जेपीएससी दूसरी सिविल सेवा परीक्षा घोटाले में CBI ने कोर्ट में फॉरेंसिक सबूत पेश किए। 60 आरोपियों पर मुकदमा चलाने की सिफारिश, अंकों में हेरफेर और भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं का दावा।
जेपीएससी दूसरी सिविल सेवा परीक्षा घोटाला एक बार फिर सुर्खियों में है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले में अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट और फॉरेंसिक साक्ष्य अदालत के समक्ष पेश कर दिए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की दूसरी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं, जिससे कथित रूप से मेधावी अभ्यर्थियों की जगह प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को बीडीओ, सीओ, डीएसपी और वाणिज्यकर अधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति मिली। सीबीआई ने 60 आरोपियों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, कूटरचना और भ्रष्टाचार के मामलों में मुकदमा चलाने की सिफारिश की है।

फॉरेंसिक जांच में अंकों की हेराफेरी की पुष्टि
जेपीएससी दूसरी सिविल सेवा परीक्षा घोटाला की जांच के दौरान सीबीआई ने संदिग्ध उत्तर पुस्तिकाओं की वैज्ञानिक जांच गुजरात के गांधीनगर स्थित फॉरेंसिक साइंस प्रयोगशाला में कराई। जांच में कई उत्तर पुस्तिकाओं में अंकों के साथ छेड़छाड़, ओवरराइटिंग और दोबारा अंक दर्ज किए जाने की पुष्टि हुई।
सीबीआई के अनुसार, केवल दस्तावेजों की जांच ही नहीं की गई, बल्कि प्रत्येक संदिग्ध कॉपी के पन्नों का फॉरेंसिक विश्लेषण कराया गया ताकि अदालत में वैज्ञानिक साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सकें।
ओएमआर शीट और मार्कशीट में मिला बड़ा अंतर
जांच में सामने आया कि कई अभ्यर्थियों ने ओएमआर शीट में बेहद कम उत्तर दिए थे, लेकिन अंतिम परिणाम में उन्हें अपेक्षा से कहीं अधिक अंक प्रदान किए गए। कुछ अभ्यर्थियों ने केवल 7 से 25 प्रश्नों के उत्तर भरे थे, जबकि उनकी मार्कशीट में कई गुना अधिक अंक दर्ज पाए गए।
सीबीआई का कहना है कि वास्तविक ओएमआर रिकॉर्ड और आधिकारिक अंक तालिका के बीच यह अंतर परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं की ओर संकेत करता है।
उत्तर पुस्तिकाओं में काट-छांट और पुनर्मूल्यांकन
जांच एजेंसी ने मुख्य परीक्षा की सैकड़ों उत्तर पुस्तिकाओं में अंक काटकर या मिटाकर बढ़ाए जाने के प्रमाण मिलने का दावा किया है। इसके बाद वर्ष 2019 में विशेषज्ञों की निगरानी में उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन कराया गया।
इस प्रक्रिया में बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के विशेषज्ञ शामिल हुए और पूरी जांच सीसीटीवी निगरानी में की गई। पुनर्मूल्यांकन के दौरान कई कॉपियों में वास्तविक अंक और घोषित अंकों के बीच 30 से 80 प्रतिशत तक का अंतर सामने आया।
मूल्यांकनकर्ताओं के बयान भी बने अहम साक्ष्य
जेपीएससी दूसरी सिविल सेवा परीक्षा घोटाला की जांच के दौरान सीबीआई ने मूल्यांकनकर्ताओं से भी पूछताछ की। रिपोर्ट के अनुसार, आठ से अधिक मूल्यांकनकर्ताओं ने मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए बयान में स्वीकार किया कि मूल्यांकन के दौरान उनसे त्रुटियां हुईं या कुछ मामलों में दबाव अथवा निर्देश के आधार पर अंक बढ़ाए गए।
जांच एजेंसी का मानना है कि इन बयानों ने पूरे मामले को मजबूत आधार प्रदान किया।
रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने का आरोप
सीबीआई की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जिन अभ्यर्थियों के अंकों में सबसे अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई, उनमें कई तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष और सदस्यों के रिश्तेदार बताए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे मामलों में हितों के टकराव (Conflict of Interest) की आशंका स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायालय में उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के बाद ही होगा।
झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित दूसरी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे थे। कई अभ्यर्थियों और सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया कि परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई। इसके बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई।
जांच के दौरान परीक्षा प्रक्रिया, कोडिंग-डिकोडिंग, स्कैनिंग, परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया और रिकॉर्ड प्रबंधन की भी विस्तार से जांच की गई। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि परीक्षा से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज और रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए जा सके, जिसे जांच एजेंसी ने गंभीर विषय माना है।
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भर्ती प्रणाली पर पड़ सकता है असर
यदि अदालत में सीबीआई के प्रस्तुत साक्ष्य प्रमाणित होते हैं, तो इस मामले का प्रभाव संबंधित नियुक्तियों और भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है। यह मामला राज्य की भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों से भर्ती एजेंसियों की कार्यप्रणाली की समीक्षा और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता सामने आती है।
सीबीआई ने अपनी जांच रिपोर्ट में नौ प्रमुख बिंदुओं के आधार पर 60 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की सिफारिश की है। एजेंसी का कहना है कि उसने दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ फॉरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों के बयान भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए हैं। फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम निर्णय अदालत द्वारा ही दिया जाएगा।
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