NEWS SAGA DESK
रांची : रांची के चर्चित रिम्स लैंड स्कैम मामले में आरोपी राजकिशोर बड़ाइक को बड़ा झटका लगा है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की विशेष अदालत ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत के इस फैसले के बाद राजकिशोर बड़ाइक फिलहाल जेल में ही रहेगा।
जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया। मामले के सामने आने के बाद झारखंड हाईकोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया था, जिसके बाद एसीबी ने जांच तेज करते हुए अप्रैल में राजकिशोर बड़ाइक, कार्तिक बड़ाइक समेत चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
फर्जी वंशावली और दस्तावेजों के जरिए बेची गई सरकारी जमीन
एसीबी की जांच में खुलासा हुआ है कि इस पूरे मामले में फर्जी वंशावली और नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि वर्ष 1964-65 में अधिग्रहित की जा चुकी और सरकारी रिकॉर्ड में रिम्स की संपत्ति दर्ज जमीन को निजी जमीन बताकर बेचने की साजिश रची गई।
जांच एजेंसी के अनुसार, भू-माफियाओं ने दस्तावेजों में हेरफेर कर जमीन पर दावा जताया और बाद में उसे बिल्डरों को बेच दिया।
16 सरकारी अधिकारी और कर्मचारी भी जांच के दायरे में
मामले में केवल भू-माफिया ही नहीं, बल्कि कई सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है। एसीबी की जांच में 16 सरकारी अधिकारी और कर्मचारी रडार पर हैं। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने, सरकारी रिकॉर्ड में बदलाव करने और जमीन की खरीद-बिक्री प्रक्रिया में किन-किन लोगों की संलिप्तता रही।
चार मुख्य आरोपी पहले ही हो चुके हैं गिरफ्तार
अब तक की कार्रवाई में एसीबी ने फर्जी वंशावली तैयार करने के आरोप में कार्तिक बड़ाइक, राजकिशोर बड़ाइक, चेतन कुमार और राजेश कुमार झा को गिरफ्तार किया है। जांच में मिले दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई जारी है। एजेंसी आने वाले दिनों में और लोगों से पूछताछ या गिरफ्तारी भी कर सकती है।
31 लाख रुपये में बिल्डरों को बेची गई थी सात एकड़ जमीन
एसीबी के मुताबिक, रिम्स की करीब सात एकड़ अधिग्रहित जमीन को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निजी संपत्ति बताकर लगभग 31 लाख रुपये में बिल्डरों को बेच दिया गया था। जांच एजेंसी का मानना है कि यह केवल अवैध जमीन बिक्री का मामला नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति हड़पने की सुनियोजित साजिश थी।
इसी आधार पर एसीबी ने कांड संख्या 1/2026 दर्ज कर मामले की जांच शुरू की थी। रिम्स लैंड स्कैम को झारखंड के चर्चित भूमि घोटालों में गिना जा रहा है। जांच आगे बढ़ने के साथ नए तथ्य सामने आ रहे हैं। एसीबी अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री से लाभ पाने वालों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
फिलहाल जमानत याचिका खारिज होने के बाद राजकिशोर बड़ाइक की कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं, जबकि एसीबी मामले की गहराई से जांच में जुटी हुई है।
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