West Bengal Police में अवैध वसूली रोकने के लिए राज्यव्यापी निगरानी तंत्र बनाया जाएगा। तीन हेल्पलाइन नंबर, अलग शिकायत व्यवस्था और छह नई फोरेंसिक लैब स्थापित होंगी।
News Saga Desk
West Bengal Police को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने ट्रैफिक पुलिस द्वारा कथित अवैध वसूली पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए राज्यभर में आधुनिक निगरानी तंत्र स्थापित करने की घोषणा की है। इसके तहत एक अत्याधुनिक नियंत्रण कक्ष बनाया जाएगा और सड़क पर किसी भी पुलिसकर्मी द्वारा अवैध रूप से धन मांगने की शिकायत दर्ज कराने के लिए तीन समर्पित हेल्पलाइन नंबर जारी किए जाएंगे। इसके अलावा अवैध कोयला, बालू, पत्थर और पशु परिवहन की शिकायत के लिए अलग हेल्पलाइन व्यवस्था भी शुरू की जाएगी।
राज्य सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से West Bengal Police की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी और आम नागरिकों को शिकायत दर्ज कराने का आसान माध्यम मिलेगा। यह कदम पुलिस व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाने के साथ-साथ कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
West Bengal Police के लिए बनेगा अत्याधुनिक कंट्रोल रूम
विधानसभा में गृह विभाग के बजट पर चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की तर्ज पर एक आधुनिक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जा रहा है। इस कंट्रोल रूम के माध्यम से राज्य के किसी भी हिस्से में होने वाली अवैध वसूली की सूचना सीधे कोलकाता स्थित मुख्यालय तक पहुंचेगी।
उन्होंने कहा कि यदि फरक्का, कालियाचक या किसी अन्य दूरस्थ इलाके में कोई पुलिसकर्मी अवैध रूप से धन मांगता है, तो उसकी शिकायत तुरंत नियंत्रण कक्ष तक पहुंच जाएगी और संबंधित अधिकारी के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जाएगी।
तीन हेल्पलाइन नंबर और अलग शिकायत प्रणाली
सरकार ने घोषणा की है कि West Bengal Police से जुड़ी शिकायतों के लिए तीन समर्पित हेल्पलाइन नंबर जारी किए जाएंगे। इन नंबरों पर ट्रैफिक पुलिस द्वारा कथित अवैध वसूली की शिकायत दर्ज कराई जा सकेगी।
इसके साथ ही बिना वैध दस्तावेज के कोयला, बालू, पत्थर, पशु और अन्य वस्तुओं के अवैध परिवहन की सूचना देने के लिए अलग हेल्पलाइन व्यवस्था भी विकसित की जाएगी। इससे अवैध खनन और तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण की उम्मीद जताई जा रही है।
पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने की बड़ी योजना
मुख्यमंत्री ने गृह विभाग के बजट के दौरान पुलिस व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए कई अहम घोषणाएं भी कीं। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग में रिक्त पदों को चरणबद्ध तरीके से भरा जाएगा ताकि बल की क्षमता बढ़ाई जा सके।

साथ ही राज्य में आधुनिक जांच सुविधाओं के विस्तार के लिए खड़गपुर, बैरकपुर, कल्याणी, मुर्शिदाबाद, सिंगुर और मालदा में छह नई क्षेत्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। इन प्रयोगशालाओं से आपराधिक मामलों की जांच तेज और अधिक वैज्ञानिक तरीके से हो सकेगी।
मोबाइल फोरेंसिक यूनिट और खुफिया नेटवर्क होगा मजबूत
सरकार ने मोबाइल फोरेंसिक इकाइयों की संख्या बढ़ाने और उन्हें आधुनिक उपकरणों से लैस करने की योजना भी बनाई है। इससे घटनास्थल पर ही प्रारंभिक वैज्ञानिक जांच संभव हो सकेगी।
इसके अलावा राज्य की खुफिया प्रणाली को राष्ट्रीय गुप्तचर ग्रिड से जोड़ने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इससे सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान और बेहतर समन्वय स्थापित होगा।
सीमा सुरक्षा और माओवादी प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष ध्यान
मुख्यमंत्री ने बताया कि घुसपैठ रोकने के लिए सीमा से लगे 12 जिलों के 319 गांवों को सीमा सुरक्षा बल की “आंख और कान” के रूप में विकसित किया जाएगा। स्थानीय लोगों के सहयोग से संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तेजी से सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंचाई जाएगी।
इसके अलावा झाड़ग्राम जिले में माओवादी गतिविधियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए विशेष पैकेज लागू किया जाएगा ताकि सुरक्षा व्यवस्था और विकास कार्यों को गति मिल सके।
पुलिस प्रशिक्षण और रिस्पांस टाइम पर जोर
West Bengal Police की कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का भी विस्तार किया जाएगा। कुछ पुलिसकर्मियों को गुजरात के रक्षा विश्वविद्यालय में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, जबकि सीमा सुरक्षा बल के असम स्थित प्रशिक्षण संस्थान में भी प्रशिक्षण की व्यवस्था की जा रही है।
तटीय पुलिस के प्रशिक्षण के लिए सीमा सुरक्षा बल के साथ समझौते की प्रक्रिया चल रही है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी आपात घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस के घटनास्थल पर पहुंचने का समय कम करने के लिए नई कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
पिछले कुछ समय से ट्रैफिक पुलिस द्वारा कथित अवैध वसूली और अवैध परिवहन से जुड़े मामलों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। इन्हीं शिकायतों को देखते हुए राज्य सरकार ने तकनीक आधारित निगरानी तंत्र विकसित करने का निर्णय लिया है ताकि शिकायतों का त्वरित समाधान और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
नई निगरानी व्यवस्था, हेल्पलाइन नंबर और आधुनिक फोरेंसिक सुविधाओं से पुलिस व्यवस्था अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनेगी। इससे आम नागरिकों का भरोसा बढ़ेगा और अपराध जांच की गुणवत्ता में भी सुधार होने की संभावना है।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा कि राज्य के किसी भी हिस्से में यदि कोई पुलिसकर्मी अवैध वसूली करता है तो उसकी शिकायत सीधे नियंत्रण कक्ष तक पहुंचेगी और दोषी अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने पुलिस आधुनिकीकरण और फोरेंसिक सुविधाओं के विस्तार की भी घोषणा की।
सरकार जल्द ही ट्रैफिक पुलिस की शिकायतों के लिए तीन हेल्पलाइन नंबर जारी करेगी। साथ ही अवैध कोयला, बालू, पत्थर और पशु परिवहन की शिकायत दर्ज कराने के लिए अलग हेल्पलाइन भी उपलब्ध कराई जाएगी। नागरिकों से अपील की गई है कि किसी भी अवैध गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित हेल्पलाइन पर दें।
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