दिल्ली में पुलिस और वकीलों के बीच आर-पार की लड़ाई, 6 नवंबर को हाईकोर्ट में होगी सुनवाई

दिल्ली में पुलिस और वकीलों के बीच शुरू हुआ विवाद अब बड़े टकराव में बदल गया है। एक तरफ वकील पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ पुलिसकर्मियों ने अपने ही विभाग के खिलाफ पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। ऐसे में सबकी नजर अदालत के अगले कदम पर टिकी है।

News Saga Desk

राजधानी दिल्ली में पुलिस और वकीलों के बीच टकराव लगातार चर्चा में बना हुआ है। मामूली पार्किंग विवाद से शुरू हुआ मामला अब पुलिस मुख्यालय से लेकर अदालत तक पहुंच गया है। इस विवाद में पुलिसकर्मियों के प्रदर्शन, एसीपी के निलंबन और वकीलों की कानूनी कार्रवाई की मांग ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। खास बात यह है कि इस पूरे मामले में पुलिस और वकील दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।

कैसे शुरू हुआ दिल्ली पुलिस और वकीलों के बीच विवाद?

इस पूरे विवाद की शुरुआत 23 अक्टूबर को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के रोहताश नगर इलाके में एक सैलून के बाहर बाइक पार्किंग को लेकर हुई। बताया जाता है कि बाइक खड़ी करने को लेकर सैलून संचालक और कुछ वकीलों के बीच कहासुनी हो गई थी। आरोप है कि विवाद बढ़ने के बाद कुछ वकीलों ने सैलून में तोड़फोड़ की और आठ महीने की गर्भवती संचालिका के साथ मारपीट की।

इसी दिन शाहदरा थाने में भी दोनों पक्षों के बीच विवाद हो गया। इस दौरान अधिवक्ता ललित बंसल के सिर में गंभीर चोट आई। घटना के बाद मामला पुलिस और वकीलों के बीच टकराव का रूप लेने लगा।

थाने में पिस्टल निकालने का आरोप, वकीलों ने शुरू की हड़ताल

घटना के अगले दिन यानी 24 अक्टूबर को वकील अपनी शिकायत लेकर शाहदरा थाने पहुंचे। वकीलों का आरोप है कि इस दौरान एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने उन्हें डराने के लिए अपनी सर्विस रिवॉल्वर निकाल ली। वकीलों ने पुलिस अधिकारी के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

वहीं, एसीपी मनस्वी वशिष्ठ का पक्ष इससे अलग था। उनका आरोप था कि करीब 15 से 20 वकील थाने में घुस आए थे और पुलिस अधिकारियों के साथ अभद्रता कर रहे थे। उन्होंने वकीलों पर सरकारी काम में बाधा डालने का भी आरोप लगाया।

इस मामले में पुलिस की ओर से वकीलों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई। इसके विरोध में दिल्ली की जिला अदालतों में वकीलों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। बाद में 28 अक्टूबर को एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के तत्कालीन एसएचओ इंस्पेक्टर अरुण कुमार का तबादला कर दिया गया। इसके बाद वकीलों ने अपनी हड़ताल वापस ले ली।

अपने ही विभाग के खिलाफ सड़क पर उतरे 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी

वकीलों की हड़ताल खत्म होने के बाद भी विवाद शांत नहीं हुआ। 2 नवंबर को एसीपी मनस्वी वशिष्ठ के समर्थन में 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर जुट गए। पुलिसकर्मियों ने अपने अधिकारियों के तबादले के विरोध में प्रदर्शन किया और पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार से मुलाकात की मांग रखी।

प्रदर्शन के दौरान एसीपी वशिष्ठ ने कथित तौर पर कुछ वकीलों के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। पुलिसकर्मियों की ओर से अदालत परिसरों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती और पुलिसकर्मियों की शिकायतों के निपटारे के लिए अलग व्यवस्था बनाने जैसी मांगें भी उठाई गईं।

इस प्रदर्शन ने पुलिस विभाग के भीतर भी मतभेदों को सार्वजनिक कर दिया। एक तरफ वकील पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे, तो दूसरी तरफ पुलिसकर्मी अपने अधिकारियों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे थे।

गृह मंत्रालय ने एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को किया सस्पेंड

पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन के कुछ घंटों बाद गृह मंत्रालय ने एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इस कार्रवाई के बाद मामला और चर्चा में आ गया। हालांकि, निलंबन आदेश में इसकी विस्तृत वजह सार्वजनिक नहीं की गई।

निलंबन के बाद एसीपी वशिष्ठ ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि निलंबन विभागीय कार्रवाई का हिस्सा है और उन्हें निष्पक्ष जांच व न्याय मिलने का भरोसा है।

दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा मामला, 6 नवंबर को होगी सुनवाई

इस विवाद को लेकर 3 नवंबर को वकीलों ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। उन्होंने अदालत से मामले में स्वतः संज्ञान लेने और एसीपी मनस्वी वशिष्ठ समेत संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

हालांकि, हाईकोर्ट ने तत्काल स्वतः संज्ञान लेने से इनकार कर दिया और वकीलों को सभी जरूरी तथ्यों और सबूतों के साथ औपचारिक याचिका दाखिल करने को कहा।

अब 4 नवंबर को इस मामले में नया अपडेट सामने आया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने वकीलों की याचिका पर 6 नवंबर को सुनवाई करने की सहमति दे दी है। मामले का उल्लेख कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांबरे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की पीठ के सामने किया गया था। पीठ ने मामले को शुक्रवार को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

अब 6 नवंबर की सुनवाई पर टिकी सबकी नजर

दिल्ली पुलिस और वकीलों के बीच यह विवाद अब कई स्तरों पर पहुंच चुका है। एक ओर वकील पुलिस अधिकारियों पर धमकी देने और दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाकर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं पुलिसकर्मियों का कहना है कि उनके अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर भी विचार होना चाहिए।

अब 6 नवंबर को होने वाली हाईकोर्ट की सुनवाई से इस विवाद में आगे की कानूनी दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अदालत की सुनवाई के बाद दोनों पक्षों के बीच जारी टकराव कम होगा या यह विवाद और लंबा खिंचेगा।

Read More News

Read More