पूर्वी सिंहभूम में मलेरिया का बढ़ता प्रकोप: 6 मौतें, 1.04 लाख से अधिक लोगों की जांच, लापरवाही पर कार्रवाई

NEWS SAGA DESK

जिले में 1,895 मलेरिया संक्रमित मिले, पोटका सबसे अधिक प्रभावित। उपायुक्त राजीव रंजन ने स्वास्थ्य व्यवस्था की समीक्षा कर अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू की और लोगों से समय पर जांच कराने की अपील की।

पूर्वी सिंहभूम जिले में मलेरिया संक्रमण को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। जिले में संक्रमण के बढ़ते मामलों और छह लोगों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा की गई है। समीक्षा के दौरान लापरवाही पाए जाने पर कई अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। प्रशासन का कहना है कि बीमारी की रोकथाम, समय पर जांच और बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है।

सोमवार को आयोजित प्रेस वार्ता में उपायुक्त राजीव रंजन ने बताया कि 29 जून से 12 जुलाई 2026 के बीच जिले में बड़े पैमाने पर मलेरिया जांच अभियान चलाया गया। इस अवधि में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, शहरी स्वास्थ्य केंद्रों और सदर अस्पतालों में कुल 1,04,459 लोगों की जांच की गई।

जांच में 1,895 लोग मिले संक्रमित

उपायुक्त ने बताया कि जांच के दौरान 1,895 लोगों में मलेरिया संक्रमण की पुष्टि हुई। इनमें 1,491 मरीज प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम (P. Falciparum), 353 मरीज प्लाज्मोडियम विवैक्स (P. Vivax) तथा 51 मरीज मिश्रित संक्रमण से पीड़ित पाए गए। जिले की मलेरिया पॉजिटिविटी दर 1.96 प्रतिशत दर्ज की गई है।

MALARIA IS  SPREADING ACROSS IN THE SINGHBHUM

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अधिकांश संक्रमित मरीजों का इलाज जारी है और गंभीर मामलों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

छह लोगों की हो चुकी है मौत

जिले में अब तक मलेरिया से छह लोगों की मौत हो चुकी है। उपायुक्त ने बताया कि इनमें चार मरीजों की मौत सेरेब्रल मलेरिया तथा दो मरीजों की मृत्यु मिश्रित संक्रमण के कारण हुई।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक मौत की चिकित्सकीय समीक्षा कराई जा रही है ताकि उपचार प्रक्रिया में किसी प्रकार की चूक की पहचान की जा सके। प्रशासन का उद्देश्य भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को और प्रभावी बनाना है।

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लापरवाही पर सख्त कार्रवाई

मलेरिया नियंत्रण अभियान में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ जिला प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है।

उपायुक्त ने बताया कि पोटका के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा सदर अस्पताल के एक चिकित्सक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

सिविल सर्जन स्तर पर भी कई स्वास्थ्यकर्मियों को शोकॉज नोटिस जारी किए गए हैं और कुछ के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच जारी है और दोषी पाए जाने वाले अन्य अधिकारियों पर भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

पोटका में सबसे अधिक मामले

जिले के विभिन्न प्रखंडों में मलेरिया जांच और संक्रमण के आंकड़ों की समीक्षा में पोटका सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र के रूप में सामने आया है।

  • पोटका: 24,657 जांच, 667 संक्रमित
  • डुमरिया: 427 संक्रमित
  • मुसाबनी: 344 संक्रमित
  • घाटशिला: 212 संक्रमित

इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष निगरानी अभियान चलाया जा रहा है। घर-घर सर्वेक्षण, त्वरित जांच, इंडोर रेजिडुअल स्प्रे (IRS) और संक्रमित मरीजों के शीघ्र उपचार पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

निजी अस्पतालों को भी दिए निर्देश

सोमवार को समाहरणालय सभागार में उपायुक्त राजीव रंजन की अध्यक्षता में निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम संचालकों के साथ कार्यशाला-सह-समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई।

बैठक में सभी निजी स्वास्थ्य संस्थानों को निर्देश दिया गया कि बुखार से पीड़ित प्रत्येक मरीज की मलेरिया जांच अनिवार्य रूप से कराई जाए। साथ ही, मलेरिया के प्रत्येक पुष्ट मामले की सूचना समय पर स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराई जाए ताकि संक्रमण की निगरानी प्रभावी ढंग से की जा सके।

लोगों से सतर्क रहने की अपील

उपायुक्त राजीव रंजन ने आम लोगों से अपील की कि बुखार को सामान्य बीमारी समझकर नजरअंदाज न करें। यदि किसी व्यक्ति को बुखार आता है तो वह स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराए।

उन्होंने कहा कि समय पर जांच और सही उपचार से मलेरिया के गंभीर रूप और मृत्यु के खतरे को काफी हद तक रोका जा सकता है।

प्रशासन ने लोगों से मच्छरदानी का नियमित उपयोग करने, घर और आसपास पानी जमा नहीं होने देने तथा स्वास्थ्य विभाग के सर्वेक्षण और आईआरएस अभियान में सहयोग करने की भी अपील की है। जिला प्रशासन का कहना है कि जनभागीदारी से ही मलेरिया पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

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