West Bengal UCC Bill

West Bengal UCC Bill: विधानसभा में आज पेश हो सकता है समान नागरिक संहिता विधेयक, टीएमसी ने किया विरोध

West Bengal UCC Bill आज विधानसभा में पेश हो सकता है। विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने के नियम सभी नागरिकों के लिए समान होंगे। टीएमसी ने किया विरोध।

News Saga Desk

पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार सोमवार को विधानसभा में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) विधेयक पेश कर सकती है। यदि यह विधेयक सदन में पेश होता है तो राज्य की राजनीति में एक बड़ा वैचारिक और राजनीतिक संघर्ष देखने को मिल सकता है। भाजपा ने विधानसभा चुनाव के दौरान अपने संकल्प पत्र में यूसीसी लागू करने का वादा किया था और सरकार बनने के छह महीने के भीतर इसे लागू करने की बात कही थी। अब सरकार इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।

प्रस्तावित यूसीसी विधेयक का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, विरासत, संपत्ति के बंटवारे और गोद लेने जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है। भाजपा का कहना है कि यह कानून धर्म के आधार पर अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह एक समान नागरिक व्यवस्था स्थापित करेगा और सभी नागरिकों के लिए कानून के समक्ष समानता सुनिश्चित करेगा।

भाजपा का चुनावी वादा पूरा करने की तैयारी

पश्चिम Bengal विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने अपने घोषणापत्र में यूसीसी को प्रमुख मुद्दों में शामिल किया था। उस समय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि भाजपा सरकार बनने के छह महीने के भीतर राज्य में समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी।

सरकार का दावा है कि यह कदम संविधान की मूल भावना और समान अधिकारों के सिद्धांत के अनुरूप है। भाजपा नेताओं का कहना है कि देश के कई राज्यों में यूसीसी को लेकर पहल हो चुकी है और पश्चिम बंगाल भी उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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विवाह, तलाक और विरासत के नियमों में होगा बदलाव

प्रस्तावित विधेयक लागू होने के बाद विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, विरासत और गोद लेने से जुड़े मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू होगा। इससे विभिन्न धर्मों के अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह एक समान कानूनी व्यवस्था स्थापित होगी।

हालांकि सरकार ने संकेत दिया है कि संविधान के तहत संरक्षित कुछ विशेष वर्गों को कानून के दायरे से बाहर रखा जा सकता है। भाजपा का कहना है कि अनुसूचित जनजातियों के पारंपरिक अधिकारों और रीति-रिवाजों को सुरक्षित रखा जाएगा।

आदिवासी समुदाय को मिलेगी छूट

राज्य भाजपा अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया है कि संविधान के अनुच्छेद 366(25) और 342 के तहत मान्यता प्राप्त अनुसूचित जनजातियों को प्रस्तावित यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदायों की परंपराओं, रीति-रिवाजों और विशेष अधिकारों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा।

भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि यूसीसी का परिवार नियोजन या परिवार के आकार को नियंत्रित करने से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने ऐसे दावों को भ्रामक बताते हुए खारिज कर दिया।

विधानसभा में टकराव के आसार

यूसीसी विधेयक को लेकर विधानसभा में तीखी बहस होने की संभावना है। भाजपा इसे अपने प्रमुख चुनावी वादों में से एक की पूर्ति बता रही है, जबकि विपक्षी दल इसे सामाजिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा मान रहे हैं।

विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने संकेत दिया है कि सरकार मौजूदा सत्र में ही इस विधेयक को पारित कराने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अन्य भाजपा शासित राज्यों में प्रक्रिया का पालन करते हुए यूसीसी लागू किया गया, उसी प्रकार पश्चिम बंगाल में भी इसे लागू किया जाएगा।

टीएमसी ने किया कड़ा विरोध

पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने इस विधेयक का कड़ा विरोध करने का फैसला किया है। पार्टी की रणनीति बैठक में विधायकों और वरिष्ठ नेताओं को विधानसभा के भीतर और बाहर इसका विरोध करने के निर्देश दिए गए हैं।

टीएमसी का आरोप है कि भाजपा यूसीसी को कानूनी सुधार के बजाय राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि इतने व्यापक सामाजिक प्रभाव वाले कानून पर विस्तृत जन चर्चा और सभी समुदायों से परामर्श आवश्यक है।

टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि सवाल यह है कि क्या यूसीसी वास्तव में नागरिकों के हित और संवैधानिक मूल्यों के लिए लाया जा रहा है या फिर इसका इस्तेमाल राजनीतिक ध्रुवीकरण के लिए किया जा रहा है।

जल्दबाजी पर भी उठे सवाल

विपक्ष के कुछ नेताओं ने सरकार की जल्दबाजी पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि व्यक्तिगत कानूनों और पारिवारिक मामलों से जुड़े इतने बड़े बदलाव को व्यापक सामाजिक सहमति के बिना लागू नहीं किया जाना चाहिए।

विरोधी नेताओं का मानना है कि यूसीसी जैसे महत्वपूर्ण विषय पर विभिन्न समुदायों, कानूनी विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों के साथ व्यापक चर्चा जरूरी है ताकि सभी पक्षों की चिंताओं को ध्यान में रखा जा सके।

दो अन्य विधेयक भी हो सकते हैं पेश

यूसीसी के अलावा सरकार विधानसभा में दो अन्य महत्वपूर्ण विधेयक भी पेश कर सकती है। इनमें पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा और असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण विधेयक, 2026 तथा पश्चिम बंगाल सार्वजनिक व्यवस्था रखरखाव (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल हैं।

इन विधेयकों में संगठित अपराध, जबरन वसूली, सार्वजनिक अव्यवस्था, तोड़फोड़ और सरकारी कर्मचारियों पर हमलों से सख्ती से निपटने के प्रावधान प्रस्तावित हैं। साथ ही सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा माने जाने वाले व्यक्तियों को एक वर्ष तक निवारक हिरासत में रखने और नुकसान की भरपाई के लिए संपत्ति जब्त करने जैसे प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।

पश्चिम बंगाल विधानसभा का यह सत्र यूसीसी विधेयक के कारण राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राज्य की राजनीति और अधिक गर्माने की संभावना है।

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