NEWS SAGA DESK
कानपुर :- उत्तर प्रदेश के कानपुर पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर भारी मुनाफा दिलाने का झांसा देकर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के एक सेवानिवृत्त डिप्टी जनरल मैनेजर से 2.52 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। मामले में साइबर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बिजनौर से एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। इससे पहले इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
डीसीपी क्राइम एस.के. सिंह ने शनिवार को बताया कि जुलाई 2025 में पीड़ित के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से अंग्रेजी में संदेश आया था। जवाब देने पर दूसरी ओर मौजूद महिला ने अपना नाम इरा रेड्डी बताया और संदेश गलती से भेजे जाने की बात कही। इसके बाद दोनों के बीच नियमित बातचीत शुरू हो गई।
जांच में सामने आया कि महिला ने व्हाट्सएप और टेलीग्राम के माध्यम से संपर्क बढ़ाया तथा खुद को निवेश क्षेत्र की विशेषज्ञ और आर्थिक रूप से संपन्न बताया। उसने क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर भारी मुनाफा कमाने का दावा करते हुए पीड़ित को एक निवेश एप डाउनलोड कराया।
शुरुआत में पीड़ित से पांच लाख रुपये निवेश कराए गए। कुछ समय बाद निवेश की गई राशि में से 10 हजार रुपये वापस भेजे गए, जिससे प्लेटफॉर्म पर उसका भरोसा बढ़ गया। इसके बाद अधिक लाभ और बोनस का लालच देकर लगातार बड़ी रकम निवेश कराई गई।
महिला ने अधिक निवेश पर विशेष लाभ मिलने का दावा किया, जिसके प्रभाव में आकर पीड़ित ने अपनी बचत, शेयरों की बिक्री, रिश्तेदारों से उधार और फ्लैट पर ऋण लेकर करोड़ों रुपये निवेश कर दिए।
पुलिस के अनुसार, जब पीड़ित ने अपनी धनराशि निकालने का प्रयास किया तो टैक्स, बोनस, रिस्क कंट्रोल, एंटी मनी लॉन्ड्रिंग जांच और अन्य शुल्कों के नाम पर लगातार अतिरिक्त रकम जमा कराई जाती रही। इस तरह उससे कुल 2 करोड़ 52 लाख रुपये की ठगी की गई।
बाद में संदेह होने पर जांच करने पर पता चला कि निवेश प्लेटफॉर्म और उससे जुड़ा पूरा नेटवर्क फर्जी था।
डीसीपी क्राइम ने बताया कि साइबर थाना पुलिस ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, चैट रिकॉर्ड, आईपी लॉग और डिजिटल लेनदेन की तकनीकी जांच की। जांच में खुलासा हुआ कि ठगी की रकम को विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित करने के बाद क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर आगे भेजने की कोशिश की गई थी।
डिजिटल ट्रेल और बैंकिंग रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस ने बिजनौर निवासी विपिन कुमार के खाते में ठगी की रकम में से 45 लाख रुपये पहुंचने की पुष्टि की। इसके बाद उसकी पहचान कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से आगे ट्रांसफर करने का काम करता था। जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह सोशल मीडिया, व्हाट्सएप, टेलीग्राम, फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म और भावनात्मक संबंध स्थापित कर लोगों को अपने जाल में फंसाता था।
पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है और मामले की आगे की जांच जारी है।
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