बीरभूम में टुलु मंडल के प्रबंधक सीतेश प्रमाणिक गिरफ्तार हुए। 28.5 करोड़ नकद, 15 किलो सोना और 186 करोड़ की संपत्ति की जांच जारी है।
News saga Desk
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में टुलु मंडल से जुड़े कथित आर्थिक और आपराधिक नेटवर्क की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। पुलिस ने रविवार देर रात बड़ी कार्रवाई करते हुए टुलु मंडल के प्रबंधक सीतेश प्रमाणिक को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, सीतेश लंबे समय से टुलु मंडल के पत्थर कारोबार का प्रबंधन देखता था। उसे सोमवार को सिउड़ी न्यायालय में पेश किया जाएगा। जांच एजेंसी पूछताछ के लिए उसकी पुलिस हिरासत की मांग कर सकती है।
मामले में करोड़ों रुपये की नकदी, बड़ी मात्रा में सोना और कई बैंक खातों से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई है। अधिकारियों को उम्मीद है कि सीतेश प्रमाणिक से पूछताछ के बाद टुलु मंडल की संपत्तियों, कारोबार और कथित नेटवर्क से जुड़े कई अहम राज सामने आ सकते हैं।
टुलु मंडल के प्रबंधक की गिरफ्तारी कैसे हुई?
पुलिस के मुताबिक, गुप्त सूचना के आधार पर बीरभूम जिला पुलिस ने रविवार रात विशेष अभियान चलाया। इसी दौरान टुलु मंडल के प्रबंधक सीतेश प्रमाणिक को गिरफ्तार किया गया। वह पत्थर कारोबार से जुड़े कामकाज और संपत्तियों की देखरेख में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।

पुलिस अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि टुलु मंडल के कारोबार में सीतेश की वास्तविक भूमिका क्या थी और वह किन वित्तीय लेनदेन की जानकारी रखता था। जांचकर्ताओं को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान कारोबार में पैसों के लेनदेन, संपत्तियों और अन्य लोगों से जुड़े नेटवर्क के बारे में जानकारी मिल सकती है।
28.5 करोड़ नकद और 15 किलो सोने की बरामदगी
इस मामले में पुलिस की जांच उस समय तेज हुई, जब मोहम्मदबाजार थाना क्षेत्र के देउचा गांव में टुलु मंडल के रिश्तेदार मीनार मंडल के घर से करीब 28.5 करोड़ रुपये नकद और 15 किलोग्राम सोना बरामद किया गया। इतनी बड़ी मात्रा में नकदी और सोना मिलने के बाद पुलिस ने मीनार मंडल को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू की थी।
पूछताछ में मीनार मंडल ने कथित तौर पर बताया कि टुलु मंडल अपनी संपत्तियों की देखरेख की जिम्मेदारी उसे सौंपकर गया था। हालांकि टुलु मंडल इस समय कहां है, इसकी स्पष्ट जानकारी अभी पुलिस को नहीं मिली है।
मामले में अब तक तीन गिरफ्तारियां
सीतेश प्रमाणिक की गिरफ्तारी के साथ इस मामले में अब तक तीन लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इससे पहले मीनार मंडल को नकदी और सोने की बरामदगी के बाद गिरफ्तार किया गया था।
वहीं, गत शनिवार को टुलु मंडल के एक अन्य रिश्तेदार शेख वासिम को सिलीगुड़ी से गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, वह नेपाल भागने की कोशिश कर रहा था। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ लिया। शेख वासिम को टुलु मंडल का भांजा बताया गया है।
इन गिरफ्तारियों के बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन सभी लोगों की भूमिका क्या थी और इनके बीच आर्थिक लेनदेन किस तरह होता था।
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186 करोड़ से अधिक की संपत्ति जांच के घेरे में
जांच के दौरान पुलिस को अब तक नकद राशि और विभिन्न बैंक खातों समेत 186 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का पता चलने की बात सामने आई है। पुलिस ने टुलु मंडल से जुड़े कई बैंक खातों को भी फ्रीज किया है।
जांच एजेंसियां अब बरामद नकदी और सोने के स्रोत का पता लगाने में जुटी हैं। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि पत्थर कारोबार से अर्जित धन का इस्तेमाल किन संपत्तियों को बनाने या खरीदने में किया गया।
पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि कहीं सरकारी राजस्व की कथित चोरी, अवैध वसूली, धमकी देकर धन उगाही या जबरन जमीन कब्जाने जैसी गतिविधियों से यह संपत्ति तो नहीं जुड़ी है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
करोड़ों रुपये की नकदी और सोने की बरामदगी तथा लगातार गिरफ्तारियों के बावजूद टुलु मंडल अभी पुलिस की पकड़ से बाहर है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, चार मई को विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद से वह फरार बताया जा रहा है।
टुलु मंडल को बीरभूम के प्रभावशाली नेता अनुव्रत मंडल का करीबी भी बताया जाता है। हालांकि उसकी वर्तमान लोकेशन को लेकर पुलिस की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस उसकी तलाश के साथ-साथ उसके कथित वित्तीय नेटवर्क की भी जांच कर रही है।
मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। सीतेश प्रमाणिक से पूछताछ पुलिस के लिए इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वह टुलु मंडल के पत्थर कारोबार के प्रबंधन से सीधे जुड़ा रहा है।
जांचकर्ताओं का फोकस बरामद रकम के स्रोत, बैंक खातों, संपत्तियों और कारोबार से जुड़े लेनदेन पर है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास करेगी कि फरार टुलु मंडल ने अपनी संपत्तियों और कारोबार की जिम्मेदारी किन लोगों को सौंपी थी।
बीरभूम में पत्थर कारोबार लंबे समय से आर्थिक और राजनीतिक चर्चाओं का विषय रहा है। ऐसे में करोड़ों रुपये की नकदी, सोने और बड़ी संपत्ति का सामने आना जांच को और गंभीर बनाता है। यदि जांच में वित्तीय अनियमितताओं या अन्य अपराधों के प्रमाण मिलते हैं, तो इसका असर संबंधित कारोबार और उससे जुड़े लोगों पर पड़ सकता है।
पुलिस ने मामले में कार्रवाई जारी रखते हुए कई बैंक खातों को फ्रीज किया है और आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। सीतेश प्रमाणिक को न्यायालय में पेश किए जाने के बाद उसकी पुलिस हिरासत पर अदालत का निर्णय होगा। फिलहाल पुलिस का पूरा ध्यान बरामद संपत्ति के स्रोत और टुलु मंडल की तलाश पर है। मामले में सामने आने वाले नए तथ्यों के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां या कार्रवाई संभव है।
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