बीरभूम पत्थर कारोबारी टुलू मंडल केस: 220 करोड़ की संपत्ति फ्रीज, डायरी से जांच में नए खुलासे

बीरभूम पत्थर कारोबारी टुलू मंडल केस में पुलिस ने 220 करोड़ रुपये की नकदी और संपत्ति फ्रीज की। डायरी और फर्जी DCR मशीन मिलने से जांच तेज हुई।

News Saga Desk

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले से जुड़े बीरभूम पत्थर कारोबारी टुलू मंडल केस में पुलिस की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। जिला पुलिस ने दावा किया है कि अब तक इस मामले में करीब 220 करोड़ रुपये की नकदी और संपत्तियां फ्रीज की जा चुकी हैं। वहीं, कारोबारी टुलू मंडल के व्यवसाय के प्रबंधक सीतेश प्रमाणिक की गिरफ्तारी के बाद कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है, जिससे जांच का दायरा और व्यापक हो गया है।

सीतेश प्रमाणिक की गिरफ्तारी के बाद बढ़ी जांच

पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर रविवार देर रात सीतेश प्रमाणिक को गिरफ्तार किया। सोमवार को उसे सिउड़ी अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने सात दिन की पुलिस हिरासत की अनुमति दी। जांच एजेंसियों का कहना है कि पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आई हैं, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

सरकारी अधिवक्ता विभास चटर्जी के अनुसार, सीतेश के पास से एक डायरी बरामद हुई है, जिसमें कथित रूप से कुछ प्रशासनिक अधिकारियों के नाम दर्ज हैं। इसके अलावा पुलिस ने नकली डीसीआर (डिमांड कलेक्शन रसीद) छापने वाली मशीन भी जब्त की है।

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फर्जी DCR के जरिए अवैध कारोबार का आरोप

जांच एजेंसियों का आरोप है कि बीरभूम पत्थर कारोबारी टुलू मंडल केस में फर्जी डीसीआर का इस्तेमाल कर पत्थरों की अवैध ढुलाई और तस्करी को अंजाम दिया जाता था। पुलिस का मानना है कि इन फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी व्यवस्था को धोखा देकर अवैध परिवहन को वैध दिखाने की कोशिश की जाती थी।

24 जुलाई को मोहम्मदबाजार थाना क्षेत्र में पत्थर से लदे एक डंपर की जांच के दौरान भूमि एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों को संदिग्ध डीसीआर मिला था। जब दस्तावेज की जांच की गई तो उसका नंबर सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं पाया गया। इसके बाद विभाग की शिकायत पर मोहम्मदबाजार थाने में मामला दर्ज किया गया।

पुलिस ने संकेत दिए हैं कि इस प्रकरण में भी टुलू मंडल को आरोपी बनाया जा सकता है।

बीरभूम पत्थर कारोबारी टुलू मंडल केस कोई नया मामला नहीं है। टुलू मंडल पर लंबे समय से अवैध पत्थर कारोबार चलाने के आरोप लगते रहे हैं। जांच अधिकारियों का कहना है कि विदेश में रहने के बावजूद वह अपने नेटवर्क के माध्यम से कारोबार संचालित कर रहा था।

जांच एजेंसियों का यह भी दावा है कि फर्जी डीसीआर गिरोह अब भी सक्रिय हो सकता है। बरामद दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।

राज्य सरकार पहले ही इस मामले को गंभीर मान चुकी है। सरकार का कहना है कि सरकारी संसाधनों के कथित दुरुपयोग के कारण राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा। यही वजह है कि जांच एजेंसियां वित्तीय लेनदेन, संपत्तियों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं।

पुलिस के अनुसार, अब तक करीब 220 करोड़ रुपये मूल्य की नकदी और संपत्तियां फ्रीज की जा चुकी हैं। इसमें नकदी, सोना, दस्तावेज और अन्य संपत्तियां शामिल बताई गई हैं। यह कार्रवाई मामले की आर्थिक जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है।

बीरभूम पत्थर कारोबारी टुलू मंडल केस

सरकारी अधिवक्ता विभास चटर्जी ने बताया कि बरामद डायरी और फर्जी डीसीआर मशीन जांच के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं। वहीं, बीरभूम पुलिस अधीक्षक ने पुष्टि की है कि अब तक लगभग 220 करोड़ रुपये की संपत्ति और नकदी फ्रीज की जा चुकी है।

हालांकि, डायरी में दर्ज नामों के संबंध में अभी किसी अधिकारी की भूमिका आधिकारिक रूप से साबित नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों और साक्ष्यों की कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच की जा रही है।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बीरभूम पत्थर कारोबारी टुलू मंडल केस की जांच अभी जारी है। बरामद दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर आगे और लोगों से पूछताछ या नई कार्रवाई हो सकती है।

जांच एजेंसियों ने लोगों से अपील की है कि मामले से जुड़ी अपुष्ट या भ्रामक जानकारी पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक सूचनाओं को ही सही मानें। मामले में किसी भी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी का अंतिम निर्णय जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।

बीरभूम पत्थर कारोबारी टुलू मंडल केस में 220 करोड़ रुपये की संपत्ति फ्रीज होने, डायरी बरामद होने और फर्जी डीसीआर मशीन मिलने के बाद जांच निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे भी कई अहम खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल पूरे मामले पर जांच एजेंसियों की नजर बनी हुई है और आने वाले दिनों में इस केस में नई कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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