मंझारी दुष्कर्म-हत्या मामले में दोषी को उम्रकैद की सजा

NEWS SAGA DESK

विशेष पॉक्सो कोर्ट का बड़ा फैसला, नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या के दोषी रामलाल बिस्वा को अंतिम सांस तक कैद

पश्चिमी सिंहभूम जिले के मंझारी थाना क्षेत्र में वर्ष 2022 में सामने आए नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या के मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय ने सख्त फैसला सुनाया है। मंझारी नाबालिग दुष्कर्म हत्या मामला में अदालत ने आरोपी रामलाल बिस्वा उर्फ रामलाल मुंडा को दोषी करार देते हुए अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

विशेष पॉक्सो मामलों की सुनवाई कर रहे अपर सत्र न्यायाधीश-द्वितीय संतोष आनंद प्रसाद की अदालत ने यह फैसला सुनाया। मामले में पुलिस की ओर से वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच पूरी कर आरोप पत्र दाखिल किया गया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों समेत अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य न्यायालय के सामने प्रस्तुत किए।

विशेष पॉक्सो कोर्ट ने सुनाई कठोर सजा

मंझारी नाबालिग दुष्कर्म हत्या मामला में अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की दलीलों पर विचार करने के बाद रामलाल बिस्वा को दोषी पाया। अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोषी को सामान्य उम्रकैद के बजाय अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

इसके साथ ही न्यायालय ने दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत के इस फैसले को नाबालिगों के खिलाफ गंभीर अपराधों में कठोर न्यायिक कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।

2022 में सामने आया था मामला

यह मामला वर्ष 2022 में पश्चिमी सिंहभूम जिले के मंझारी थाना क्षेत्र में दर्ज हुआ था। पुलिस ने मामले को मंझारी थाना कांड संख्या 20/2022 के तहत दर्ज कर जांच शुरू की थी।

जांच के दौरान पुलिस ने घटनाक्रम से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की और वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्यों को एकत्र किया। इसके बाद अनुसंधान पूरा कर पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।

मंझारी नाबालिग दुष्कर्म हत्या मामला की जांच में पुलिस ने वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों का इस्तेमाल किया। पुलिस की ओर से किए गए अनुसंधान और साक्ष्य संकलन की अदालत ने भी सराहना की।

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न्यायालय ने माना कि जांच के दौरान पुलिस ने निष्पक्ष तरीके से साक्ष्य जुटाए और उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में सफल रहा।

फैसला सुनाते हुए अदालत ने नाबालिग बच्ची के साथ हुए अपराध को अत्यंत जघन्य और अमानवीय प्रकृति का बताया। न्यायालय ने कहा कि ऐसे गंभीर अपराधों में कठोर दंड आवश्यक है, ताकि समाज में कानून और न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास कायम रहे।

मंझारी नाबालिग दुष्कर्म हत्या मामला में पुलिस और अभियोजन की प्रभावी कार्रवाई के बाद अदालत ने दोषी को कठोर सजा सुनाई।

समाज में कानून के प्रति विश्वास का संदेश

विशेष पॉक्सो कानून का उद्देश्य बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करना और ऐसे मामलों में प्रभावी न्याय सुनिश्चित करना है। इस मामले में अदालत ने अपराध की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए कठोर दंड दिया।

मंझारी नाबालिग दुष्कर्म हत्या मामला में आया यह फैसला पश्चिमी सिंहभूम में नाबालिगों के खिलाफ गंभीर अपराधों पर न्यायिक सख्ती का संदेश देता है। अदालत ने अपने निर्णय में अपराध की गंभीरता, अभियोजन के साक्ष्यों और पुलिस की जांच प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए दोषी को दंडित किया।

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