अमित शाह ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर और भारत-बांग्लादेश सीमा सुरक्षा की समीक्षा की। 10 नए BOP, स्मार्ट फेंसिंग, ड्रोन निगरानी और आधुनिक तकनीक से सीमा सुरक्षा मजबूत होगी।
News Saga Desk
अमित शाह ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा समीक्षा करते हुए भारत-बांग्लादेश सीमा प्रबंधन को और अधिक आधुनिक, प्रभावी और तकनीक आधारित बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी और फूलबाड़ी में आयोजित उच्चस्तरीय बैठकों में सीमा सुरक्षा, घुसपैठ रोकने, तस्करी पर नियंत्रण और आधारभूत ढांचे के विकास की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), केंद्रीय गृह मंत्रालय, पश्चिम बंगाल सरकार और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि देश की सीमाओं की सुरक्षा केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और बदलते सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप सीमा प्रबंधन को अत्याधुनिक तकनीक से लैस करना आवश्यक है।
जुम्मागछ में लिया जमीनी हालात का जायजा
शुक्रवार देर रात बागडोगरा पहुंचने के बाद अमित शाह शनिवार सुबह सबसे पहले जलपाईगुड़ी जिले के राजगंज थाना क्षेत्र स्थित भारत-बांग्लादेश सीमा से सटे संवेदनशील गांव जुम्मागछ पहुंचे। यहां उन्होंने सीमा पर तैनात बीएसएफ जवानों से बातचीत की और सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया।
अधिकारियों ने उन्हें मानसून के दौरान नदी क्षेत्रों में आने वाली चुनौतियों, अवैध घुसपैठ और तस्करी की संभावनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। गृह मंत्री ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया।
उत्तरकन्या में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक
इसके बाद सिलीगुड़ी स्थित उत्तरकन्या सचिवालय में आयोजित बैठक में सीमा सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में बीएसएफ, राज्य पुलिस, केंद्रीय गृह मंत्रालय और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने सीमा प्रबंधन की वर्तमान स्थिति और भविष्य की रणनीति पर प्रस्तुति दी।
अमित शाह ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा समीक्षा के दौरान एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, त्वरित सूचना साझा करने और आधुनिक निगरानी तंत्र विकसित करने के निर्देश दिए।
10 नए बॉर्डर आउट पोस्ट होंगे स्थापित
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय राज्य में 10 नए बॉर्डर आउट पोस्ट (BOP) स्थापित करने का रहा। इनमें से दो चौकियां उत्तर बंगाल फ्रंटियर क्षेत्र में बनाई जाएंगी।
अधिकारियों के अनुसार नए बीओपी बनने से सीमा पर निगरानी क्षमता बढ़ेगी, जवानों की तैनाती अधिक प्रभावी होगी और घुसपैठ, तस्करी तथा अन्य अवैध गतिविधियों पर तेजी से कार्रवाई संभव हो सकेगी।
स्मार्ट फेंसिंग और हाईटेक निगरानी पर जोर
भारत-बांग्लादेश सीमा पर चल रही त्रिस्तरीय स्मार्ट फेंसिंग परियोजना को तेजी से पूरा करने के निर्देश भी दिए गए। विशेष रूप से महानंदा नदी और अन्य जल क्षेत्रों में, जहां पारंपरिक बाड़ लगाना संभव नहीं है, वहां तकनीक आधारित सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया।
गृह मंत्री ने निर्देश दिया कि सीमा पर निम्न आधुनिक उपकरणों का व्यापक उपयोग किया जाए—
- वर्चुअल स्मार्ट फेंसिंग
- थर्मल इमेजिंग कैमरे
- हाई-रिजॉल्यूशन सेंसर
- नाइट विजन डिवाइस
- ड्रोन निगरानी
- इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस सिस्टम
इन तकनीकों के जरिए जलमार्गों और संवेदनशील इलाकों में 24 घंटे निगरानी सुनिश्चित करने की योजना है।
संवेदनशील इलाकों में संयुक्त अभियान जारी
बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि जुम्मागछ से राभाभीटा तक करीब ढाई किलोमीटर और फूलबाड़ी से नारायणजोत तक लगभग आठ किलोमीटर के संवेदनशील क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह से बीएसएफ और पश्चिम बंगाल पुलिस संयुक्त अभियान चला रही है।
इन इलाकों में अतिरिक्त गश्त, संयुक्त पेट्रोलिंग और तकनीकी निगरानी बढ़ाई गई है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।

सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे ‘चिकन नेक’ भी कहा जाता है, भारत के उत्तर-पूर्वी आठ राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला एकमात्र प्रमुख स्थलीय संपर्क मार्ग है।
करीब 20 से 22 किलोमीटर चौड़ा यह कॉरिडोर सामरिक, आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इसके पश्चिम में नेपाल, पूर्व में बांग्लादेश और उत्तर में भूटान स्थित होने के कारण इसकी रणनीतिक संवेदनशीलता और बढ़ जाती है।
इसी वजह से केंद्र सरकार समय-समय पर यहां की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करती रही है।
सीमा सुरक्षा होगी और मजबूत
विशेषज्ञों का मानना है कि नए बीओपी, स्मार्ट फेंसिंग और हाईटेक निगरानी प्रणाली लागू होने से सीमा सुरक्षा और मजबूत होगी। इससे घुसपैठ, तस्करी और अन्य सीमा पार अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिलेगी।
साथ ही सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और आधुनिक तकनीक के उपयोग से भविष्य की चुनौतियों का सामना अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।
बैठक के अंत में गृह मंत्री अमित शाह ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सीमा सुरक्षा को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक बनाया जाए। उन्होंने कहा कि भारत की संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा और सिलीगुड़ी कॉरिडोर की रणनीतिक महत्ता की रक्षा के लिए सभी एजेंसियां बेहतर समन्वय के साथ कार्य करें।
इसे भी देखे- Sonam Wangchuk forcibly taken to hospital by police | Jantar Mantar Protest |
सुरक्षा समीक्षा के दौरान उत्तर बंगाल के छह सीमावर्ती जिलों—दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर और मालदा—के जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक भी मौजूद रहे। सीमा क्षेत्रों में सड़क, संचार नेटवर्क, निगरानी उपकरण और सुरक्षा ढांचे के विकास पर भी विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों को मजबूती मिलेगी।
No Comment! Be the first one.