NEWS SAGA DESK
हैदराबाद :- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को वायु सेना अकादमी में आयोजित 217वीं संयुक्त दीक्षांत परेड (कॉम्बाइंड ग्रेजुएशन परेड) का निरीक्षण किया और नवनियुक्त अधिकारियों से भविष्य के युद्धों की बदलती चुनौतियों के अनुरूप स्वयं को तैयार रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), साइबर क्षमताएं, रोबोटिक्स और अंतरिक्ष आधारित तकनीकें युद्ध का स्वरूप तय करेंगी।
परेड की सलामी लेने के बाद रक्षा मंत्री ने भारतीय वायु सेना में शामिल होने वाले अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि सशस्त्र बलों में सेवा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति सर्वोच्च समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा, नेतृत्व क्षमता और निरंतर सीखने की भावना एक सैन्य अधिकारी की सबसे बड़ी ताकत होती है।
उन्होंने कहा कि पारंपरिक युद्धों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पहले युद्ध सैनिकों और हथियारों की संख्या के आधार पर लड़े जाते थे, लेकिन अब युद्धक्षेत्र तकनीक आधारित हो चुका है। ड्रोन, उपग्रह, साइबर युद्ध, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वायत्त हथियार प्रणालियां और उन्नत निगरानी तंत्र आधुनिक सैन्य अभियानों का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं।
रक्षा मंत्री ने अधिकारियों को सलाह दी कि वे केवल वर्तमान तकनीकों तक सीमित न रहें, बल्कि भविष्य की युद्ध प्रणालियों और उभरती तकनीकों को समझने तथा अपनाने की क्षमता विकसित करें। उन्होंने कहा कि आधुनिक सैन्य नेतृत्व की पहचान बदलती परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालने और नई तकनीकों का प्रभावी उपयोग करने में है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य लगातार बदल रहा है और सैन्य अधिकारियों को हर स्थिति का त्वरित आकलन करने, संसाधनों का बेहतर उपयोग करने तथा आवश्यकता पड़ने पर रणनीतियों को पुनर्गठित करने की क्षमता विकसित करनी होगी। कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की क्षमता ही एक सफल सैन्य अधिकारी की पहचान है।
राजनाथ सिंह ने अधिकारियों को “हार्ड वर्क” के साथ “स्मार्ट वर्क” अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि वर्तमान दौर नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी उत्कृष्टता का है। विज्ञान और तकनीक को सामरिक शक्ति का आधार बनाने वाले राष्ट्र ही वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अब केवल बड़े और संसाधन-संपन्न देशों को ही रणनीतिक बढ़त नहीं मिलती, बल्कि छोटे देश भी अत्याधुनिक तकनीक, उन्नत हथियार प्रणालियों और नवोन्मेषी सैन्य रणनीतियों के बल पर प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं।
रक्षा मंत्री ने अधिकारियों से अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और समकालीन युद्धों का अध्ययन करने तथा उनसे प्राप्त अनुभवों को अपने प्रशिक्षण और कार्यशैली का हिस्सा बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि निरंतर सीखना और स्वयं को अद्यतन रखना किसी भी सैन्य अधिकारी की सबसे बड़ी ताकत है।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नव-नियुक्त अधिकारी भारतीय वायु सेना की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए देश की सुरक्षा, संप्रभुता और सम्मान की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
महिला कैडेटों की ऐतिहासिक कमीशनिंग
217वीं संयुक्त दीक्षांत परेड कई दृष्टियों से ऐतिहासिक रही। यह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में प्रशिक्षित महिला कैडेटों के पहले बैच की भारतीय वायु सेना में कमीशनिंग का भी महत्वपूर्ण अवसर बना। एनडीए से स्नातक होने के बाद इन महिला कैडेटों ने वायु सेना अकादमी में शाखा-विशिष्ट प्रशिक्षण प्राप्त किया और अब वे भारतीय वायु सेना की अधिकारी के रूप में सेवा देंगी। इसे सशस्त्र बलों में लैंगिक समानता और महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
हवाई करतबों ने बांधा समां
समारोह में सुखोई एसयू-30एमकेआई लड़ाकू विमानों ने अपनी युद्धक क्षमता का प्रदर्शन किया। वहीं सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम और सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम ने रोमांचक हवाई करतब दिखाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
समारोह में वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, प्रशिक्षक, कैडेटों के परिजन तथा बड़ी संख्या में आमंत्रित अतिथि उपस्थित रहे। यह आयोजन भारतीय वायु सेना की पेशेवर दक्षता, अत्याधुनिक प्रशिक्षण व्यवस्था और देश की बढ़ती रक्षा क्षमताओं की प्रभावशाली झलक प्रस्तुत करता नजर आया।
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