चाय के बाद खाने वाले ब्रेड पर महंगाई की मार, 5 रुपये तक बढ़े दाम

News Saga Desk

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंचने लगा है। पहले LPG सिलेंडर, पेट्रोल-डीजल और दूध की कीमतों में बढ़ोतरी हुई, और अब ब्रेड भी महंगी हो गई है। 19 मई से कई कंपनियों ने ब्रेड की कीमतों में 5 रुपये तक का इजाफा कर दिया है, जिससे आम लोगों के नाश्ते का बजट प्रभावित होने लगा है।

कुछ दिन पहले अमूल और मदर डेयरी जैसी कंपनियों ने दूध के दाम में 2 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी की थी। इसके बाद अब मॉर्डन ब्रेड समेत कई ब्रांड्स ने ब्रेड की कीमतें बढ़ा दी हैं। बाजार सूत्रों के मुताबिक, ब्रिटानिया और अन्य कंपनियां भी जल्द दाम बढ़ा सकती हैं।

कितनी बढ़ी ब्रेड की कीमत?

नई कीमतों के अनुसार:

  • 400 ग्राम सैंडविच ब्रेड: ₹55 से बढ़कर ₹60
  • आटा ब्रेड: ₹60 से बढ़कर ₹65
  • ब्राउन ब्रेड: ₹45 से बढ़कर ₹50
  • छोटी ब्रेड: ₹20 से बढ़कर ₹22

इस बढ़ोतरी का सीधा असर मध्यम वर्ग और रोजमर्रा के उपभोक्ताओं पर पड़ने वाला है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ब्रेड की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई बड़ी वजहें हैं। मध्य पूर्व में जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। इसका असर ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट पर पड़ा है।

पैकेजिंग लागत में इजाफा

भारत बड़ी मात्रा में प्लास्टिक आधारित पैकेजिंग सामग्री आयात करता है। वैश्विक सप्लाई संकट और बढ़ती आयात लागत के कारण पैकेजिंग महंगी हो गई है, जिससे ब्रेड कंपनियों की लागत बढ़ी है।

रुपये में कमजोरी

डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट आने से आयातित कच्चा माल और पैकेजिंग सामग्री दोनों महंगे हो गए हैं।

बढ़ी लॉजिस्टिक लागत

पेट्रोल, डीजल और CNG की कीमतों में बढ़ोतरी से कंपनियों की डिलीवरी और ट्रांसपोर्ट लागत भी बढ़ गई है।

आम लोगों पर बढ़ता असर

लगातार बढ़ती महंगाई ने आम परिवारों का किचन बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है। पहले गैस, फिर दूध और अब ब्रेड महंगी होने से सुबह का साधारण नाश्ता भी महंगा पड़ने लगा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में इसी तरह तेजी बनी रही, तो आने वाले दिनों में अन्य खाद्य उत्पादों के दाम भी बढ़ सकते हैं।

कंपनियों की क्या है दलील?

बेकरी और फूड कंपनियों का कहना है कि कच्चे माल, पैकेजिंग और ट्रांसपोर्ट की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में कीमतें बढ़ाना उनकी मजबूरी बन गया है। वहीं उपभोक्ताओं का कहना है कि रोजमर्रा की चीजों के बढ़ते दामों ने घर का बजट संभालना मुश्किल कर दिया है।

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