News Saga Desk
पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आया है, जब राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वायरल वीडियो में मंत्री पांडे का काफिला पटना के अटल पथ पर आक्रोशित भीड़ से घिरा हुआ दिख रहा है, जहां पत्थरबाज़ी में उनकी गाड़ी के शीशे तक टूट गए। मंत्री को सुरक्षा घेरे में वहां से भागना पड़ा।
बताया जा रहा है कि यह घटना पटना के पटेल नगर में दो मासूम भाई-बहनों की नृशंस हत्या के बाद हुई। हत्या से गुस्साई भीड़ जब सड़क पर उतरी, उसी दौरान मंत्री वहां पहुंच गए, जिससे माहौल और गरमा गया।
अंग प्रत्यारोपण में कार्निया व किडनी प्रत्यारोपण हो रहा है, जबकि लिवर व अन्य अंगों के ट्रांसप्लांट की सुविधा की जा रही है। ये जानकारी मंगलवार को एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक सौरव वार्ष्णेय ने शासी निकाय की बैठक में दी। इसमें पटनासिटी के सांसद रविशंकर प्रसाद, कटिहार सांसद तारिक अनवर समेत बोर्ड आफ गवर्नर के अन्य सदस्य मौजूद थे। मौके पर एम्स पटना के नए प्रेसिडेंट एसजीपीजीआइ लखनऊ के निदेशक डा. राधाकृष्णन धीमान ने पदभार ग्रहण किया।
उन्होंने एम्स पटना में मरीजों के लिए बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के साथ शोध-अनुसंधान, शिक्षण व प्रशिक्षण सुविधाओं के विकास की अपनी योजना की जानकारी दी। सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि रिक्त फैकल्टी व कर्मचारियों के पद जल्द से जल्द भरे जाएं। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत के तहत पटना एम्स में अनेक मरीजों का इलाज हुआ। इससे गरीबों के 50 करोड़ से अधिक की बचत हुई है। उन्होंने फैकल्टी एवं डाक्टर्स के रहने के लिए एम्स परिसर के अंदर ही आवास उपलब्ध कराने की बात कही। इसके लिए नए भवन का निर्माण कार्य जारी है।
इसके अलावा जल्द ही कैंसर के बेहतर इलाज के लिए बिहार सरकार से 27 एकड़ जमीन लेकर अत्याधुनिक कैंसर सेंटर का निर्माण कराया जाएगा। कटिहार, पूर्णिया समेत सीमांचल के मरीजों की अधिक संख्या को देखते हुए उनके लिए धर्मशाला की सुविधा जल्द उपलब्ध कराने पर उन्होंने जोर दिया।
डॉ. कुमार सिद्धार्थ को किया गया पदमुक्त
एम्स पटना इंस्टीट्यूट बाडी की बैठक में डॉ. कुमार सिद्धार्थ को पदमुक्त कर दिया गया। बताते चलें कि गलत ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी लेने के मामले में उन पर कार्रवाई की गई है। अब सीबीआइ इस मामले की जांच कर रही है और उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
इसके अलावा ओबीसी कमीशन के निर्देश के अनुसार इस कोटि में नियुक्त सभी डाक्टर्स को अपने प्रमाणपत्र, माता-पिता की नौकरी के विवरण आदि जमा कराने को कहा गया है। निदेशक डा. सौरव वार्ष्णेय ने बताया कि जांच आदि के बाद डिसमिसल समेत ये सभी कार्रवाई सामान्य प्रक्रिया हैं।
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