गुरु पूर्णिमा पर सीएम योगी ने गोरखनाथ मंदिर में की विशेष पूजा

NEWS SAGA DESK

गुरु पूर्णिमा पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की। जानें श्रीराम कथा की पूर्णाहुति, भंडारे और गुरु परंपरा का महत्व।

गुरु पूर्णिमा पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर में परंपरागत विधि-विधान के साथ महायोगी गुरु गोरखनाथ की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं दीं। गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में उन्होंने मंदिर में धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया और अपने पूज्य गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर गुरु पूर्णिमा पर सीएम योगी ने शिष्य और पीठाधीश्वर दोनों भूमिकाओं का निर्वहन करते हुए श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया और भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को रेखांकित किया।

गुरु पूर्णिमा पर सीएम योगी

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सुबह से ही गोरखनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से आए भक्त भी इस विशेष आयोजन में शामिल हुए। पूरा मंदिर परिसर वैदिक मंत्रोच्चार, भजन और धार्मिक अनुष्ठानों से भक्तिमय वातावरण में सराबोर नजर आया।

गोरखनाथ मंदिर में सुबह से शुरू हुए धार्मिक अनुष्ठान

गुरु पूर्णिमा पर सीएम योगी ने प्रातःकाल सबसे पहले श्रीनाथ जी का पूजन किया और परंपरा के अनुसार रोट अर्पित किया। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में स्थापित विभिन्न देवी-देवताओं, नाथ संप्रदाय के महान योगियों और पूर्व महंतों की समाधियों पर श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना की।

सामूहिक आरती और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुए इन धार्मिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में साधु-संत, श्रद्धालु और नाथ संप्रदाय के अनुयायी शामिल हुए। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं भी की थीं।

शिष्य और पीठाधीश्वर की दोहरी भूमिका

गोरक्षपीठ की परंपरा के अनुसार गुरु पूर्णिमा पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दो महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाते हैं। सुबह के समय वे एक समर्पित शिष्य के रूप में आदिगुरु गोरखनाथ और अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ का पूजन करते हैं।

इसके बाद वे गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में श्रद्धालुओं, संतों और शिष्यों को आशीर्वाद देते हैं। यही परंपरा नाथ संप्रदाय की विशेष पहचान मानी जाती है, जिसमें गुरु के प्रति श्रद्धा और आध्यात्मिक मार्गदर्शन को सर्वोच्च स्थान दिया गया है।

श्रीराम कथा की पूर्णाहुति और भंडारे का आयोजन

गोरखनाथ मंदिर परिसर स्थित महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में 23 जुलाई से चल रही सात दिवसीय श्रीराम कथा का समापन भी गुरु पूर्णिमा के अवसर पर हुआ।

कथा की पूर्णाहुति के बाद भजन-कीर्तन और आशीर्वचन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इसके पश्चात मंदिर परिसर में विशाल सहभोज और भंडारे का आयोजन किया गया, जहां हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

नाथ संप्रदाय में गुरु पूर्णिमा का महत्व

नाथ संप्रदाय में गुरु को ईश्वर के समान माना जाता है। इस परंपरा के अनुसार गुरु ही साधक को ज्ञान, साधना और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग दिखाते हैं। इसलिए गुरु पूर्णिमा का पर्व नाथ पंथ में अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है।

गोरखनाथ मंदिर में आदिगुरु गोरखनाथ को रोट अर्पित करने की परंपरा सदियों पुरानी मानी जाती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस अवसर पर गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, ज्ञान और आध्यात्मिक प्रगति का मार्ग प्रशस्त होता है।

मुख्यमंत्री योगी का संदेश

गुरु पूर्णिमा पर सीएम योगी ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने कहा कि महर्षि वेदव्यास के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाने वाली गुरु पूर्णिमा हमें अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने की प्रेरणा देती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि व्यक्ति के जीवन को संस्कार, अनुशासन और सही दिशा भी प्रदान करते हैं। भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान इसलिए अत्यंत ऊंचा माना गया है।


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श्रद्धालुओं के लिए विशेष आयोजन

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गोरखनाथ मंदिर में दिनभर धार्मिक कार्यक्रम, पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और आशीर्वचन का आयोजन किया गया। मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई ताकि वे सुचारु रूप से दर्शन और पूजा कर सकें।

मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अनुशासन बनाए रखने और धार्मिक परंपराओं का पालन करने की अपील की। भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया।

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