NEWS SAGA DESK
जमशेदपुर पूर्वी विधायक पूर्णिमा दास साहू ने तमाड़ के पास ग्रामीण महिलाओं के साथ खेत में धान की रोपनी की। उनका सादगी भरा अंदाज सोशल मीडिया पर चर्चा में है।

जनप्रतिनिधियों की आमतौर पर दिखने वाली वीवीआईपी छवि से अलग, जमशेदपुर पूर्वी की विधायक पूर्णिमा दास साहू इन दिनों अपने सादगी भरे अंदाज को लेकर चर्चा में हैं। क्षेत्र की समस्याओं और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय रहने वाली विधायक इस बार किसी राजनीतिक कार्यक्रम या मंच पर नहीं, बल्कि खेत में ग्रामीण महिलाओं के बीच नजर आईं।
विधायक पूर्णिमा दास साहू ने रांची से जमशेदपुर लौटने के दौरान तमाड़ क्षेत्र के पास खेतों में धान की रोपनी कर रही ग्रामीण महिलाओं को देखा। महिलाओं को खेत में काम करते देख उन्होंने अपना काफिला रुकवाया और बिना किसी औपचारिकता के सीधे खेत में उतर गईं। इसके बाद उन्होंने ग्रामीण महिलाओं के साथ कतार में खड़े होकर धान की रोपनी की।
सादगी ने खींचा लोगों का ध्यान
खेत में साधारण वेशभूषा में ग्रामीण महिलाओं के साथ काम करती विधायक को देखकर आसपास मौजूद लोग भी उत्साहित हो गए। उनके व्यवहार में सहजता और ग्रामीणों के प्रति अपनापन साफ दिखाई दिया।
धान की रोपनी के दौरान विधायक ने महिलाओं से बातचीत भी की और उनके काम, समस्याओं तथा ग्रामीण जीवन से जुड़े अनुभवों को जाना। ग्रामीण महिलाओं ने भी विधायक के साथ सहजता से बातचीत की और उन्हें अपने बीच पाकर खुशी जाहिर की।
इसे भी देखें:-Protest in Ranchi in support of Sonam Wangchuk | Slogans raised against Education Minister Dharme…
उनका यह अंदाज लोगों को यह संदेश देता नजर आया कि जनप्रतिनिधि केवल कार्यालयों और मंचों तक सीमित नहीं होते, बल्कि आम लोगों के जीवन और उनकी परिस्थितियों को समझने के लिए उनके बीच जाना भी जरूरी है।
जनसरोकारों के मुद्दों पर रहती हैं सक्रिय
पूर्णिमा दास साहू पहले भी कई बार अपने अलग अंदाज के कारण चर्चा में रह चुकी हैं। वह महिलाओं की सुरक्षा, अधिकारों और स्थानीय समस्याओं को लेकर लगातार आवाज उठाती रही हैं।
अपने विधानसभा क्षेत्र में पेयजल, सड़क, नाली और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर भी वह सक्रिय रहती हैं। यही वजह है कि उनके समर्थक उन्हें जमीन से जुड़ी नेता के रूप में पेश करते हैं।
कुछ समय पहले छत्तीसगढ़ स्थित अपने मायके दौरे के दौरान बेटी के साथ टोटो की सवारी करते हुए उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। उस समय भी लोगों ने उनके सरल व्यवहार और आम जीवन से जुड़े अंदाज की काफी सराहना की थी।
धान की रोपनी करते हुए विधायक का वीडियो और तस्वीरें अब चर्चा का विषय बनी हुई हैं। सोशल मीडिया पर लोग उनके इस अंदाज की तारीफ कर रहे हैं।
समर्थकों का कहना है कि एक जनप्रतिनिधि के तौर पर पूर्णिमा दास साहू का यह व्यवहार उन्हें आम लोगों से जोड़ता है। वहीं, कई लोगों ने इसे ग्रामीण जीवन और किसानों के प्रति सम्मान का प्रतीक बताया है।
धान की रोपनी के दौरान विधायक ने किसी विशेष व्यवस्था या औपचारिक कार्यक्रम का सहारा नहीं लिया। वह सामान्य तरीके से महिलाओं के साथ खेत में उतरीं और काम में हाथ बंटाया।
ग्रामीण महिलाओं के साथ उनका यह जुड़ाव लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। कई लोगों का कहना है कि ऐसे मौके जनप्रतिनिधियों को ग्रामीण इलाकों की वास्तविक स्थिति समझने का अवसर देते हैं।
राजनीति में जहां अक्सर नेताओं की सुरक्षा और प्रोटोकॉल की चर्चा होती है, वहीं पूर्णिमा दास साहू का यह अंदाज उन्हें अलग पहचान दिला रहा है। खेत में उतरकर महिलाओं के साथ धान रोपना उनके समर्थकों के लिए जनता से सीधे जुड़ाव का उदाहरण बन गया है।
विधायक का यह ग्रामीण अंदाज एक बार फिर साबित करता है कि आम लोगों के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझना ही जनप्रतिनिधित्व की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
No Comment! Be the first one.