News Saga Desk
बोकारो जिले में आयोजित “लोक संवाद हम आपको सुनते हैं” कार्यक्रम के दौरान एक ऐसा भावुक और प्रेरणादायक क्षण सामने आया, जिसने यह साबित कर दिया कि समाज में संवेदनाएँ आज भी जीवित हैं। आज भी ये समाज ऐसे लोगों से परिपूर्ण है जो दूसरों की चिंता करते है। कार्यक्रम में चंदनकियारी प्रखंड के भोजुडीह-नापित टोला से पहुंचे दिव्यांग नागरिक निमाई प्रमाणिक ने प्रशासन के समक्ष ऐसी मांग रखी, जिसने वहां मौजूद सभी लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया।
आमतौर पर जनता दरबार या लोक संवाद कार्यक्रमों में लोग अपनी व्यक्तिगत समस्याओं, शिकायतों या सहायता की मांग लेकर पहुंचते हैं। लेकिन निमाई प्रमाणिक अपने लिए कुछ भी मांगने नहीं आए थे। उन्होंने न तो किसी आर्थिक सहायता की बात की, न किसी विशेष सुविधा की मांग की और न ही अपनी शारीरिक परेशानियों को लेकर कोई शिकायत रखी। उन्होंने प्रशासन से केवल अपने गांव के विद्यालय की मरम्मति कराने की अपील की, ताकि गांव के बच्चे बेहतर वातावरण में शिक्षा प्राप्त कर सकें।
उनकी इस निस्वार्थ सोच और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना ने कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों और लोगों को भावुक कर दिया। जिस व्यक्ति के जीवन में स्वयं अनेक कठिनाइयाँ हों, वह यदि अपने संघर्षों से ऊपर उठकर आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के बारे में सोचता है, तो यह केवल एक नागरिक का व्यवहार नहीं बल्कि समाज के प्रति गहरी संवेदनशीलता और जागरूकता का परिचय है।
कार्यक्रम के दौरान यह बात विशेष रूप से महसूस की गई कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए केवल संसाधन ही पर्याप्त नहीं होते, बल्कि संवेदना, सामूहिक सोच और दूसरों के प्रति जिम्मेदारी की भावना सबसे बड़ी ताकत होती है। निमाई प्रमाणिक ने अपने व्यवहार से यह संदेश दिया कि सच्चा समाज वही होता है, जहाँ व्यक्ति अपने हिस्से की परेशानियों के बावजूद दूसरों की भलाई और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के बारे में सोचता है।
प्रशासन ने भी उनकी भावना का सम्मान करते हुए विद्यालय की मरम्मति के लिए तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। अधिकारियों ने कहा कि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है और इस दिशा में शीघ्र कदम उठाए जाएंगे।
जो काम नेताओं और जनप्रतिनिधियों को करना चाहिए वो काम दिव्यांग निमाई ने किया। हम आपको सुनते हैं कार्यक्रम में सामने आई यह घटना केवल एक आवेदन या मांग भर नहीं थी, बल्कि समाज के प्रति एक जिम्मेदार नागरिक की आत्मीयता, संवेदनशीलता और शिक्षा के प्रति जागरूकता का उदाहरण बन गई। निमाई प्रमाणिक जैसे लोग समाज के लिए प्रेरणा हैं, जो यह विश्वास दिलाते हैं कि इंसानियत और संवेदनाएँ आज भी जीवित हैं, और यही किसी भी समाज की सबसे बड़ी पूंजी होती है।
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