संगीत जगत की प्रतिष्ठित हस्ती प्रो. मंगला कपूर को मिला राष्ट्रीय सम्मान, भारतीय शास्त्रीय संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में निभाई अहम भूमिका
News Saga Desk
“कुछ लोग परिस्थितियों के आगे झुक जाते हैं, और कुछ लोग परिस्थितियों को ही अपनी ताकत बना लेते हैं। प्रोफेसर मंगला कपूर उन विरले व्यक्तित्वों में से हैं, जिन्होंने दर्द को अपनी पहचान नहीं बनने दिया, बल्कि उसी दर्द को साधना, संघर्ष और सफलता की ऐसी मिसाल में बदल दिया, जो लाखों लोगों को प्रेरित करती है।“
एसिड अटैक सर्वाइवर होने के बावजूद उन्होंने स्वयं को पीड़ा में नहीं समेटा, बल्कि उसी पीड़ा को सुर, साधना और शोध में ढाल दिया। भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित प्रोफेसर मंगला कपूर का जीवन इस बात का सशक्त प्रमाण है कि जब लक्ष्य स्पष्ट हो और हौसले बुलंद हों, तो कोई भी कठिनाई इंसान को उसकी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती।
15 जनवरी 1954 को वाराणसी में जन्मी प्रोफेसर मंगला कपूर भारतीय शास्त्रीय संगीत की प्रतिष्ठित गायिका, विदुषी और शिक्षाविद हैं। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से संगीत में एम. म्यूजिक और पीएचडी की उपाधि स्वर्ण पदक के साथ प्राप्त की। पंडित चित्ररंजन ज्योतिषी के मार्गदर्शन में उन्होंने शोध कार्य पूरा किया और तीन दशकों से अधिक समय तक बीएचयू में शिक्षण एवं शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वर्ष 2019 में वह संगीत विभाग की प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष के पद से सेवानिवृत्त हुईं।
गुरु-शिष्य परंपरा में प्रशिक्षित प्रो. कपूर ने पंडित सुरेंद्र मोहन मिश्रा से ग्वालियर घराने और अर्ध-शास्त्रीय संगीत की बारीकियां सीखीं। उन्होंने मंचीय प्रस्तुतियों, शोध कार्यों और शिक्षण के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
लेकिन उनकी कहानी केवल संगीत की नहीं, बल्कि अदम्य साहस की भी कहानी है। सातवीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान उन पर एसिड अटैक हुआ। इस हादसे ने उनके चेहरे और शरीर को गंभीर रूप से प्रभावित किया। इलाज के लिए उन्हें 37 से अधिक सर्जरी से गुजरना पड़ा। स्कूल में उपहास और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उनके पिता ने हर कदम पर उनका साथ दिया और यही समर्थन उनके संघर्ष को शक्ति देता रहा।
शारीरिक पीड़ा और सामाजिक तिरस्कार के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को टूटने नहीं दिया। उन्होंने संगीत को अपना संबल बनाया और उसी के माध्यम से जीवन को नई दिशा दी। गंगा महोत्सव, सुबह-ए-बनारस और बुढ़वा मंगल जैसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक आयोजनों में उनकी प्रस्तुतियां आज भी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देती हैं।
प्रोफेसर मंगला कपूर केवल एक कलाकार ही नहीं, बल्कि समाजसेवी भी हैं। उन्होंने “प्रोफेसर मंगला कपूर फाउंडेशन” की स्थापना कर आर्थिक रूप से कमजोर और दिव्यांग विद्यार्थियों को निशुल्क संगीत शिक्षा उपलब्ध कराने का सराहनीय कार्य किया है।
संगीत और समाज के प्रति उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें राज्य रोल मॉडल पुरस्कार 2021, राष्ट्रीय पुरस्कार 2022, सुषमा स्वराज सम्मान 2023, राष्ट्र गौरव सम्मान 2023, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी का आचार्य भारत मुनि पुरस्कार 2024, इंडियन हीरोज अवार्ड 2024 सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है। प्रेम और सम्मान से लोग उन्हें “बनारस की लता” के नाम से भी जानते हैं।
प्रोफेसर मंगला कपूर का जीवन हमें सिखाता है कि असली सुंदरता चेहरे में नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, प्रतिभा और संघर्ष की उस रोशनी में होती है, जो हर अंधेरे को मात दे सकती है। उनका सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा, साहस और समर्पण का जीवंत उदाहरण है।
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