नदी के बीच जिंदगी: नाव ही है सहारा, जमीरा टापू के लोग आज भी सड़क से कोसों दूर

News Saga Desk

पूर्णिया | बिहार में पूर्णिया जिले के अमौर प्रखंड के तियरपारा पंचायत के वार्ड संख्या 9 स्थित जमीरा गांव के लोगों की जिंदगी आज भी संघर्ष का पर्याय बनी हुई है। चारों तरफ हिछामती नदी से घिरे इस छोटे से टापू में बसे लगभग 25 से 30 परिवार आज़ादी के बाद से अब तक मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जमीरा तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता नाव है। साल के बारहों महीने उन्हें नदी पार कर आना-जाना पड़ता है। बरसात और बाढ़ के दिनों में तो हालात और भी भयावह हो जाते हैं — कई बार लोगों को कई दिनों तक भूखा रहना पड़ता है।

गांव के लोग बताते हैं कि उनके घर से महज़ 100 मीटर की दूरी पर प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क बनी हुई है, लेकिन नदी पार करने का कोई स्थायी साधन न होने के कारण वह सड़क उनके किसी काम की नहीं। उन्होंने कहा कि वर्षों से सांसद, विधायक, मुखिया और जिला परिषद तक गुहार लगाने के बावजूद किसी ने जमीरा वासियों की सुध नहीं ली।

ग्रामीणों ने सरकार से जल्द से जल्द आवागमन बहाल करने की मांग की है ताकि वे बाकी दुनिया से जुड़ सकें और अपने बच्चों को सुरक्षित भविष्य दे सकें।

मांग करने वालों में मोहम्मद तहसीन आलम, मंगल कुमार, मोहम्मद इमरान, मोहम्मद तबरेज, तनवीर आलम और दिलशाद अहमद सहित अन्य ग्रामीण शामिल हैं।

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