Jharkhand Teacher Attendance नियमों में बड़ा बदलाव। फिंगरप्रिंट फेल होने पर मेडिकल प्रमाण-पत्र और राज्य की मंजूरी के बाद OTP से हाजिरी लगेगी, लोकेशन वेरिफिकेशन भी अनिवार्य होगा।
News Saga Desk
झारखंड सरकार ने सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के लिए Jharkhand Teacher Attendance प्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। अब जिन शिक्षकों के फिंगरप्रिंट चिकित्सीय कारणों से बायोमेट्रिक मशीन पर काम नहीं करते, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने और राज्य स्तर से अनुमति मिलने के बाद OTP (वन टाइम पासवर्ड) के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करने की सुविधा मिलेगी। शिक्षा विभाग का कहना है कि इस नई व्यवस्था का उद्देश्य वास्तविक जरूरतमंद शिक्षकों को राहत देना और डिजिटल उपस्थिति प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित तथा जवाबदेह बनाना है।
यह नई व्यवस्था राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों और शिक्षा विभाग के संबंधित कार्यालयों में लागू होगी। विभाग ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) और जिला शिक्षा अधीक्षकों (DSE) को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
मेडिकल प्रमाण-पत्र के बाद ही मिलेगी OTP सुविधा
नई Jharkhand Teacher Attendance व्यवस्था के अनुसार किसी भी शिक्षक को सीधे OTP से उपस्थिति दर्ज करने की अनुमति नहीं मिलेगी। सबसे पहले संबंधित शिक्षक का दोबारा बायोमेट्रिक पंजीकरण कराया जाएगा। यदि पुनः पंजीकरण के बाद भी मशीन फिंगरप्रिंट पहचानने में असफल रहती है, तभी अगली प्रक्रिया शुरू होगी।

इसके बाद शिक्षक को जिला चिकित्सा पदाधिकारी (सिविल सर्जन/CMO) से चिकित्सीय प्रमाण-पत्र प्राप्त करना होगा। यह प्रमाण-पत्र इस बात की पुष्टि करेगा कि चिकित्सीय कारणों से शिक्षक के फिंगरप्रिंट का मिलान संभव नहीं है।
इसके पश्चात जिला शिक्षा पदाधिकारी पूरे मामले की जांच करेंगे और अपनी अनुशंसा राज्य मुख्यालय को भेजेंगे। अंतिम स्वीकृति राज्य स्तर से मिलने के बाद ही संबंधित शिक्षक को OTP आधारित उपस्थिति प्रणाली का लाभ मिलेगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सुविधा केवल वास्तविक पात्र शिक्षकों को ही मिले।
OTP के साथ लोकेशन वेरिफिकेशन भी होगा अनिवार्य
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल OTP दर्ज करने से उपस्थिति स्वीकार नहीं होगी। Jharkhand Teacher Attendance प्रणाली में OTP उसी मोबाइल नंबर पर भेजा जाएगा, जो शिक्षक के ई-विद्यावाहिनी पोर्टल पर पहले से पंजीकृत है।
इसके अलावा उपस्थिति दर्ज करते समय शिक्षक की डिजिटल लोकेशन भी सत्यापित की जाएगी। यदि सिस्टम में यह पाया जाता है कि शिक्षक विद्यालय परिसर या निर्धारित कार्यस्थल पर मौजूद नहीं हैं, तो उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं की जाएगी।
विभाग का कहना है कि इस तकनीकी व्यवस्था से OTP के दुरुपयोग की संभावना काफी हद तक समाप्त होगी और केवल विद्यालय में उपस्थित शिक्षक ही इसका लाभ उठा सकेंगे।
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प्रतिनियुक्त शिक्षकों के लिए भी लागू होंगे नए नियम
नई व्यवस्था केवल नियमित शिक्षकों तक सीमित नहीं रहेगी। प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर कार्यरत शिक्षकों को भी अब उसी कार्यालय में अपनी बायोमेट्रिक अथवा स्वीकृत डिजिटल उपस्थिति दर्ज करनी होगी, जहां वे वर्तमान में कार्यरत हैं।
इसके लिए ई-विद्यावाहिनी पोर्टल का उपयोग अनिवार्य रहेगा। इससे सभी शिक्षकों की उपस्थिति का रिकॉर्ड एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगा और निगरानी प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी।
शिक्षा विभाग ने जिलों को निर्देश दिया है कि जिला शिक्षा कार्यालय, बीआरसी, डायट तथा अन्य संबंधित कार्यालयों में कम-से-कम एक बायोमेट्रिक मशीन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। जिन कार्यालयों में अभी तक ई-विद्यावाहिनी पोर्टल की सुविधा उपलब्ध नहीं है, उन्हें भी जल्द इस डिजिटल प्रणाली से जोड़ा जाएगा।
विभाग का मानना है कि नई व्यवस्था से उपस्थिति प्रणाली अधिक तकनीक-आधारित, पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। साथ ही, जिन शिक्षकों को चिकित्सीय कारणों से बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज करने में कठिनाई होती थी, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत राहत मिल सकेगी।
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