ANM Regularization Case में झारखंड हाईकोर्ट ने 17-18 वर्षों से कार्यरत ANM कर्मियों को राहत देते हुए नौकरी और वेतन सुरक्षित रखने का आदेश दिया है।
News Saga Desk
झारखंड में वर्षों से संविदा पर कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों के लिए ANM Regularization Case में बड़ी राहत की खबर सामने आई है। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में पिछले 17 से 18 वर्षों से सेवा दे रही एएनएम (Auxiliary Nurse Midwife) कर्मियों के नियमितीकरण से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि याचिका पर अंतिम फैसला आने तक किसी भी प्रार्थी एएनएम को नौकरी से नहीं हटाया जाएगा और उनके वेतन का भुगतान भी नियमित रूप से जारी रहेगा।
जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। ANM Regularization Case से जुड़े इस आदेश को राज्य की संविदा स्वास्थ्य कर्मियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
ANM Regularization Case में हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण आदेश
झारखंड हाईकोर्ट में दायर याचिका में राज्य के विभिन्न अस्पतालों में लंबे समय से कार्यरत एएनएम कर्मियों ने अपनी सेवाओं के नियमितीकरण की मांग की है। सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट किया कि जब तक अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक किसी भी याचिकाकर्ता को सेवा से नहीं हटाया जाएगा।
कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित किया कि इन स्वास्थ्य कर्मियों को मिलने वाला मासिक वेतन नियमित रूप से जारी रहे। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 अगस्त की तारीख निर्धारित की है।
17-18 वर्षों से दे रही हैं स्वास्थ्य सेवाएं
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता समीर सहाय ने अदालत को बताया कि संबंधित एएनएम पिछले 17 से 18 वर्षों से राज्य के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में लगातार अपनी सेवाएं दे रही हैं।
उन्होंने दलील दी कि इन स्वास्थ्य कर्मियों ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके बावजूद इतने लंबे समय के बाद भी उनकी सेवाओं को नियमित नहीं किया गया है।
अधिवक्ता ने यह भी कहा कि लंबे समय तक विभाग द्वारा सेवाएं लिए जाने के बावजूद उन्हें स्थायी नियुक्ति का लाभ नहीं मिल सका, जिससे उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
JSSC परीक्षा और Normalization Process बना विवाद का कारण
ANM Regularization Case की सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने नियमित नियुक्ति के लिए परीक्षा आयोजित की थी, जिसमें इन अनुभवी एएनएम ने भी भाग लिया था।

हालांकि, याचिकाकर्ताओं के अनुसार आयोग की नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया (Normalization Method) के कारण वे चयन प्रक्रिया में सफल नहीं हो सकीं। उनका कहना है कि तकनीकी कारणों से चयन से वंचित रह जाने के बावजूद विभाग लगातार उनसे सेवाएं ले रहा है।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से कहा कि इतने वर्षों के अनुभव और सेवा रिकॉर्ड को देखते हुए उन्हें सीधे नियमित किया जाना चाहिए।
17 एएनएम ने दायर की है याचिका
इस मामले में स्वास्थ्य विभाग में वर्षों से संविदा पर कार्यरत कुमारी गायत्री सहित कुल 17 एएनएम ने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
याचिका में मांग की गई है कि विभाग उनके पदों को स्थायी करे और नई नियुक्तियों के नाम पर उन्हें सेवा से न हटाया जाए। उनका तर्क है कि वर्षों तक विभाग की आवश्यक सेवाओं का हिस्सा रहने के बाद उन्हें नौकरी से हटाना न्यायसंगत नहीं होगा।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि एएनएम स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण, प्रसव पूर्व देखभाल, मातृ स्वास्थ्य और प्राथमिक चिकित्सा सेवाओं में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।
यदि लंबे समय से कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों को हटाया जाता है तो इसका असर स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता पर पड़ सकता है। यही कारण है कि ANM Regularization Case केवल रोजगार का मामला नहीं बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय भी माना जा रहा है।
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अंतिम फैसले तक सुरक्षित रहेगी नौकरी
झारखंड हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद याचिकाकर्ता एएनएम कर्मियों को बड़ी राहत मिली है। अदालत के निर्देश के अनुसार अंतिम निर्णय आने तक उनकी नौकरी और वेतन दोनों सुरक्षित रहेंगे।
अब सभी की नजर 22 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है। इस दौरान JSSC अपना पक्ष अदालत के समक्ष रखेगा। इसके बाद कोर्ट मामले के विभिन्न पहलुओं पर विचार करते हुए आगे का निर्णय ले सकता है।
फिलहाल, ANM Regularization Case में हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश उन स्वास्थ्य कर्मियों के लिए राहत लेकर आया है, जो पिछले लगभग दो दशकों से राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
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