SIR विवाद के बाद चुनाव आयोग का बड़ा बदलाव, Form 6 से हटाया घोषणा पत्र

NEWS SAGA DESK

Election Commission Form 6 Controversy: भारतीय निर्वाचन आयोग ने नए वोटरों के ऑनलाइन फॉर्म 6 से SIR घोषणा पत्र को अलग कर दिया है। जानिए इस विवाद की वजह, दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति और सुप्रीम कोर्ट के घटनाक्रम की पूरी जानकारी।

भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने नए मतदाताओं के ऑनलाइन पंजीकरण (Voter Registration) के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले Form 6 के प्रारूप में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव किया है। आयोग ने अपने आधिकारिक डिजिटल पोर्टल ‘ECINet’ पर Form 6 के साथ अनिवार्य रूप से जोड़े गए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision – SIR) से जुड़े घोषणा पत्र (Declaration) को अब पूरी तरह से अलग करने का निर्णय लिया है।

भारतीय निर्वाचन आयोग

यह नई व्यवस्था उन सभी राज्यों में भी तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है, जहां वर्तमान में SIR की प्रक्रिया जारी है। इस फैसले के साथ ही Form 6 के संशोधन को लेकर चुनाव आयोग के भीतर और बाहर पिछले कई महीनों से चला आ रहा गंभीर विवाद अब समाप्त हो गया है।

ऑनलाइन Form 6 में सेक्शन J और K के बीच एक अतिरिक्त घोषणा पत्र जोड़ा गया था, जिसे भरना नए आवेदकों के लिए अनिवार्य बना दिया गया था। इसमें आवेदकों को निम्नलिखित तीन विकल्पों में से किसी एक को चुनना होता था:

  1. आवेदक का नाम वर्ष 2000 के शुरुआती दौर में हुई पिछली SIR मतदाता सूची में दर्ज था।
  2. आवेदक के माता-पिता या दादा-दादी का नाम उस पुरानी सूची में शामिल था।
  3. न तो आवेदक का और न ही उसके माता-पिता का नाम पिछली SIR सूची में था।

इस घोषणा पत्र को भरे बिना पोर्टल पर Form 6 सबमिट करना तकनीकी रूप से असंभव था। कानूनी विशेषज्ञों और आलोचकों का मानना था कि यह शर्त नए और युवा वोटरों के लिए मताधिकार प्राप्त करने में एक गैर-जरूरी और जटिल बाधा खड़ी कर रही थी। अब आयोग के नए आदेश के अनुसार, यह घोषणा पत्र मुख्य Form 6 का अनिवार्य हिस्सा न होकर एक पृथक (अलग) दस्तावेज के रूप में ही उपलब्ध रहेगा।

दो चुनाव आयुक्तों ने बताया था ‘गैरकानूनी और अनधिकृत’

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, आयोग के दो चुनाव आयुक्तों—विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू—ने इस बदलाव पर बहुत तीखी आपत्तियां दर्ज कराई थीं।

  • विवेक जोशी की आपत्ति (16 मई): चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने स्पष्ट किया था कि बिना किसी वैधानिक कानूनी संशोधन के Form 6 के मूल प्रारूप में फेरबदल नहीं किया जा सकता।
  • सुखबीर सिंह संधू का निर्देश (13 अगस्त): चुनाव आयुक्त संधू ने इस कदम को सीधे तौर पर ‘अनधिकृत और गैरकानूनी’ करार देते हुए इसे तुरंत वापस लेने के निर्देश दिए थे।

दोनों आयुक्तों का मुख्य वैधानिक तर्क यह था कि Form 6 का मूल प्रारूप ‘रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960’ (Registration of Electors Rules, 1960) के तहत कानूनी रूप से तय है। नियमों के अनुसार, इसमें किसी भी प्रकार का संशोधन करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है; चुनाव आयोग अपने स्तर पर इसके वैधानिक ढांचे में बदलाव नहीं कर सकता।

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