झारखंड में स्कूलों और विश्वविद्यालयों में APAAR ID अनिवार्य, डेटा मिसमैच बना बड़ी चुनौती

NEWS SAGA DESK

रांची: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत छात्रों के लिए शुरू की गई ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (APAAR) ID को झारखंड के स्कूलों और विश्वविद्यालयों में तेजी से लागू किया जा रहा है। राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों को विद्यार्थियों की शत-प्रतिशत APAAR ID बनाने का लक्ष्य दिया गया है। हालांकि आधार और शैक्षणिक रिकॉर्ड में विसंगतियों तथा जागरूकता की कमी के कारण यह अभियान अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रहा है।

रांची विश्वविद्यालय समेत राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों में APAAR ID और एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) ID को अनिवार्य रूप से लागू किया जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि भविष्य में नामांकन, परीक्षा फॉर्म भरने, क्रेडिट ट्रांसफर और शैक्षणिक रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण के लिए यह पहचान संख्या महत्वपूर्ण होगी।

रांची विश्वविद्यालय ने अपने सभी संबद्ध कॉलेजों को छात्रों की प्रोफाइल अपडेट करते समय APAAR ID लिंक करने का निर्देश दिया है। वहीं नए नामांकन के दौरान चांसलर पोर्टल पर भी छात्रों से APAAR और ABC ID की जानकारी ली जा रही है। कई विश्वविद्यालय परीक्षा संबंधी प्रक्रियाओं को भी इससे जोड़ने की तैयारी कर रहे हैं।

रांची विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू डॉ. सुदेश कुमार साहू ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप APAAR ID छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहचान है। इससे विद्यार्थियों का पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड एक ही प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रहेगा। भविष्य में क्रेडिट ट्रांसफर, मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम तथा अन्य विश्वविद्यालयों में अध्ययन के दौरान इसका लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय लगातार छात्रों को APAAR ID बनाने के लिए जागरूक कर रहा है और कॉलेजों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

स्कूलों में 40 से 55 प्रतिशत तक ही प्रगति

झारखंड शिक्षा परियोजना के निर्देश पर सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों में भी APAAR ID बनाने का अभियान चलाया जा रहा है। विभिन्न जिलों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार अब तक लगभग 40 से 55 प्रतिशत विद्यार्थियों की ही APAAR ID बन सकी है।

धनबाद जिले में स्थिति अपेक्षाकृत चिंताजनक है, जहां 1,259 ऐसे स्कूल चिन्हित किए गए हैं, जिनमें एक भी नया APAAR ID जेनरेट नहीं हुआ है। जिले में अब तक करीब 52 प्रतिशत छात्रों की आईडी बन पाई है। वहीं बोकारो में 3.43 लाख विद्यार्थियों के लक्ष्य के मुकाबले लगभग 55 प्रतिशत बच्चों की APAAR ID तैयार हुई है। हजारीबाग में भी करीब 44 प्रतिशत विद्यार्थियों की आईडी बन सकी है।

डेटा मिसमैच सबसे बड़ी बाधा

APAAR ID बनाने में सबसे बड़ी चुनौती आधार कार्ड और स्कूल रिकॉर्ड के बीच डेटा का मेल नहीं होना है। कई मामलों में विद्यार्थियों के नाम, जन्मतिथि, अभिभावकों के नाम अथवा वर्तनी में अंतर होने के कारण सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल जागरूकता की कमी भी अभियान की रफ्तार को प्रभावित कर रही है।

शिक्षा पदाधिकारी बादल राज ने कहा कि APAAR ID छात्रों के शैक्षणिक भविष्य को डिजिटल रूप से सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। सभी जिलों को शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने का निर्देश दिया गया है। जहां तकनीकी या डेटा संबंधी समस्याएं सामने आ रही हैं, वहां विशेष शिविर आयोजित कर आधार और अन्य विवरणों में सुधार कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन के सहयोग से इस प्रक्रिया को जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।

क्या है APAAR ID?

APAAR ID छात्रों के लिए एक विशिष्ट डिजिटल पहचान संख्या है, जिसमें उनकी पूरी शैक्षणिक यात्रा का रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है। यह Academic Bank of Credits (ABC) से जुड़ी होती है, जहां छात्र द्वारा अर्जित शैक्षणिक क्रेडिट डिजिटल रूप से संग्रहित किए जाते हैं। इससे विश्वविद्यालय बदलने, क्रेडिट ट्रांसफर, छात्रवृत्ति और अन्य शैक्षणिक सेवाओं का लाभ लेना आसान हो जाता है।

शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि आने वाले समय में APAAR ID देश की शिक्षा व्यवस्था में “वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी” की अवधारणा को मजबूत आधार प्रदान करेगी।

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