छात्र आंदोलन पर चंपाई सोरेन का सरकार पर बड़ा हमला

NEWS SAGA DESK

चंपाई सोरेन ने झारखंड के छात्र आंदोलन को लेकर राज्य सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाया। उन्होंने विवादित परीक्षाओं की जांच और छात्रों से बातचीत की मांग की।

पूर्वी सिंहभूम। झारखंड में जारी छात्र आंदोलन को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। रविवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए छात्र आंदोलन के प्रति कथित सख्ती को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। चंपाई सोरेन ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर भी यदि हजारों छात्र अपने घरों से दूर रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करने के लिए मजबूर हैं, तो इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार की है।

छात्र आंदोलन

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्र नियुक्ति परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग कर रहे हैं। जिन परीक्षाओं को लेकर गंभीर सवाल और संदेह सामने आए हैं, उन्हें रद्द कर केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई से जांच कराने की मांग करना छात्रों का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने सरकार से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।

चंपाई सोरेन ने सरकार पर लगाया तानाशाही का आरोप

चंपाई सोरेन ने कहा कि पिछले करीब तीन सप्ताह से छात्र लगातार छात्र आंदोलन चला रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार आंदोलनकारियों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उनके खिलाफ कार्रवाई कर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि आंदोलन में शामिल छात्रों पर प्राथमिकी दर्ज की जा रही है और लाठीचार्ज जैसी कार्रवाई भी की जा रही है।

झारखंड में सरकारी नियुक्ति परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर आंदोलन कर रहे छात्र परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। चंपाई सोरेन ने कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़ा यह मामला बेहद संवेदनशील है और सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

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उन्होंने कहा कि जिन परीक्षाओं को लेकर संदेह और कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं, उनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। पूर्व मुख्यमंत्री ने विवादित परीक्षाओं को रद्द करने और पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग का समर्थन किया।

सरकार से चंपाई सोरेन का सीधा सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार से सवाल किया कि यदि सरकार नौकरी में कथित धांधली के आरोपों से जुड़ी नहीं है, तो विवादित परीक्षाओं को रद्द करने और पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने में उसे परेशानी क्यों हो रही है।

चंपाई सोरेन ने कहा कि जांच का उद्देश्य किसी को राजनीतिक रूप से निशाना बनाना नहीं, बल्कि छात्रों और अभ्यर्थियों के बीच पैदा हुए संदेह को दूर करना होना चाहिए। उनके मुताबिक, निष्पक्ष जांच से परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब सामने आ सकता है और अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल किया जा सकता है।

लाठीचार्ज और प्राथमिकी पर भी उठाए सवाल

छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर भी चंपाई सोरेन ने राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर प्राथमिकी दर्ज करना और बल प्रयोग करना समस्या का समाधान नहीं है।

उन्होंने सरकार से अपील की कि आंदोलन को कानून-व्यवस्था की समस्या के रूप में देखने के बजाय छात्रों की वास्तविक चिंताओं को समझने की कोशिश की जाए। उनका कहना है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशील रवैया अपनाने की जरूरत है।

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