बारिश शुरू होते ही झारखंड के हाट-बाजारों में एक खास सब्जी मिलना शुरु हो जाता है. और वह है रुगड़ा यह सिर्फ एक सब्जी नहीं बल्कि झारखंड की पारंपरिक खान-पान और संस्कृति का एक अहम हिस्सा माना जाता है
News Saga Desk
सबसे पहले जानते हैं कि रुगड़ा आखिर है क्या
रुगड़ा कोई सामान्य सब्जी नहीं है. यह एक जंगली मशरूम है. लेकिन इसकी सबसे खास बात यह है कि यह आम मशरूम की तरह जमीन के ऊपर नहीं उगता. रुगड़ा साल यानी सखुआ के पेड़ों के नीचे मिट्टी के अंदर होता है. इसलिए इसे ढूंढना आसान नहीं होता.
इसे खोजने के लिए ग्रामीण और आदिवासी परिवार सुबह-सुबह जंगलों में निकलते हैं. वे मिट्टी की ऊपरी परत को ध्यान से हटाकर रुगड़ा निकालते हैं. यह पूरी तरह प्रकृति पर निर्भर होता है, इसलिए इसका मिलना हर साल मौसम के अनुसार ही होता है.
रुगड़ा कहां मिलता है
रुगड़ा मुख्य रूप से झारखंड के साल जंगलों में पाया जाता है. रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा, लोहरदगा, लातेहार, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जैसे जिलों में इसकी अच्छी पैदावार होती है. इसके अलावा ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के कुछ वन क्षेत्रों में भी यह मिलता है. हालांकि, झारखंड में रुगड़ा सिर्फ खाने की चीज़ नहीं, बल्कि एक आजीविका का भी हिस्सा है. कई ग्रामीण परिवार मानसून के दौरान रुगड़ा बेचकर पैसे कमाते है जिससे वह अपने परिवार की जरुरत पूरी करते है .
रुगड़ा सिर्फ बारिश में ही क्यों मिलता है
रुगड़ा का मौसम बहुत छोटा होता है. आमतौर पर जून के आखिरी सप्ताह से अगस्त या सितंबर तक यह बाजार में दिखाई देता है. यानी पूरे साल में सिर्फ करीब 40 से 45 दिनों के लिए ही बाजार में दिखाई देता है.
रुगड़ा की बड़े पैमाने पर खेती नहीं होती. यह पूरी तरह प्राकृतिक रूप से जंगलों में उगता है. यही वजह है कि इसकी मात्रा सीमित रहती है और मांग हमेशा ज्यादा होती है.
इतना महंगा क्यों बिकता है
जब सीजन की शुरुआत होती है, तब बाजार में रुगड़ा बहुत कम मात्रा में पहुंचता है. दूसरी ओर इसे खरीदने वालों की संख्या काफी अधिक होती है. इसी कारण शुरुआती दिनों में इसकी कीमत 1,500 से 2,000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है. जैसे-जैसे जंगलों से इसकी उपलब्धता बढ़ती है, कीमतों में कुछ गिरावट देखने को मिलती है. इसेक साथ ही कई लोग को यह बेहद पंसद आता है इस लिए तोड़ी ही दिनों के लिए बाजार में राजा बना रुगड़ा डिमांड में रहता

रुगड़ा के पोषण और फायदे
रुगड़ा सिर्फ खाने में अच्छा लगता है इस लिए बाजार में फेमस नहीं है, बल्कि इसके पोषण गुण भी इसे खास बनाते हैं. यह प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है, इसलिए इसे पौष्टिक भोजन की श्रेणी में रखा जाता है. इसमें फाइबर भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो लोगों की सेहत क् लिए फायदेमंद साबित हो रहा है. इसके अलावा रुगड़ा में आयरन, पोटैशियम और फॉस्फोरस जैसे जरूरी खनिज भी मौजूद होते हैं. इनमें ऐसे जैव सक्रिय तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं.
रुगड़ा को कैसे बनाया जाता है
जंगल से लाए गए रुगड़ा को पहले अच्छी तरह साफ किया जाता है ताकि मिट्टी पूरी तरह निकल जाए. इसके बाद इसे पानी से धोकर पकाया जाता है. झारखंड में इसे अलग-अलग तरीकों से बनाया जाता है. कई लोग इसे मसालों के साथ सूखी सब्जी की तरह बनाते हैं, तो कई घरों में इसे ग्रेवी के रूप में भी पकाया जाता है. इसका स्वाद सामान्य मशरूम से अलग और काफी अनोखा माना जाता है.
रुगड़ा सिर्फ एक मौसमी सब्जी नहीं, बल्कि झारखंड की पहचान का हिस्सा है. कुछ ही समय के लिए उपलब्ध होना. यही कारण है कि हर साल मानसून के साथ लोग रुगड़ा का बेसब्री से इंतजार करते हैं और इसकी बढ़ी कीमत होने के बावजूद इसे खरीदने से पीछे नहीं हटते.
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