झारखंड सरकार ने अपात्र राशन कार्डधारकों पर सख्ती शुरू की है। पात्रता जांच के बाद कार्ड रद्द होंगे। 31 अगस्त के बाद अनाज आवंटन भी प्रभावित हो सकता है।
News Saga Desk
झारखंड में राशन कार्ड पर बड़ा एक्शन लेते हुए राज्य सरकार ने अपात्र लाभुकों के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू कर दिया है। खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने ऐसे लोगों की पहचान करने की प्रक्रिया तेज कर दी है, जो पात्र नहीं होने के बावजूद सरकारी राशन योजना का लाभ उठा रहे हैं। विभाग ने सभी जिलों के उपायुक्तों को निर्देश दिया है कि अपात्र लाभुकों की पहचान कर उनके राशन कार्ड जल्द से जल्द रद्द किए जाएं, ताकि योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे।
विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई भारत सरकार की राइटफुल टारगेटिंग व्यवस्था के तहत तैयार किए गए KPI-V2 (की परफॉर्मेंस इंडिकेटर) डेटा के आधार पर की जा रही है। इस डेटा के माध्यम से ऐसे लाभुकों को चिन्हित किया गया है, जो आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद सरकारी खाद्यान्न योजना का लाभ ले रहे हैं।
KPI-V2 डेटा के आधार पर होगी कार्रवाई
झारखंड में राशन कार्ड पर बड़ा एक्शन के तहत खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के सचिव राजेश कुमार शर्मा ने राज्य के सभी जिलों के उपायुक्तों को पत्र भेजा है। पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि चिन्हित अपात्र लाभुकों के राशन कार्ड तत्काल प्रभाव से रद्द करने की प्रक्रिया पूरी की जाए।
विभाग ने यह भी कहा है कि जिलों को इस अभियान की नियमित निगरानी करनी होगी। उपायुक्तों को हर सप्ताह समीक्षा बैठक आयोजित कर कार्रवाई की प्रगति की रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अभियान समय पर पूरा हो सके।
31 अगस्त के बाद रुक सकता है अनाज का आवंटन
सरकार ने चेतावनी दी है कि यदि जिलों की ओर से समय पर अपात्र लाभुकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो इसका असर राज्य को मिलने वाले खाद्यान्न आवंटन पर पड़ सकता है।
विभाग के अनुसार, 31 अगस्त के बाद केंद्र सरकार संबंधित जिलों में चिन्हित अपात्र लाभुकों की संख्या के आधार पर अनाज का आवंटन कम या रोक सकती है। इसलिए सभी जिलों को निर्धारित समयसीमा के भीतर जांच और कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
झारखंड में राशन कार्ड पर बड़ा एक्शन का उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। पिछले कुछ समय से यह शिकायतें मिल रही थीं कि कई आर्थिक रूप से सक्षम लोग भी सरकारी राशन योजना का लाभ ले रहे हैं, जिससे वास्तविक पात्र परिवारों को योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
भारत सरकार की राइटफुल टारगेटिंग व्यवस्था का मकसद ऐसे अपात्र लाभुकों की पहचान कर सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाना और सरकारी संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित करना है।
इस अभियान के पूरा होने के बाद सरकारी राशन योजना का लाभ वास्तविक पात्र परिवारों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचने की उम्मीद है। साथ ही सरकारी अनाज वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और अनियमितताओं पर रोक लगेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि पात्रता की नियमित समीक्षा से योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन संभव होगा और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग कम होगा।
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नगर निकायों को 154 करोड़ रुपये का अनुदान
इसी बीच झारखंड सरकार ने शहरी विकास को गति देने के लिए वर्ष 2026-27 के लिए नगर निकायों को 154 करोड़ रुपये का अनुदान जारी किया है।
नगर विकास एवं आवास विभाग के अनुसार, यह राशि नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों के बीच वितरित की गई है। इस फंड का उपयोग सड़क निर्माण, नाली व्यवस्था, जल निकासी और अन्य आधारभूत विकास कार्यों में किया जाएगा।
सरकारी जानकारी के अनुसार, गिरिडीह नगर निगम को सबसे अधिक 4.90 करोड़ रुपये का आवंटन मिला है, जबकि रांची नगर निगम को 3.45 करोड़ रुपये प्रदान किए गए हैं। सरकार का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना और नागरिक सेवाओं में सुधार लाना है।

खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के सचिव राजेश कुमार शर्मा ने सभी उपायुक्तों को अभियान में तेजी लाने और इसकी नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अपात्र लाभुकों की पहचान और राशन कार्ड निरस्तीकरण की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए।
सरकार की कार्रवाई का उद्देश्य केवल अपात्र लाभुकों पर है। पात्र राशन कार्डधारकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। यदि किसी लाभुक को अपनी पात्रता या राशन कार्ड की स्थिति को लेकर कोई संदेह हो, तो वह संबंधित प्रखंड, जिला आपूर्ति कार्यालय या जन वितरण प्रणाली के अधिकारियों से संपर्क कर जानकारी प्राप्त कर सकता है।
झारखंड में राशन कार्ड पर बड़ा एक्शन राज्य सरकार की पारदर्शी और लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अपात्र लाभुकों के खिलाफ कार्रवाई से सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। वहीं, नगर निकायों को 154 करोड़ रुपये का अनुदान राज्य के शहरी विकास कार्यों को नई गति देने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।
वहीं, झारखंड सरकार ने शहरी क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए वर्ष 2026-27 के लिए नगर निकायों को 154 करोड़ रुपये का अनुदान जारी किया है। नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से यह राशि नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों के बीच बांटी गई है। इस फंड का इस्तेमाल सड़क निर्माण, नाली व्यवस्था और अन्य जरूरी विकास कार्यों में किया जाएगा। नगर निगमों में गिरिडीह नगर निगम को सबसे अधिक 4.90 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि रांची नगर निगम को 3.45 करोड़ रुपये की राशि दी गई है।
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