सरयू राय ने असम चुनाव में जेएमएम की भूमिका और आदिवासी मतदाताओं पर उठाए सवाल

News Saga Desk

जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के नेता और जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने सोमवार को असम विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा बयान दिया। वे धनबाद स्थित आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में विश्व जल दिवस के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने असम चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की भूमिका पर खुलकर टिप्पणी की और कई सवाल खड़े किए।

असम के आदिवासी स्थानीय मुद्दों को देते हैं प्राथमिकता

मीडिया से बातचीत में सरयू राय ने कहा कि असम में रहने वाले आदिवासी समुदाय के लोग भले ही मूल रूप से झारखंड और ओडिशा से गए हों, लेकिन अब वे पूरी तरह स्थानीय परिवेश में ढल चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वहां के मतदाता स्थानीय मुद्दों और नेतृत्व को ही प्राथमिकता देते हैं और बाहरी राजनीतिक हस्तक्षेप को अधिक महत्व नहीं देते।

‘बदले की राजनीति’ का हिस्सा बताया

सरयू राय ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के असम जाने की कोशिशों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यह कदम एक तरह से “बदले की राजनीति” का हिस्सा हो सकता है। राय के मुताबिक, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पहले झारखंड आ चुके हैं, ऐसे में यह राजनीतिक प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा सकता है।

जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन पर तंज

असम चुनाव में जेएमएम और कांग्रेस के संभावित गठबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर सरयू राय ने कांग्रेस पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इतनी “दिमागी दिवालिया” नहीं है कि वह केवल परिस्थितियों के आधार पर गठबंधन करने लगे।

हेमंत सोरेन की पूरी आलोचना उचित नहीं

हालांकि, सरयू राय ने यह भी कहा कि हेमंत सोरेन की भूमिका की पूरी तरह आलोचना करना सही नहीं होगा। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री संभवतः यह मानते हैं कि असम में रहने वाले आदिवासी समुदाय के मुद्दों को उठाने से उन्हें राजनीतिक समर्थन मिल सकता है।

राय ने यह भी संकेत दिया कि अन्य राज्यों में चुनाव लड़कर कुछ सीटें जीतने की रणनीति के तहत जेएमएम अपनी राष्ट्रीय पहचान मजबूत करने की कोशिश कर सकती है। इस बयान के बाद असम चुनाव में पार्टी की रणनीति को लेकर नई राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है।

असम विधानसभा चुनाव को लेकर सरयू राय का यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। खासकर जेएमएम की भूमिका और उसकी रणनीति को लेकर अब नए सिरे से बहस तेज होने की संभावना है।

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