सऊदी अरब में सड़क हादसे में मृत बोकारो के प्रवासी मजदूर सत्येंद्र महतो का शव एक महीने बाद गांव पहुंचा। जानें पूरी घटना और परिवार की स्थिति।
सऊदी अरब से एक महीने बाद लौटा प्रवासी मजदूर का शव झारखंड के बोकारो जिले में पहुंचते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। चतरोचट्टी थाना क्षेत्र के कतवारी गांव निवासी प्रवासी मजदूर सत्येंद्र महतो का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह उनके घर पहुंचा। शव के गांव पहुंचते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया, जबकि अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर जुट गए। सऊदी अरब से एक महीने बाद लौटा प्रवासी मजदूर का शव विदेशों में काम करने वाले भारतीय मजदूरों की चुनौतियों और उनके परिवारों की पीड़ा को एक बार फिर सामने लेकर आया है।

शव को देखते ही परिवार के सदस्यों की चीख-पुकार से पूरा माहौल गमगीन हो गया। गांव के लोगों ने भी सत्येंद्र महतो को नम आंखों से अंतिम विदाई दी। इस घटना ने पूरे इलाके को भावुक कर दिया।
रोजगार की तलाश में गए थे सऊदी अरब
परिजनों के अनुसार सत्येंद्र महतो 26 नवंबर 2024 को बेहतर रोजगार की तलाश में सऊदी अरब गए थे। वहां वे हमद सालेह अल-काफ कॉन्ट्रैक्टिंग एस्टैब्लिशमेंट नामक कंपनी में ट्रक चालक के रूप में कार्यरत थे।
विदेश में नौकरी मिलने से परिवार को आर्थिक स्थिति बेहतर होने की उम्मीद थी। सत्येंद्र नियमित रूप से अपने परिवार से संपर्क में रहते थे और घर की जिम्मेदारियां निभाने के लिए मेहनत कर रहे थे।
लेकिन 25 जून को हुए एक सड़क हादसे ने परिवार की सारी उम्मीदों को तोड़ दिया। दुर्घटना में उनकी मौत हो गई, जिसके बाद उनके पार्थिव शरीर को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू हुई।

एक महीने बाद गांव पहुंचा पार्थिव शरीर
सऊदी अरब से एक महीने बाद लौटा प्रवासी मजदूर का शव बुधवार सुबह उनके पैतृक गांव कतवारी पहुंचा। शव के पहुंचने की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण अंतिम दर्शन के लिए उनके घर पहुंचने लगे।
पत्नी, बेटी और दोनों बेटों का रो-रोकर बुरा हाल था। गांव की महिलाओं और बुजुर्गों ने परिवार को ढांढस बंधाने की कोशिश की, लेकिन माहौल पूरी तरह शोक में डूबा रहा।
ग्रामीणों ने बताया कि सत्येंद्र मेहनती और मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति थे। उनके निधन से गांव ने एक जिम्मेदार और संघर्षशील व्यक्ति को खो दिया है।
बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश का सफर
झारखंड सहित देश के कई राज्यों से हर साल बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में खाड़ी देशों का रुख करते हैं। बेहतर आय और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की उम्मीद में हजारों लोग विदेशों में कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं।
हालांकि, कई बार सड़क दुर्घटनाएं, कार्यस्थल पर हादसे या अन्य कारणों से प्रवासी मजदूरों की मौत हो जाती है। ऐसे मामलों में शव को भारत लाने की प्रक्रिया लंबी और जटिल होने के कारण परिवारों को कई सप्ताह या महीनों तक इंतजार करना पड़ता है।
सत्येंद्र महतो का मामला भी इसी चुनौतीपूर्ण स्थिति का एक उदाहरण बनकर सामने आया है।

प्रवासी मजदूरों के हित में उठी चिंता
मौके पर पहुंचे प्रवासी मजदूरों के हित में काम करने वाले सिकंदर अली ने कहा कि यह पहली घटना नहीं है। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी कई मामलों में विदेशों में काम करने वाले मजदूरों के शव लंबे समय बाद भारत पहुंच सके हैं।
उन्होंने कहा कि प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा, दुर्घटना की स्थिति में त्वरित सहायता और उनके परिवारों को समय पर सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में बेहतर व्यवस्था की आवश्यकता है।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
सत्येंद्र महतो अपने पीछे पत्नी, 21 वर्षीय पुत्री प्रीति कुमारी और दो पुत्र—अरविंद कुमार तथा 13 वर्षीय मंगेश कुमार—को छोड़ गए हैं। परिवार के सामने अब आर्थिक और सामाजिक दोनों तरह की चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि सत्येंद्र ही परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य थे। ऐसे में उनके निधन के बाद परिवार के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। गांव के लोगों ने प्रशासन और संबंधित एजेंसियों से परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। विदेश में रोजगार के लिए जाने वाले श्रमिकों को यात्रा से पहले अपने सभी दस्तावेज, रोजगार अनुबंध, बीमा और आपातकालीन संपर्क संबंधी जानकारी सुरक्षित रखनी चाहिए। साथ ही, भारत सरकार द्वारा अधिकृत माध्यमों से ही विदेश में रोजगार स्वीकार करना बेहतर माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि विदेश में किसी भी आपात स्थिति में भारतीय दूतावास और संबंधित एजेंसियों से तत्काल संपर्क करना चाहिए, ताकि आवश्यक सहायता समय पर मिल सके।
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