NEWS SAGA DESK
धनबाद साइबर ठगी गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। चार आरोपी गिरफ्तार और एक नाबालिग निरुद्ध हुआ। KYC के नाम पर OTP लेकर खातों से रकम उड़ाते थे।
झारखंड के धनबाद में पुलिस ने साइबर ठगी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। धनबाद साइबर ठगी मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक विधि विरुद्ध बालक को निरुद्ध किया गया है। पुलिस के अनुसार, गिरोह बैंक ग्राहकों को KYC अपडेट कराने और बैंक खाता बंद होने का डर दिखाकर उनके मोबाइल पर आया OTP हासिल करता था। इसके बाद बैंक खातों से रकम निकालकर डिजिटल वॉलेट में ट्रांसफर की जाती थी और गिरोह के सदस्य रकम आपस में बांट लेते थे।

पुलिस की कार्रवाई चिरकुंडा थाना क्षेत्र स्थित एक पीओएस दुकान से जारी किए गए संदिग्ध सिम कार्ड की जांच के बाद शुरू हुई। जांच में बड़ी संख्या में ऐसे सिम कार्ड सामने आए, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर साइबर अपराध में किया गया था।
64 संदिग्ध सिम कार्ड से सामने आया नेटवर्क
सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में ग्रामीण एसपी एस मोहम्मद याकूब ने बताया कि दूरसंचार विभाग से मिली सूचना के आधार पर पुलिस को चिरकुंडा थाना क्षेत्र के मुकेश स्टोर पीओएस दुकान से जारी किए गए संदिग्ध सिम कार्ड की जानकारी मिली।
पुलिस के अनुसार, 1 जनवरी 2026 से 29 मई 2026 के बीच इस दुकान से कुल 64 संदिग्ध सिम कार्ड जारी किए गए थे। इनमें से 27 सिम कार्ड के खिलाफ एनसीआरपी पोर्टल पर साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज थीं। इस जानकारी के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू की।
वरीय अधिकारियों के निर्देश पर निरसा एसडीपीओ लिलेश्वर महतो के नेतृत्व में छापामारी टीम का गठन किया गया। टीम ने चिरकुंडा में आईसीआईसीआई बैंक के पास स्थित मुकेश स्टोर पर छापेमारी की, लेकिन दुकान बंद मिली।
सिम कार्ड बेचकर साइबर अपराधियों तक पहुंचाता था आरोपी
जांच के दौरान पुलिस को चिरकुंडा के लायकडीह निवासी आयुष सिंह के बारे में जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार, आयुष अपने पहचान पत्र का इस्तेमाल कर कई सिम कार्ड खरीदता था और उन्हें ऊंची कीमत पर साइबर ठगी करने वाले लोगों को बेचता था।
पूछताछ में पुलिस को कथित साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद निरसा थाना क्षेत्र के मुगमा में छापेमारी कर प्रेम रविदास, बिनोद रविदास, गुलाब रविदास और आयुष सिंह को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के मुताबिक, प्रेम रविदास को इस गिरोह का मुख्य सरगना बताया जा रहा है।
KYC अपडेट के नाम पर लेते थे OTP
पुलिस की पूछताछ में गिरोह के काम करने के तरीके का भी खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार, आरोपी मोबाइल फोन के जरिए यूको एमपासबुक और यूको सिक्योर ऐप का इस्तेमाल करते थे।
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इसके बाद वे बैंक ग्राहकों को फोन कर KYC अपडेट कराने या बैंक खाता बंद होने का झांसा देते थे। बातचीत के दौरान ग्राहकों के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आने वाला OTP हासिल कर लिया जाता था।
OTP मिलने के बाद आरोपियों द्वारा कथित तौर पर बैंक खातों से रकम डिजिटल वॉलेट में ट्रांसफर की जाती थी। इसके बाद वॉलेट से रकम निकालकर गिरोह के सदस्यों के बीच बांट दी जाती थी।
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