रांची में ज्योति संगम श्री दुर्गा पूजा समिति हस्तशिल्प थीम पर भव्य पंडाल बना रही है। हुगला पत्तों की कारीगरी, प्राकृतिक सामग्री और आकर्षक लाइटिंग होगी खासियत।
News Saga Desk
रांची में दुर्गा पूजा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। राजधानी के विभिन्न पूजा पंडालों को आकर्षक और अलग-अलग थीम पर सजाने का काम चल रहा है। इसी कड़ी में ज्योति संगम श्री दुर्गा पूजा समिति इस वर्ष हस्तशिल्प कला की थीम पर भव्य पंडाल तैयार कर रही है। इस पंडाल में पारंपरिक हस्तकला और आधुनिक कलात्मक शैली का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। पंडाल की खास पहचान हुगला पत्तों पर की गई बारीक कारीगरी होगी। इसके निर्माण में बंगाल के कारीगर पिछले एक माह से जुटे हुए हैं। समिति ने पंडाल निर्माण के लिए 20 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया है।
हस्तशिल्प कला की थीम पर तैयार हो रहा पंडाल
ज्योति संगम श्री दुर्गा पूजा समिति इस बार श्रद्धालुओं को हस्तशिल्प कला से जुड़ी रचनात्मकता से परिचित कराने की तैयारी में है। पंडाल को पारंपरिक कारीगरी के साथ आधुनिक कलात्मक रूप दिया जा रहा है। इसमें इस्तेमाल होने वाली सजावटी सामग्री और उस पर की गई बारीक नक्काशी इसे खास पहचान देगी।
समिति के संयोजक दीपक कुमार ने मंगलवार को बताया कि इस वर्ष पंडाल की लंबाई 100 फीट, चौड़ाई 60 फीट और ऊंचाई 50 फीट होगी। इसके निर्माण में बंगाल के अनुभवी कारीगर जुटे हैं। करीब एक महीने से चल रहे निर्माण कार्य में पारंपरिक तकनीकों और अलग-अलग सामग्रियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
हुगला पत्तों की बारीक कारीगरी इस पंडाल का प्रमुख आकर्षण होगी। इसके अलावा बांस की खपच्चियों, जूट और प्राकृतिक रेशों का उपयोग कर सजावट को विशेष स्वरूप दिया जा रहा है।
प्राकृतिक सामग्री से सजावट पर जोर
पंडाल को पर्यावरण अनुकूल स्वरूप देने के लिए समिति की ओर से विभिन्न प्राकृतिक सामग्रियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। हुगला पत्ता, बांस, जूट और प्राकृतिक रेशे इसके निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इन सामग्रियों के माध्यम से पारंपरिक हस्तशिल्प की खूबसूरती को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है।
इसके साथ ही पंडाल को मजबूती और आकर्षक रूप देने के लिए लोहा, थर्मोकोल, फाइबर और शीशे का भी उपयोग किया जाएगा। प्राकृतिक और अन्य सजावटी सामग्रियों के संयोजन से पंडाल की बनावट को विशेष रूप दिया जा रहा है।

हस्तशिल्प आधारित सजावट के जरिए श्रद्धालुओं को भारतीय पारंपरिक कला की विविधता देखने का अवसर मिलेगा। पंडाल का आकार और इसकी कलात्मक संरचना भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहने की उम्मीद है।
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कमल के आसन पर विराजेंगी मां दुर्गा
पंडाल के भीतर मां दुर्गा सहित सभी देवी-देवताओं की प्रतिमाएं कमल के आसन पर स्थापित की जाएंगी। इन प्रतिमाओं का निर्माण झारखंड के मूर्तिकार अजय पाल कर रहे हैं। प्रतिमाओं की स्थापना और पंडाल की थीम के बीच सामंजस्य बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मां दुर्गा की प्रतिमा के साथ अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को भी पारंपरिक धार्मिक स्वरूप में तैयार किया जा रहा है। पूजा के दौरान श्रद्धालु पंडाल में पहुंचकर मां दुर्गा के दर्शन कर सकेंगे।
समिति की योजना पंडाल की सजावट, प्रतिमाओं और रोशनी के माध्यम से दुर्गा पूजा के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाने की है।
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