झारखंड में माओवाद को बड़ा झटका, ₹1 करोड़ के इनामी मिसिर बेसरा समेत 5 माओवादी गिरफ्तार। संयुक्त अभियान में 3 AK-47 बरामद, जांच तेज।
News Saga Desk
झारखंड में माओवाद को बड़ा झटका उस समय लगा जब राज्य पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य और ₹1 करोड़ के इनामी मिसिर बेसरा समेत पांच माओवादियों को गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के दौरान सुरक्षा बलों ने तीन AK-47 राइफलें भी बरामद की हैं। सुरक्षा एजेंसियां इसे राज्य में माओवादी नेटवर्क के खिलाफ अब तक की सबसे महत्वपूर्ण सफलताओं में से एक मान रही हैं।
माओवादियों की गिरफ्तारी कैसे हुई?
जानकारी के अनुसार, धनबाद जिले के बरवाड़ा थाना क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों को पहले से खुफिया सूचना मिली थी कि माओवादी संगठन के शीर्ष नेता अपने ठिकाने में बदलाव करने वाले हैं। इसी सूचना के आधार पर झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ ने संयुक्त अभियान चलाया।
सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर टाटा मैजिक वाहन को रोका। वाहन की तलाशी के दौरान पांचों माओवादियों को बिना किसी बड़े प्रतिरोध के गिरफ्तार कर लिया गया। तलाशी में तीन AK-47 राइफलें बरामद हुईं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि समूह पूरी तैयारी के साथ यात्रा कर रहा था।
कौन हैं गिरफ्तार किए गए माओवादी?
इस कार्रवाई में गिरफ्तार किए गए माओवादियों में सबसे प्रमुख नाम मिसिर बेसरा का है, जो भाकपा (माओवादी) का पोलित ब्यूरो सदस्य बताया जाता है। उसके अलावा तुम्बा मांझी (रीजनल कमेटी सदस्य), बिरेन हांसदा (एरिया कमेटी सदस्य), मंगल मुर्मू और दिनेश राय को भी गिरफ्तार किया गया है।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, मिसिर बेसरा लंबे समय से संगठन के प्रमुख रणनीतिकारों में शामिल रहा है और झारखंड, ओडिशा तथा पश्चिम बंगाल के जंगलों में माओवादी गतिविधियों का संचालन करने में उसकी अहम भूमिका रही है।
तीन दशक से सक्रिय था मिसिर बेसरा
झारखंड में माओवाद को बड़ा झटका इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि मिसिर बेसरा पिछले लगभग तीन दशकों से सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था। उस पर ₹1 करोड़ का इनाम घोषित था और वह कई राज्यों में सक्रिय माओवादी नेटवर्क का प्रमुख चेहरा माना जाता था।
सूत्रों के अनुसार, वह संगठन की रणनीति तैयार करने, कैडर के समन्वय और विभिन्न इलाकों में गतिविधियों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था। यही कारण है कि उसकी गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
बरामद हुए तीन AK-47, जांच तेज
गिरफ्तारी के दौरान वाहन से तीन AK-47 राइफलें बरामद हुई हैं। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि सभी माओवादी किसी नए सुरक्षित ठिकाने की ओर जा रहे थे।
अब सुरक्षा एजेंसियां गिरफ्तार माओवादियों से पूछताछ कर रही हैं। जांच का मुख्य फोकस संगठन के नेटवर्क, हथियारों की आपूर्ति, वित्तीय स्रोतों और अन्य सक्रिय सदस्यों के बारे में जानकारी जुटाना है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ से कई महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।
माओवादी नेटवर्क पर पड़ेगा बड़ा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि झारखंड में माओवाद को बड़ा झटका मिलने से संगठन की रणनीतिक क्षमता पर असर पड़ सकता है। शीर्ष स्तर के नेताओं की गिरफ्तारी से संगठन के संचालन, समन्वय और नई योजनाओं पर प्रभाव पड़ने की संभावना है।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह अभियान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे भविष्य में माओवादी गतिविधियों पर नियंत्रण मजबूत करने में मदद मिल सकती है। साथ ही प्रभावित इलाकों में विकास कार्यों और सुरक्षा व्यवस्था को भी गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, मिसिर बेसरा लंबे समय से माओवादी संगठन का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता रहा है। अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई सटीक खुफिया सूचना के आधार पर की गई और संयुक्त अभियान पूरी योजना के साथ संचालित किया गया।
अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार सभी आरोपियों से विस्तृत पूछताछ की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई और नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश जारी रहेगी।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस या संबंधित सुरक्षा एजेंसियों को दें। सुरक्षा बलों ने स्पष्ट किया है कि माओवादी गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और राज्य में शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अभियान आगे भी जारी रहेगा।
फिलहाल गिरफ्तार सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है। जांच पूरी होने के बाद सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे मामले में विस्तृत जानकारी साझा कर सकती हैं। माना जा रहा है कि इस कार्रवाई से झारखंड सहित आसपास के राज्यों में सक्रिय माओवादी नेटवर्क के बारे में कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं।
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