सावन माह 2026 आज से शुरू। चार सोमवारी, शिवालयों में विशेष तैयारी, पहाड़ी मंदिर में जलाभिषेक और जानिए सावन में सात्विक भोजन व हरे रंग का महत्व।
सावन माह 2026 की शुरुआत, शिवभक्ति में डूबे श्रद्धालु
सावन माह 2026 का शुभारंभ आज गुरुवार से हो गया है। भगवान शिव को समर्पित यह पवित्र महीना आस्था, भक्ति, संयम और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष सावन माह 2026 में चार सोमवारी पड़ रही हैं, जिसे लेकर शिव भक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और धार्मिक आयोजनों की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सुबह से ही श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन और अभिषेक के लिए शिवालयों की ओर पहुंच रहे हैं।

चार सोमवारी को लेकर मंदिरों में विशेष तैयारी
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इस बार चार सोमवार होने के कारण श्रद्धालुओं की भीड़ अधिक रहने की संभावना है। शहर के प्रमुख शिवालयों में सुरक्षा, साफ-सफाई और पूजा व्यवस्था को मजबूत किया गया है।
पूजा सामग्री, बेलपत्र, धतूरा, फूल, फल और अन्य धार्मिक सामग्री की दुकानों पर भी अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक और व्रत-पूजन के लिए पहले से ही आवश्यक सामग्री की खरीदारी कर ली है।

पहाड़ी मंदिर में सुबह 4:30 बजे से जलाभिषेक
रांची के प्रसिद्ध पहाड़ी मंदिर में सावन माह 2026 के पहले दिन सुबह 4:30 बजे से जलाभिषेक शुरू होगा। मंदिर प्रशासन के अनुसार दोपहर 1 बजे तक लगातार जलाभिषेक किया जाएगा। इसके बाद एक घंटे के लिए मंदिर के पट बंद रहेंगे और दोपहर 2 बजे से रात 9 बजे तक श्रद्धालु दर्शन और पूजा कर सकेंगे।
शाम 7:30 बजे विशेष संध्या आरती और भगवान शिव का भव्य श्रृंगार किया जाएगा। इसके बाद श्रद्धालु श्रृंगार दर्शन का लाभ उठा सकेंगे। सावन के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अतिरिक्त व्यवस्थाएं भी की गई हैं।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन सतर्क
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और नगर निगम ने विशेष इंतजाम किए हैं। पहाड़ी मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में तीन शिफ्टों में सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
पूरे मार्ग पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की जा रही है ताकि सुबह और देर शाम आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। इसके अलावा जगह-जगह पेयजल टैंकर और चलंत शौचालय उपलब्ध कराने की भी तैयारी की गई है। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुविधाजनक दर्शन कराना है।

सावन का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में सावन माह 2026 भगवान शिव की विशेष आराधना का समय माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने में शिव पूजा, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और सोमवार का व्रत विशेष फलदायी माना जाता है।
मान्यता है कि इस दौरान श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। यही कारण है कि देशभर के शिव मंदिरों में सावन के पूरे महीने भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
सावन में खान-पान क्यों बदलता है?
सावन माह 2026 में सात्विक भोजन अपनाने की परंपरा केवल धार्मिक आस्था से नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से भी जुड़ी मानी जाती है। वर्षा ऋतु में पाचन क्षमता सामान्य दिनों की तुलना में कमजोर हो सकती है। ऐसे में हल्का, ताजा और सुपाच्य भोजन शरीर के लिए अधिक लाभकारी माना जाता है।
कई श्रद्धालु इस दौरान प्याज, लहसुन और मांसाहार से परहेज करते हैं तथा फल, दूध, दही, हरी सब्जियां और अनाज का संतुलित सेवन करते हैं। इससे शरीर स्वस्थ रहने के साथ-साथ व्रत और पूजा के दौरान मानसिक एकाग्रता बनाए रखने में भी मदद मिलती है।
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हरे रंग का विशेष महत्व
सावन का महीना प्रकृति की हरियाली और नई ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। चारों ओर हरियाली छा जाने के कारण हरे रंग को समृद्धि, सकारात्मकता और जीवन का प्रतीक माना जाता है।
महिलाएं इस दौरान हरी चूड़ियां पहनती हैं, मेहंदी लगाती हैं और पारंपरिक श्रृंगार करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरा रंग माता पार्वती और खुशहाली से भी जुड़ा हुआ माना जाता है। इसलिए सावन में इसका विशेष महत्व बताया जाता है। सावन के दौरान मंदिरों में अधिक भीड़ रहती है। श्रद्धालुओं को प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए। कतार व्यवस्था बनाए रखें, स्वच्छता का ध्यान रखें और केवल निर्धारित स्थानों पर ही पूजा सामग्री अर्पित करें। यदि संभव हो तो भीड़ वाले समय से बचकर दर्शन करें, जिससे सभी श्रद्धालुओं को सुगमता से पूजा का अवसर मिल सके।
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