होलिका दहन 2026: 2 को अगजा 4 मार्च को होली, क्यों नहीं खेल सकते 3 को होली ?
फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला होलिका दहन भारतीय संस्कृति का एक अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महत्व वाला पर्व है। यह केवल होली के रंगोत्सव की पूर्व संध्या नहीं, बल्कि सत्य की असत्य पर, श्रद्धा की अहंकार पर और धर्म की अधर्म पर विजय का प्रतीक है। यह पर्व हमें विश्वास दिलाता है कि जब भी अन्याय अपनी सीमा लांघता है, तब ईश्वर अपने भक्तों की रक्षा अवश्य करते हैं।