पश्चिमी सिंहभूम के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र में पुलिस गश्ती की डिजिटल निगरानी शुरू हुई। 14 संवेदनशील स्थानों पर रक्षक ऐप के बारकोड लगाए गए हैं।
News Saga Desk
पश्चिमी सिंहभूम में पुलिस गश्ती व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया गया है। मुफ्फसिल थाना क्षेत्र में पुलिस गश्ती की डिजिटल निगरानी के लिए 14 महत्वपूर्ण और संवेदनशील स्थानों पर ‘रक्षक ऐप’ के बारकोड स्टीकर लगाए गए हैं। अब गश्ती दल इन निर्धारित स्थानों पर पहुंचकर बारकोड को ऐप के माध्यम से स्कैन करेगा, जिससे पुलिसकर्मियों की मौजूदगी डिजिटल रूप से दर्ज हो सकेगी।
इस नई व्यवस्था का उद्देश्य बीट पुलिसिंग को मजबूत करने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना है कि गश्ती दल निर्धारित रूट और चिन्हित स्थानों पर नियमित रूप से पहुंच रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि तकनीक आधारित निगरानी से गश्ती व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। साथ ही संवेदनशील इलाकों में पुलिस की मौजूदगी को भी बेहतर तरीके से सुनिश्चित किया जा सकेगा।
14 महत्वपूर्ण स्थानों पर लगाए गए बारकोड
रविवार को मुफ्फसिल थाना प्रभारी विनोद कुमार के नेतृत्व में विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान में प्रोबेशनर पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) बिरजू कुमार और पुलिस अवर निरीक्षक मिथुन कुमार भी शामिल रहे।

पुलिस टीम ने थाना क्षेत्र के संवेदनशील और अति संवेदनशील इलाकों की पहचान कर करीब 14 महत्वपूर्ण स्थानों पर बारकोड स्टीकर लगाए। इनमें पेट्रोल पंप, कोल्हान रेंज कार्यालय, स्कूल-कॉलेज, प्रमुख चौक-चौराहे और अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थान शामिल हैं।
इन स्थानों का चयन इस उद्देश्य से किया गया है कि पुलिस गश्ती दल नियमित अंतराल पर इन क्षेत्रों में पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा ले सके।
कैसे काम करेगा ‘रक्षक ऐप’
पुलिस गश्ती की नई व्यवस्था में ‘रक्षक ऐप’ अहम भूमिका निभाएगा। गश्ती के दौरान पुलिसकर्मी जब किसी निर्धारित स्थान पर पहुंचेंगे तो वहां लगाए गए बारकोड को अपने मोबाइल में मौजूद ऐप के जरिए स्कैन करेंगे।
बारकोड स्कैन होते ही संबंधित स्थान पर गश्ती दल की मौजूदगी की जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज हो जाएगी। इससे अधिकारियों को यह पता लगाने में आसानी होगी कि गश्ती दल निर्धारित स्थान तक पहुंचा या नहीं।
पश्चिमी सिंहभूम में पुलिस गश्ती की इस डिजिटल निगरानी व्यवस्था से पारंपरिक निरीक्षण के साथ तकनीक को जोड़ा गया है। इससे गश्ती की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित तरीके से ट्रैक करने में मदद मिलेगी।
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गश्ती दल की जवाबदेही होगी तय
नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य गश्ती दल की जवाबदेही तय करना भी है। कई बार पुलिस गश्ती की निगरानी के लिए अधिकारियों को मौके पर जाकर या कर्मचारियों से रिपोर्ट लेकर जानकारी जुटानी पड़ती है। बारकोड आधारित व्यवस्था में गश्ती के दौरान स्कैन की गई जानकारी डिजिटल रिकॉर्ड का हिस्सा बन जाएगी।
इससे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को यह देखने में मदद मिलेगी कि निर्धारित रूट पर गश्ती नियमित रूप से हो रही है या नहीं। यदि किसी संवेदनशील स्थान पर गश्ती दल की मौजूदगी दर्ज नहीं होती है तो उस पर संबंधित स्तर से ध्यान दिया जा सकता है।
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