमान स्थिति तक सीमित न रखते हुए दीर्घकालीन राष्ट्रीय नीति के नजरिए से भी देखा गया। संभावित उपायों और सामाजिक स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर विचार किया गया।
पहले दिन बुधवार को संघ परिवार से जुड़े संगठनों के वर्षभर के कामकाज की समीक्षा की गई थी। इसके साथ ही आगामी अवधि की योजनाओं और विभिन्न सामाजिक विषयों पर आपसी समन्वय को लेकर चर्चा हुई थी।
जनसंख्या से जुड़े विषयों के अलावा बैठक में नशामुक्ति को लेकर भी चर्चा हुई। युवाओं में सामाजिक जागरूकता बढ़ाने और उन्हें सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने के उपायों पर विचार किया गया।
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