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मानसून से खूंटी के जलप्रपातों में जलस्तर बढ़ा। प्रशासन ने पर्यटकों के लिए सुरक्षा चेतावनी जारी करते हुए सतर्क रहने की अपील की है।

झारखंड में सक्रिय मानसून ने खूंटी जिले की प्राकृतिक सुंदरता को नई पहचान दे दी है। लगातार हो रही बारिश के कारण जिले के प्रसिद्ध जलप्रपात, नदी-नाले और पहाड़ी क्षेत्र पूरी तरह जीवंत हो उठे हैं। Khunti Waterfalls Monsoon के दौरान पेरवा घाघ, पंचघाघ, रानी फॉल, सप्तधारा, चंचला घाघ, पाण्डु पुडिंग और रिमिक्स फॉल जैसे पर्यटन स्थलों पर पानी का बहाव कई गुना बढ़ गया है। घने साल और सखुआ के जंगलों के बीच गिरती विशाल जलधाराएं पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं, लेकिन बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर विशेष चेतावनी भी जारी की है।
लगातार बारिश से जलप्रपातों का बदला स्वरूप
पिछले कई दिनों से हो रही बारिश का असर खूंटी जिले के लगभग सभी प्रमुख जलप्रपातों पर साफ दिखाई दे रहा है। पहाड़ियों से तेज गति से उतरता पानी झरनों को और अधिक विशाल तथा आकर्षक बना रहा है। सामान्य दिनों की तुलना में जलधाराओं का वेग काफी बढ़ गया है और कई स्थानों पर पानी की गर्जना दूर तक सुनाई दे रही है।
इसके साथ ही नदियों का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। कई इलाकों में नदी किनारों का कटाव और निचले क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बनने लगी है, जिससे प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
मानसून के सुहाने मौसम का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक खूंटी पहुंच रहे हैं। सप्ताहांत और छुट्टियों के दौरान रांची, जमशेदपुर, बोकारो, धनबाद, हजारीबाग के अलावा ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ से भी लोग यहां पहुंच रहे हैं।
पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य के बीच फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और रील बनाने का आनंद ले रहे हैं। हालांकि प्रशासन ने लोगों से रोमांच के चक्कर में जोखिम नहीं उठाने की अपील की है।
तेज बहाव और फिसलन से बढ़ा हादसों का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार मानसून के दौरान जलप्रपात जितने सुंदर दिखाई देते हैं, उतने ही खतरनाक भी हो जाते हैं। लगातार बारिश के कारण चट्टानों पर काई जम जाती है, जिससे वे बेहद फिसलन भरी हो जाती हैं।
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कई पर्यटक बेहतर फोटो या सेल्फी लेने के लिए जलधारा के बेहद करीब पहुंच जाते हैं या ऊंची चट्टानों पर चढ़ने की कोशिश करते हैं। तेज बहाव और फिसलन के कारण ऐसी लापरवाही गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकती है। बरसात के मौसम में बचाव अभियान चलाना भी काफी चुनौतीपूर्ण होता है।
प्रशासन ने जारी किए सुरक्षा दिशा-निर्देश
संभावित हादसों को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।
- जलप्रपात के किनारे या तेज बहाव वाले क्षेत्रों में न जाएं।
- बैरिकेडिंग और चेतावनी संकेतों का पालन करें।
- खतरनाक चट्टानों पर चढ़कर सेल्फी लेने से बचें।
- बच्चों पर विशेष निगरानी रखें।
- प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद सुरक्षित दूरी से लें।
- मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें।
प्रशासन ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर संवेदनशील पर्यटन स्थलों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल और निगरानी की व्यवस्था भी की जाएगी।
लगातार बारिश के कारण जंगलों और ग्रामीण क्षेत्रों में सांप तथा अन्य विषैले जीव-जंतुओं के निकलने की संभावना बढ़ गई है। सिविल सर्जन डॉ. ललित रंजन पाठक ने लोगों से घरों और आसपास साफ-सफाई बनाए रखने, रात में टॉर्च का उपयोग करने और झाड़ियों में सावधानी से जाने की सलाह दी है।
उन्होंने कहा कि यदि सांप दिखाई दे तो उसे पकड़ने या मारने की कोशिश न करें, बल्कि वन विभाग या रेस्क्यू टीम को सूचना दें। सांप काटने की स्थिति में झाड़-फूंक के बजाय तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचना चाहिए।
मानसून के दौरान खूंटी के जलप्रपात झारखंड के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शामिल हो जाते हैं। हर वर्ष हजारों पर्यटकों के आगमन से होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और छोटे व्यापारियों को आर्थिक लाभ मिलता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाए तथा प्रशिक्षित लाइफगार्ड, सीसीटीवी, सूचना पट्ट और जागरूकता अभियान चलाए जाएं तो खूंटी का प्राकृतिक पर्यटन राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई दे सकता है।
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