*होर्मुज में तनाव से भारतीय नाविकों पर संकट, समुद्र से लेकर तेल की कीमतों तक क्या होगा असर?

NEWS SAGA DESK

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव से भारतीय नाविकों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर संकट बढ़ा है। जानिए भारत की ऊर्जा और तेल कीमतों पर इसका असर।

समुद्र में उठता तनाव अब सिर्फ सैन्य गतिविधियों तक सीमित नहीं है। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का असर उन हजारों लोगों की जिंदगी पर भी पड़ रहा है, जो रोजाना अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों से दुनिया का कारोबार चलाते हैं। होर्मुज में बढ़ा तनाव भारतीय मर्चेंट नेवी के नाविकों के लिए भी चिंता का बड़ा कारण बन गया है। खतरा इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय नाविक विदेशी व्यापारिक जहाजों पर काम करते हैं।

सैन्य गतिविधियों

आखिर होर्मुज इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर और आगे हिंद महासागर से जोड़ता है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल है। तेल और एलएनजी की बड़ी मात्रा इसी रास्ते से होकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचती है। ऐसे में अगर यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो उसका असर सिर्फ समुद्री व्यापार पर नहीं पड़ेगा। ऊर्जा आपूर्ति, कच्चे तेल की कीमत और दुनिया भर की सप्लाई चेन पर भी इसका दबाव बढ़ सकता है।

व्यापारिक जहाज भी बन रहे निशाना

बढ़ते सैन्य तनाव के बीच इस समुद्री इलाके से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में संघर्ष के बाद समुद्री क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं का उल्लेख किया गया है। इन घटनाओं में कई नाविकों की जान जाने की बात सामने आई है, जिनमें भारतीय नाविक भी शामिल बताए गए हैं। यह स्थिति बताती है कि युद्ध का हिस्सा न होने के बावजूद व्यापारिक जहाजों पर काम करने वाले नाविक कितने बड़े जोखिम में हो सकते हैं।

भारत ने बढ़ाई सुरक्षा

बदलते हालात को देखते हुए भारत सरकार ने भी सतर्कता बढ़ाई है। भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर जहाजरानी महानिदेशालय ने जहाज मालिकों और मैनेजमेंट कंपनियों को जरूरी सावधानियां बरतने के निर्देश दिए हैं। भारतीय नाविकों को जोखिम वाले समुद्री मार्गों से गुजरने वाले जहाजों पर तैनात करने से बचने की सलाह दी गई है। कप्तानों को भी सुरक्षा चेतावनियों पर नजर रखने और किसी भी खतरे की स्थिति में तुरंत जरूरी कदम उठाने को कहा गया है।

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भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी असर

होर्मुज संकट का एक बड़ा असर भारत की ऊर्जा जरूरतों पर पड़ सकता है। भारत कच्चे तेल और गैस के आयात पर काफी निर्भर है। अगर इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर लंबे समय तक आवाजाही प्रभावित होती है, तो तेल की कीमत, शिपिंग खर्च और ईंधन की सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए होर्मुज का संकट केवल समुद्र में फंसे जहाजों की कहानी नहीं है। इसके केंद्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा, भारत की ऊर्जा जरूरत और वैश्विक व्यापार तीनों जुड़े हुए हैं। आने वाले समय में इस क्षेत्र की स्थिति पर भारत समेत पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।

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