कल्याण बनर्जी के बदले सुर अभिषेक बनर्जी को पहले बताया घमंडी, अब कहा ‘बेटे जैसा’

तृणमूल कांग्रेस में जारी अंदरूनी खींचतान के बीच कल्याण बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी को अपना बेटा जैसा बताया। 24 घंटे पहले तक अभिषेक पर घमंड का आरोप लगाने वाले कल्याण के बदले सुरों ने TMC की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।

News Saga Desk

पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) में चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी के बदले हुए तेवर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गए हैं। कुछ ही दिन पहले पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाने वाले कल्याण बनर्जी अब उनके प्रति नरम रुख अपनाते नजर आ रहे हैं। उन्होंने अभिषेक बनर्जी को अपना “बेटा जैसा” बताते हुए कहा कि एक पिता का कर्तव्य होता है कि वह अपने बेटे की गलतियों को माफ कर दे।

कल्याण बनर्जी के इस नए बयान ने TMC के भीतर चल रहे विवाद और संभावित सुलह की अटकलों को और तेज कर दिया है। खास बात यह है कि यह बयान ऐसे समय आया है जब महज 24 घंटे पहले उन्होंने अभिषेक बनर्जी पर घमंडी होने का आरोप लगाया था और पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को अल्टीमेटम तक दे दिया था।

अभिषेक को बताया बेटा, बदले राजनीतिक संकेत

श्रीरामपुर से सांसद कल्याण बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अभिषेक बनर्जी उनके बेटे के समान हैं। उन्होंने कहा कि पिता अपने बेटे की गलतियों को माफ कर देता है और यही उनका भी दृष्टिकोण है। इस दौरान उन्होंने लोकतंत्र और राजनीतिक माहौल पर भी चिंता जताई।

कल्याण बनर्जी ने कहा कि देश में लोकतंत्र खतरे में है और पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी कई बदलाव देखने को मिल रहे हैं। हालांकि, उनका सबसे अधिक चर्चा में रहने वाला बयान अभिषेक बनर्जी को लेकर रहा, जिसने राजनीतिक विश्लेषकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या TMC के भीतर जारी विवाद अब खत्म होने की ओर बढ़ रहा है।

24 घंटे पहले तक तीखे थे तेवर

कल्याण बनर्जी का यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे पहले उन्होंने अभिषेक बनर्जी पर खुलकर हमला बोला था। उन्होंने आरोप लगाया था कि अभिषेक में वरिष्ठ नेताओं के प्रति सम्मान की कमी है और उनका रवैया अहंकारी है।

इतना ही नहीं, उन्होंने पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के सामने यह तक कह दिया था कि उन्हें अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में से किसी एक को चुनना होगा। इस बयान को TMC के भीतर सबसे बड़े सार्वजनिक मतभेदों में से एक माना गया था।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कल्याण बनर्जी के उस बयान ने पार्टी नेतृत्व को भी असहज स्थिति में डाल दिया था, क्योंकि विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी किसी भी तरह के आंतरिक विवाद को सार्वजनिक नहीं होने देना चाहती।

अभिषेक बनर्जी ने अपनाया संयमित रुख

विवाद बढ़ने के बाद अभिषेक banerjee ने भी बेहद संतुलित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कल्याण बनर्जी को अपना राजनीतिक मार्गदर्शक बताया और कहा कि वरिष्ठ नेता होने के नाते उन्हें आलोचना करने का पूरा अधिकार है।

अभिषेक के इस बयान को पार्टी के भीतर तनाव कम करने की कोशिश के रूप में देखा गया। उन्होंने किसी भी प्रकार की सार्वजनिक बयानबाजी से बचते हुए यह संदेश देने की कोशिश की कि पार्टी में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उनका समाधान संवाद के जरिए निकाला जा सकता है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि अभिषेक बनर्जी के संयमित रवैये ने विवाद को और अधिक बढ़ने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

क्या है पूरा विवाद?

दरअसल, विवाद की जड़ एक कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले से जुड़ी बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, इस मामले में अभिषेक बनर्जी की ओर से अदालत में पैरवी कर रहे कल्याण बनर्जी को अचानक हटा दिया गया था।

कल्याण बनर्जी का आरोप था कि उन्हें सीधे तौर पर इसकी जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि उनके बेटे ने फोन करके उन्हें बताया कि अब उन्हें अदालत में पेश होने की जरूरत नहीं है और उनकी जगह वरिष्ठ वकील किशोर दत्ता पक्ष रखेंगे।

इस घटना से नाराज कल्याण बनर्जी ने इसे अपना अपमान और अनादर बताया था। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि अभिषेक बनर्जी कभी उन पर भरोसा नहीं करते थे और भविष्य में भी नहीं करेंगे। यही बयान बाद में TMC के भीतर बड़े विवाद का कारण बना।

TMC में सुलह के संकेत?

अब कल्याण बनर्जी के बदले हुए सुरों को देखकर माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व ने विवाद को सुलझाने के लिए पहल की है। हालांकि, पार्टी की ओर से आधिकारिक तौर पर इस संबंध में कोई बयान नहीं आया है।

फिर भी, जिस तरह से पहले तीखी आलोचना और फिर कुछ ही घंटों बाद नरम रुख देखने को मिला है, उससे यह संकेत जरूर मिलते हैं कि TMC अपने आंतरिक मतभेदों को सार्वजनिक विवाद बनने से रोकना चाहती है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह केवल बयानबाजी में बदलाव है या फिर पार्टी के भीतर वास्तव में सुलह की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

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