JSSC CGL पेपर लीक और धांधली मामले में CID की जांच तेज हो गई है। बिहार, बंगाल और झारखंड में फैले सिंडिकेट, अभ्यर्थियों के मूल प्रमाणपत्र जब्त करने, लाखों के लेन-देन और सीडीआर (CDR) जांच से जुड़ी पूरी जानकारी पढ़ें।
रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा (CGL)-2023 में कथित पेपर लीक और बड़े पैमाने पर धांधली का मामला लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है। मामले की पड़ताल कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की जांच में रोज नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह केवल स्थानीय स्तर की गड़बड़ी नहीं है, बल्कि इसके तार झारखंड के अलावा पड़ोसी राज्यों बिहार और पश्चिम बंगाल तक फैले हुए हैं। बिचौलियों का एक बड़ा सिंडिकेट अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूलकर परीक्षा से पहले ही प्रश्न और उत्तर उपलब्ध कराने का काम कर रहा था।

लाखों रुपये का लेन-देन, एडवांस भुगतान और गिरवी रखे कागजात
सीआईडी की केस डायरी से मिले तथ्यों के मुताबिक, अभ्यर्थियों को पास कराने की गारंटी देने वाला यह सिंडिकेट बेहद व्यवस्थित तरीके से काम करता था। सिंडिकेट अभ्यर्थियों से पहले ‘एडवांस’ के तौर पर लाखों रुपये ऐंठता था और बाकी की रकम परिणाम घोषित होने के बाद देने की शर्त रखी जाती थी।
जांच में यह भी सामने आया है कि नौकरी की गारंटी के बदले अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र (Original Certificates) बिचौलियों द्वारा अपने पास जमा रख लिए जाते थे, ताकि वे पैसे देने से मुकर न सकें। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में तो गारंटी के तौर पर जमीन की रजिस्ट्री या कागजात गिरवी रखने तक की बात जांच के दायरे में आई है। पटना के एक प्रमुख बिचौलिए संजय साव को 5.50 लाख रुपये का भुगतान किए जाने और उससे दस्तावेज वापस लेने से जुड़े साक्ष्य भी सीआईडी के हाथ लगे हैं।
बोकारो से पटना और बंगाल तक अभ्यर्थियों को ठहराकर ‘रट्टा’ लगवाने का आरोप
जांच रिपोर्टों के अनुसार, परीक्षा से ठीक पहले अभ्यर्थियों को एक जगह एकत्र कर प्रश्न-उत्तर याद कराने की साजिश रची गई थी। इसके लिए बोकारो, पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों तथा बिहार के पटना और छपरा जैसे शहरों में गुप्त ठिकाने बनाए गए थे। एजेंट अभ्यर्थियों को इन सुरक्षित ठिकानों पर ले जाते थे, जहां उन्हें आने वाले प्रश्नपत्रों के उत्तर रटवाए जाते थे। इस पूरी प्रक्रिया के बदले अभ्यर्थियों से मोटी रकम ऐंठी जाती थी। सीआईडी अब इन एजेंटों, परीक्षा संचालन से जुड़ी निजी एजेंसियों और आयोग के कर्मचारियों के बीच के संभावित संपर्कों की गहनता से पड़ताल कर रही है।
फिलहाल, JSSC-CGL परीक्षा मामले में सीआईडी की जांच पूरे जोरों पर है। जांच एजेंसी का मुख्य उद्देश्य इस पूरे अंतरराज्यीय सिंडिकेट के हर एक चेहरे को बेनकाब करना, अवैध पैसों की आवाजाही का पता लगाना और परीक्षा प्रक्रिया में अनुचित लाभ उठाने वाले अभ्यर्थियों व दलालों की पहचान करना है। जांच एजेंसियों का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने और ठोस कानूनी साक्ष्य अदालत में पेश किए जाने के बाद ही इस पूरे घटनाक्रम पर अंतिम निष्कर्ष निकलेगा।
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