असम सरकार का ‘शूट एट साइट’ आदेश और हिंदू त्योहारों की सुरक्षा
भय बिनु होइ न प्रीति। गोस्वामी तुलसीदास की यह चौपाई केवल अध्यात्म का संदेश नहीं, बल्कि शासन और व्यवस्था के लिए भी गहरी सीख है। यही कारण है कि असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने दुर्गा पूजा से ठीक पहले धुबरी जिले में शूट एट साइट का आदेश देकर स्पष्ट संकेत दिया कि अब त्योहारों की आड़ में साम्प्रदायिक हिंसा की कोई गुंजाइश नहीं बचेगी।
सक्षम नेतृत्व का संदेश है गणेशोत्सव
सनातन परंपरा में गणपति पूजन सबसे पहले होता है। शिवाजी महाराज से लेकर लोकमान्य तिलक तक सभी ने सामाजिक जाग्रति के लिये गणेशोत्सव को ही सबसे बड़ा माध्यम बनाया था। तब ये जिज्ञासा स्वाभाविक है कि आखिर गणपति जी का पूजन ही सर्व प्रथम क्यों होता है।
गणेशोत्सव पर विनायक की आराधना से समस्त शारीरिक एवं मानसिक बाधाओं का होता है नाश
हम सभी भारतीयों के जीवन में गणेशोत्सव का गहरा महत्व है। गणेश उत्सव के दस दिनों में घर-घर में गणपति बप्पा की स्थापना होती है और भक्तजन पूरे मन से उनकी पूजा-उपासना करते हैं। पहले दिन गणपति की स्थापना और आखिरी दिन विसर्जन की परंपरा इस त्योहार को विशेष बनाती है।
“दण्ड और धर्म” के बीच संतुलन: 30 दिन की हिरासत और मंत्री पद विधेयक विवाद
20 अगस्त 2025 को केंद्र सरकार ने संविधान (एक-सौ-तीसवाँ) संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश किया। प्रस्ताव यह है कि यदि कोई प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री/मंत्री लगातार 30 दिन तक ऐसे अपराध में न्यायिक हिरासत में रहे जिसका अधिकतम दण्ड 5 वर्ष या उससे अधिक हो, तो 31वें दिन उसका पद स्वतः समाप्त माना जाएगा।
छत्तीसगढ़ में नक्सल पर कसता शिकंजा : आने लगे सार्थक परिणाम
छत्तीसगढ़ की धरती लंबे समय से लाल आतंक की त्रासदी झेलती रही है। कभी दंतेवाड़ा से लेकर बस्तर और नारायणपुर तक नक्सलियों का बोलबाला था, जंगलों में बंदूक की आवाज़ें गूंजती थीं और जनजाति समाज भय और असुरक्षा के साए में जीने को मजबूर थी, परंतु अब पिछले कुछ वर्षों में इस तस्वीर में निर्णायक बदलाव आया है।
दिल्ली को बचाना और बनाना ही दिल्ली की नई सरकार की जिम्मेदारी
इसी 17 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली-एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना) को करोड़ों की लागत से बनी दो बड़ी सड़कों का सौगात देते हुए कहा कि आने वाले दिनों में दिल्ली को विकास मॉडल बनाएंगे।
ब्रिक्स और अमेरिका : भारत ने बदल दिया वैश्विक शक्ति समीकरण
दुनिया के शक्ति समीकरण अब तेजी से बदलते जा रहे हैं। जहां एक ओर अमेरिका दशकों से अपने वैश्विक प्रभुत्व के बल पर खुद को नीति निर्धारण का एकमात्र केंद्र समझता रहा है, वहीं दूसरी ओर अब भारत जैसे देश बिना टकराव के इस वर्चस्व को चुनौती दे रहे हैं।
बुजुर्ग बदल रहे अर्थव्यवस्था की चाल, चमकने लगी ‘सिल्वर इकोनॉमी’
अपने सनक भरे टैरिफ वार के चलते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पिछले दिनों जब भारत को ‘डेड इकोनॉमी’ बताकर अतिरिक्त व्यापार कर थोप दिया तो भारत सहित दुनियाभर के अर्थशास्त्रियों ने उनकी बात पर बहुत हैरानी ज़ाहिर की। वज़ह कि, इस समय दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था भारत ही है।
NCERT ने विभाजन पर किया सत्य का संधान
भारत का विभाजन केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं था, बल्कि वह एक ऐसी त्रासदी थी जिसने इस उपमहाद्वीप के करोड़ों लोगों के जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया। यह घटना केवल भौगोलिक सीमाओं का बंटवारा नहीं थी, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और मानसिक स्तर पर भी भारतीय समाज को गहरी चोट देने वाली थी।
पीएम विकसित भारत रोजगार योजना : आत्मनिर्भर, सशक्त, अवसरों से परिपूर्ण भारत गढ़ने का संकल्प
भारत आज उस ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है जहाँ से उसकी दिशा सीधे वैश्विक महाशक्ति बनने की ओर जाती दिखाई देती है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से बीते पचहत्तर वर्षों में देश ने तमाम उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन हाल के वर्षों में जिस गति से भारत ने अपनी आर्थिक, सामरिक, तकनीकी और सामाजिक क्षमता को परिपक्व किया है, वह किसी भी राष्ट्र के लिए अनुकरणीय उदाहरण है।