News Saga Desk
रांची | रांची के कांके स्थित National University of Study and Research in Law में शुक्रवार को कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम (POSH Act) पर क्षेत्रीय कानून समीक्षा परामर्श (पूर्वी क्षेत्र) आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन National Commission for Women, नई दिल्ली के सहयोग से किया गया।
कार्यक्रम में अंबुज नाथ, प्रवीण पुष्कर और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अशोक आर पाटिल समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इस दौरान बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं भी शामिल हुए।
अपने संबोधन में रिटायर्ड जस्टिस अंबुज नाथ ने कहा कि भारत में यौन उत्पीड़न से जुड़े कानून में अब भी अतीत की कई कमियां बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि इस कानून का भविष्य एक अनिश्चित मोड़ पर खड़ा है और इसे और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।

वहीं रांची के ग्रामीण एसपी प्रवीण पुष्कर ने पॉश एक्ट से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि जिन निजी या सरकारी संस्थानों में 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां यह कानून अनिवार्य रूप से लागू होता है। उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थानों में आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का गठन करना जरूरी है।
उन्होंने यह भी बताया कि यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों में पीड़ित महिलाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर शिकायत समिति के समक्ष अपनी बात रखनी होती है। साथ ही उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यदि कोई महिला दुर्भावना से झूठी शिकायत दर्ज करती है, तो ऐसे मामलों में उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।
कार्यक्रम का उद्देश्य पॉश अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन, चुनौतियों और सुधार की संभावनाओं पर चर्चा करना था, जिससे कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया जा सके।
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